फ्लैग: शहर की 99 अवैध कॉलोनियों को वैध करने का मामला
हेडिंग : विकास शुल्क 60 रुपये वर्ग गज करने की तैयारी, चुनावी साल में वसूली पर असमंजस
: मामले को लेकर चंडीगढ़ में सीएम ले चुके हैं मंत्री स्तर की मीटिंग
: 2016 में सरकार ने रिहायशी एरिया में 120 रुपये वर्ग गज तो कामर्शियल एरिया में 1000 रुपये वर्ग गज तय किया था विकास शुल्क
: मंत्री का दावा, जल्द वैध होंगी कॉलोनियां, प्रदेश स्तर पर बन रही पॉलिसी
: पूर्व विधायक बोले, लोगों को गुमराह कर रही सरकार, पुरानी पॉलिसी हो चुकी फेल
: अमृत योजना में कालोनियों को शामिल किया जाएगा या नहीं, इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं
विजेंद्र कौशिक
रोहतक। शहर की 99 अवैध कॉलोनियों को वैध करने का मामला विकास शुल्क को लेकर चंडीगढ़ में फंस गया है। सरकार रिहायशी एरिया में विकास शुल्क 60 रुपये वर्ग गज करने को तैयार है, लेकिन चुनावी साल में विकास शुल्क की वसूली कैसे होगी, इसको लेकर असमंजस की स्थिति है। यही कारण है कि सीएम मनोहर लाल चंडीगढ़ में मंत्री स्तर की मीटिंग ले चुके हैं, लेकिन कॉलोनियों को वैध करने का फैसला नहीं हो सका है।
डेढ़ साल पहले नगर निगम की ओर से शहर की 71 अवैध कॉलोनियों को वैध कराने के लिए सरकार के पास चंडीगढ़ फाइल भेजी गई थी। दिसंबर 2016 में सरकार ने फैसला लिया कि जिन कॉलोनियों में लोग 120 रुपये वर्ग गज रिहायशी मकान बनाने पर विकास शुल्क जमा कराएंगे, उस कॉलोनी को वैध किया जाएगा। उक्त कॉलोनियों में सबसे पहले आरडब्ल्यूए का गठन किया जाएगा, जिसमें प्रधान व अन्य पदाधिकारियों के अलावा कॉलोनी में रहने वाले सभी लोग सदस्य बनेंगे। उस कॉलोनी की आरडब्ल्यूए व नगर निगम का एक संयुक्त खाता खोला जाएगा। जिससे कॉलोनियों के लोगों को नगर निगम के पास डेवलपमेंट चार्ज जमा नहीं करना होगा। बल्कि उस संयुक्त खाते में डेवलपमेंट चार्ज जमा होगा और उसमें जितना भी रुपया जमा होगा, उसके ही आधार पर उस कॉलोनी में विकास कार्य कराए जाएंगे। नगर निगम भी उसमें अपनी भागीदारी करेगा, जिससे कॉलोनियों में बेहतर सुविधाएं मिल सके।
कॉलोनियों की खाक छानते रहे अधिकारी, नहीं गठित हुई एक भी कमेटी
करीब डेढ़ साल से नगर निगम के अधिकारी व बिल्डिंग इंस्पेक्टर कॉलोनियों में जाकर गलियों की खाक छानते रहे, लेकिन एक भी कॉलोनी में आरडब्ल्यूए का गठन नहीं हो सका। इसकी रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जा चुकी है। यही कारण है कि अवैध कॉलोनियों को वैध करने की प्रक्रिया अटकी हुई है।
पहले चरण में इन 71 कॉलोनियों की भेजी गई थी सूची
निगम की तरफ से सबसे पहले शहर की अजीत कॉलोनी एक्सटेंशन-1 और 2, अमृत कालोनी, अस्थल बोहर एक्सटेंशन और एक्सटेंशन-3, आजादगढ़ एक्सटेंशन, बलियाना आउटर-1, आउटर-2 और आउटर-3, बरसी नगर एक्सटेंशन-1, एक्सटेंशन-2, एक्सटेंशन-3 और एक्सटेंशन-4, बसंत बिहार एक्सटेंशन-1, बस्ती कुताना एक्सटेंशन-1 और एक्सटेंशन-2, बोहर आउटर पार्ट-4, पार्ट-5 और पार्ट-6, फ्रेंड्स कालोनी एक्सटेंशन-1, गढ़ी बोहर आउटर पार्ट-2, हरकी देवी कालोनी एक्सटेंशन, इन्द्र नगर-1, जसबीर कॉलोनी, कन्हेली आउटर पार्ट-1 और आउटर पार्ट-3, कबीर कालोनी एक्सटेंशन-1, एक्सटेंशन-2 और एक्सटेंशन-3, माजरा कालोनी एक्सटेंशन-1, न्यू जनता कॉलोनी, न्यू विजय नगर एक्सटेंशन 1 व 2, न्यू अग्रसेन कालोनी एक्सटेंशन 1 व 2, पंचवटी कालोनी, प्रवेश नगर एक्सटेंशन, पहरावर एक्सटेंशन 1 व 2, राजेंद्र कालोनी एक्सटेंशन 1 व 2, राजीव नगर एक्सटेंशन 1 व 2, राम नगर एक्सटेंशन 1,2 व 3, ऋषि नगर 1,2 व 3, शीतल नगर एक्सटेंशन, शेर विहार एक्सटेंशन 1,2,3 व 4, शिव नगर एक्सटेंशन 1,2 व 3, सुनारिया कला आउटर 1,2,3,4,5,6 व 7, सुनारिया खुर्द आउटर 1 व 3, सूर्य नगर आउटर 1 व 2, ताऊ नगर एक्सटेंशन व विशाल नगर एक्सटेंशन 1 व 2 को शामिल किया गया था।
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दूसरे चरण में 28 कॉलोनियों की सूची गई
निगम की तरफ से दूसरे चरण में 28 कॉलोनियों की सूची भेजी गई, जिसमें डेयरी कांप्लेक्स आउटर भाग 1 व 2, अस्थल बोहर एक्सटेंशन 5, बोहर पार्ट 1ए, 1बी, पार्ट 2 व 3, गढ़ी बोहर 1ए, 1बी, 1सी, 1डी, 1ई, कन्हेली भाग 2ए, 2बी, खेड़ी साध 1ए,1सी, 2, 4ए, 4बी, शीतल नगर 1ए, 1बी, सुनारिया खुर्द भाग 2, सुनारिया कलां 2ए व 2बी को शामिल किया गया था।
वर्जन
सीएम मंत्री स्तर की मीटिंग ले चुके हैं। जल्द सरकार पॉलिसी बनाकर विकास शुल्क की दरें कम कर सकती है। इस पर उच्च स्तर पर मंथन चल रहा है। सभी 99 कॉलोनियों में विकास कराया जाएगा।
-मनीष ग्रोवर, सहकारिता मंत्री
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सरकार की आरडब्ल्यूए बनाकर विकास शुल्क वसूलने की योजना फेल हो चुकी है। मंत्री दावा करते हैं कि 100 अवैध कॉलोनियों का अनुमोदन कर दिया गया है, लेकिन एक भी नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ।
-भारत भूषण बतरा, पूर्व विधायक
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उच्च स्तरीय की मीटिंग चंडीगढ़ में हुई है। क्या फैसला हुआ, अभी निगम प्रशासन के पास कोई सूचना नहीं है। अमृत योजना के अंदर अवैध कॉलोनियों का एरिया शामिल किया गया है या नहीं, यह तो प्रोजेक्ट फाइल देखकर ही बता पाएंगे।
-आरएस वर्मा, आयुक्त नगर निगम