फ्लैग : पांच जोन में बंटा नहरी पानी, 24 की बजाए 42 दिन में आएगी नहर
गर्मी में तरसना होगा बूंद-बूंद के लिए, दिन में एक समय मिलेगा पानी
संजय कुमार
रोहतक।
गर्मियां शुरू होते ही सिंचाई विभाग ने एक बार फिर नहरी पानी को चार से पांच जोन में विभाजित कर दिया है। अब जिले के जलघरों को नहरी पानी 24 की बजाए 42 दिन के अंतराल पर मिलेगा। इसका असर यह होगा कि शहरवासियों को आने वाले 15 दिनों तक पानी की बूंद-बूंद के लिए तरसना पडे़गा। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग अब पेयजल की समस्या से निपटने के लिए दो समय की जगह एक समय ही पानी सप्लाई में देगा। सबसे अधिक समस्या सोनीपत स्टैंड स्थित सबसे पुराने जल घर से जुडे़ उपभोक्ताओं को झेलनी पडे़गी।
जिले के तीन जल घरों में बनाए गए वाटर टैंकों की क्षमता एक सप्ताह के पानी की सप्लाई करने की है। यहां महीने में तीन सप्ताह नहरी पानी मिलता है। एक सप्ताह पानी न आने के दौरान जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग अपना स्टाक किया पानी सप्लाई कर देता है, इससे समस्या नहीं आती थी। लेकिन अब नहरी पानी पांच जोन में बंटने के चलते जल घरों को एक सप्ताह की जगह दो सप्ताह पानी चलाना पडे़गा। इसके कारण दो समय की बजाए विभाग ने अब एक समय पानी देने की शुरूआत कर दी है। इसका असर यह होगा कि जल घर के नजदीक वालों को तो पानी मिलेगा, लेकिन अंतिम छोर वालों को पानी के लिए तरसना होगा। क्योंकि यहां पहले से ही पानी की किल्लत बनी रहती है। स्वयं विभाग की मानें तो झज्जर रोड और सोनीपत रोड पर बने जल घर के उपभोक्ताओं को तो अधिक समस्या नहीं होगी, लेकिन 1931 में बने सोनीपत स्टैंड पर बने शहर के सबसे पुराने जल घर के उपभोक्ताओं को अधिक समस्या होगी। इस जल घर के क्षेत्र में शहर का अधिकांश एरिया आता है और यहां सर्दियों में भी पानी की किल्लत बनी रहती है। ऐसे में गर्मियों में तो पेयजल की समस्या यहां सबसे अधिक होने वाली है।
अधिकारी का पक्ष
भालौट सब डिवीजन नहर में एक मई और जवाहर लाल नेहरू नहर में आठ से दस अप्रैल को पानी आएगा। इतने सोनीपत स्टैंड स्थित जल घर को अपने वाटर टैंक में स्टाक किए गए पानी से ही काम चलाना पडे़गा। विभाग जल घर से प्रतिदिन 96 मीट्रिक लीटर प्रतिदिन पानी सप्लाई करता है। वाटर टैंक की क्षमता कम होने के चलते समस्या होती है, सबसे अधिक समस्या साल में तीन माह होती है। गर्मियों में दादरी, महेंद्रगढ़, नारनौल पानी पहुंचाने के लिए नहरी पानी को पांच जोन में बांटा जाता है, जबकि सामान्य यह चार जोन में होता है। अब विभाग नहर आने तक एक समय ही पानी सप्लाई में देगा।
- सुरेश अहलावत, एसडीई, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग
अमृत योजना ही कर सकती है समस्या का समाधान
शहर के पेयजल की समस्या के लिए अब अंतिम समाधान अमृत योजना का लागू होना ही बचा है। विभाग की मानें तो इस योजना के तहत सोनीपत रोड स्थित जल घर पर एक अतिरिक्त फिल्टर और एक अलग से वाटर टैंक बनाने की योजना है। इससे शहर के लोगों की जरूरतों को पूरा करने की तैयारी है। उम्मीद है कि इस साल इस पर काम शुरू हो जाएगा। इस संबंध में विभाग ने टेंडर लगा दिया है।
यदि पानी की किल्लत है विभाग करेगा वाटर टैंकर की व्यवस्था
शहर में यदि कहीं पानी की समस्या रहेगी तो वह टैंकर मंगवा सकता है। विभाग पानी का टैंकर किसी भी कॉलोनी में नि:शुल्क भेजेगा। विभाग की मानें तो एक टैंकर में सात से दस हजार लीटर पानी आता है, इससे लगभग एक गली का काम चल जाता है। अधिकांश पानी के टैंकरों की जरूरत आउटर एरिया में पड़ती है, जहां किसी वजह से पानी नहीं पहुंच पाता।