अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। स्वास्थ्य विभाग की तर्ज पर जल्द ही पीजीआई में भी मरीजों को यूनिक आईडी दी जाएगी। इसके बाद मरीज की उपचार संबंधी सारी हिस्ट्री एक क्लिक पर डॉक्टर के कंप्यूटर की स्क्रीन पर होगी। इससे मरीज की कार्ड, जांच पर्ची, एक्स-रे गुम होने जैसी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। प्रशासन का दावा है कि इस प्रक्रिया के लिए लगभग सारी तैयारियां पूरी हो गई हैं, तकरीबन दो सप्ताह में यह लागू भी हो जाएगी।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय की ओपीडी और आपातकालीन विभाग में आने वाले मरीजों को आते ही काउंटर पर आधार कार्ड और मोबाइल नंबर देते ही एक यूनिक आईडी नंबर दे दिया जाएगा। इसके बाद उनको दिया जाने वाला ट्रीटमेंट, जांच की सलाह, बीमारी की हिस्ट्री और जांच रिपोर्ट सबकुछ आन लाइन हो जाएगा। मरीज की आईडी के आधार पर कोई भी डॉक्टर मरीज की सारी हिस्ट्री एक क्लिक में अपने कंप्यूटर स्क्रीन पर देख लेगा। इसका लाभ संस्थान में आने वाले प्रदेश भर के मरीजों को मिलेगा। अधिकारियों का कहना है कि कई मरीज अपनी पिछली हिस्ट्री नहीं बता पाते और उनकी जांच रिपोर्ट तक गुम हो चुकी होती हैं। यूनिक आईडी से डॉक्टर को मरीज की हिस्ट्री का पता होगा, इससे मरीज के उपचार में लाभ मिलेगा।
डॉक्टरों की बढ़ेगी परेशानी
यूनिक आईडी डॉक्टरों के लिए आफत बनने जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि यह सिस्टम वहां कामयाब है, जहां दिन में 30 से 40 मरीज देखने हों। यदि किसी डॉक्टर ने ओपीडी में 250 से 300 मरीज देखने हों तो क्या होगा। एक मरीज का डाटा फीड करने में डॉक्टर को कम से कम दस मिनट का समय चाहिए। इसके अलावा डॉक्टर कंप्यूटरों पर डाटा फीड करेंगे या मरीज जांचेंगे। संस्थान के कुछ सीनियर डॉक्टरों ने बताया कि यदि यह व्यवस्था शुरू होगी तो फिर यह बोझ भी जूनियर डॉक्टरों पर आएगा। ऐसे में पहले पर्ची बनाने के बोझ से दबे डॉक्टर कंप्यूटर डाटा आपरेटर बन कर रह जाएंगे। क्लीनिकल उपचार करना जूनियर डॉक्टर कब सीखेंगे। वहीं सूत्रों की मानें तो संस्थान ने डॉक्टरों के पास कंप्यूटर स्क्रीन रखी भी थी, लेकिन एक टेबल होने के चलते सारा सिस्टम सेट नहीं हो पाया। अब कंप्यूटर के लिए अलग से टेबल रखने की व्यवस्था की जा रही है।
बोले अधिकारी
यूनिक आईडी की व्यवस्था आईटी विभाग को दी गई है। दो सप्ताह तक यह शुरू हो जाएगी। इससे मरीजों, डॉक्टर तथा स्टाफ को लाभ होगा। शुरूआत में इस सिस्टम में काम करने के लिए डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। बाद में इसके लिए डाटा एंट्री आपरेटरों की भर्ती कर ली जाएगी।
- डॉ. एचके अग्रवाल, कुलसचिव, हेल्थ विश्वविद्यालय