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इको नहीं जीवन रेखा ही दिलाएगी काला पीलिया से मुक्ति

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इको नहीं जीवन रेखा ही दिलाएगी काला पीलिया से मुक्ति
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
काला पीलिया के रोगियों के लिए वरदान बनी जीवन रेखा योजना पर लगा ग्रहण अब हट गया है। अब इसके मरीजों को इको नहीं बल्कि जीवन रेखा योजना के तहत हर जिले में उपचार मिलेगा। प्रदेश का निवासी होने का प्रमाण पत्र दिखाते ही मरीज को उसी के जिले में निशुल्क जांच और दवाएं मिलेंगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से पीजीआईएमएस के गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीन मल्होत्रा बतौर प्रमुख नोडल अधिकारी हैं। हर जिले के हिसाब से प्रदेश में जिला स्तर पर 21 नोडल अधिकारी नियुक्त हैं।
प्रदेश में अब तक दस हजार से अधिक मरीजों का उपचार हो चुका है और पांच हजार का उपचार जारी है। हाल ही में सरकार ने काला पीलिया की जांच और उपचार हर जिले में निशुल्क करने की घोषणा की है, इससे अधिक मरीज सामने आएंगे। सरकार ने हर जिला अस्पताल में इसके मरीजों के लिए कूपन भिजवा दिए हैं। सबसे अहम यह है कि सरकार ने प्रदेश की जेलों में बंद सभी कैदियों को यह उपचार निशुल्क उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
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प्रदेश में काला पीलिया की जांच और दवा हर वर्ग के लिए निशुल्क है, जबकि पंजाब में सिर्फ दवाएं निशुल्क है और जांच की फीस देनी पड़ती हैं। सरकार ने प्रावधान किया है कि यदि कोई मरीज निजी अस्पताल से दवा ले रहा है तो भी वह सरकारी संस्थान में आ कर अपनी आगे की दवा निशुल्क ले सकता है। काला पीलिया के मरीज पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, पूर्वी राज्य, महाराष्ट्र, आंध प्रदेश में हैं। काला पीलिया का उपचार कर रहे जीवन रेखा योजना के आंकड़ों के अनुसार अकेले पीजीआईएमएस में 800 मरीज उपचाराधीन हैं और 1700 का उपचार हो चुका है।

जीवन रेखा ने ऐसे बढ़ाई अपनी जीवन रेखा
काला पीलिया के रोगियों के लिए 2013 में जीवन रेखा योजना शुरू की गई थी। इसमें पहले कैथल, फतेहाबाद, जींद के एससी व बीपीएल मरीजों को निशुल्क उपचार दिया जाता था। इस समय उपचार का प्राइवेट खर्च चार से आठ लाख रुपये आता था। सरकार को हर जिले में यह उपचार सुविधा उपलब्ध कराने का प्रोजेक्ट भेजा गया तो यह दवा सरकार ने एक से दो लाख रुपये में खरीदी। इसके साथ ही नियम बना कि सामान्य वर्ग को यह दवा सरकार द्वारा तय रेट पर ही बाजार में उपलब्ध कराई जाएगी। वर्ष 2015 में टीका की जगह गोलियां बाजार में आ गईं और इसका खर्च घटकर 42 हजार रुपये आ गया। दवा की इस कीमत को सिविल सर्जन डॉ. कुलदीप कम करवा कर 18 हजार रुपये पर ले आए।
विधानसभा में स्वयं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने इस कामयाबी को सभी के समक्ष रखा कि देश भर में सबसे सस्ता और निशुल्क काला पीलिया का उपचार उनके प्रदेश में उपलब्ध कराया जाता है। इसके बाद इस योजना पर दवा कंपनियों और कुछ अधिकारियों की नजर पड़ गई और इसे बंद करवाने के लिए षडयंत्र रचा गया। जून 2016 में योजना का नाम बदला गया और आरोप-प्रत्यारोप के बीच नोडल अधिकारी तक बदल दिए गए। मामला हाई कोर्ट तक गया और जीवन रेखा योजना को नया जीवन मिला। हाईकोर्ट के निर्देशों पर डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने वापस नोडल अधिकारी के रूप में इस योजना पर फिर कार्य करना शुरू किया। इसमें पूर्व निदेशक स्वास्थ्य विभाग सहित कुछ अधिकारियों पर मामले भी दर्ज हुए हैं। यह मामला अभी भी स्थानीय कोर्ट के अलावा हाई कोर्ट में चल रहा है। फरवरी 2017 से हरियाणा के हर वर्ग के निवासियों के लिए यह उपचार निशुल्क उपलब्ध है।

मरीजों के उपचार का आंकड़ा
जिला उपचार पा रहे उपचार बंद
फतेहाबाद 900 800
कैथल 1000 750
सोनीपत 500 400

क्या है काला पीलिया
यह एचसीवीआरएनए वायरस है। इसका यदि लंबे समय तक उपचार न हो तो यह लीवर को खराब कर देता है और कैंसर होने का खतरा बना रहता है। इसके बाद मरीज को लीवर ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है, इसमें लगभग 25 लाख रुपये का खर्च आता है। यह खून के संक्रमण से फैलता है। इसकी मुख्य वजह झोला छाप डॉक्टरों द्वारा बगैर कारण ग्लूकोज लगाना, बगैर सुई बदले टैटू गुदवाना, प्रयोग हुई सुई और सीरिंज का प्रयोग करना, डायलेसिस, संक्रमित साथी से यौन संबंध, नाई की दुकान हैं। इससे मरीज में खून की कमी, पेट व पैर में सूजन, पेट में पानी बनना, पीलिया होना आदि समस्या होती है।
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यह बोले अधिकारी
काला पीलिया का उपचार प्रदेश के लोगों के लिए निशुल्क उपलब्ध है। यहां अन्य पड़ोसी राज्यों से भी मरीज उपचार के लिए आते हैं। इस योजना को नव जीवन देने का श्रेय हरियाणा सरकार के सीएम, स्वास्थ्य मंत्री और पीजीआईएमएस के कुलपति डॉ. ओपी कालरा को जाता है।
- डॉ. प्रवीण मल्होत्रा, प्रमुख नोडल अधिकारी, जीवन रेखा योजना
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