अब शहर में सप्लाई होगा क्लोरीन युक्त पानी
चरखी दादरी।
अब शहरवासियों को क्लोरीनयुक्त पानी पीने को मिलेगा। बूस्टिंग स्टेशनों के पानी के सैंपल की रिपोर्ट फेल आने के बाद जन स्वास्थ्य विभाग ने न्यूनतम एक पीपीएम और अधिकतम दो पीपीएम क्लोरीन पानी में प्रयोग करने का निर्णय लिया है। स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट में सामने आया था कि जन स्वास्थ्य विभाग बिना क्लोरीन प्रयोग किए ही पेयजल सप्लाई कर रहा था। पानी में क्लोरीन की मात्रा न होने से स्वास्थ्य पर इसके विपरीत प्रभाव पड़ते हैं। अब जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने अपनी पुरानी चूक सुधारते हुए गुणवत्तापरक पेयजल सप्लाई के लिए कर्मचारियों को निर्देश दे दिए हैं।
विभाग शहर के पेयजल का बैक्ट्रोलॅाजिकल टेस्ट फेल पाए जाने पर अब पेयजल मेें मौजूद सभी आवश्यक तत्वों की पूर्ति पर फोकस करने लगा है। अधिकारियों के मुताबिक शहर में अब पीने के पानी में क्लोरीन की मात्रा एक से दो पीपीएम तक रहेगी। क्लोरिन गैस के सिलेंडरों की उपलब्धता पर भी ध्यान दिया जाएगा। जुलाई माह में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शहर के सभी बूस्टिंग स्टेशनों व अन्य सार्वजनिक भागों से पेयजल के सैंपल लिए थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 13 जुलाई को शहर के रोजगार्डन, हीरा चौक, दसनामी अखाड़ा, दिल्ली बाइपास, घिकाड़ा रोड सहित सभी सातों बूस्टिंग के सेंपल लिए थे लेकिन पानी में क्लोरिन की मात्रा शून्य मिली थी। इस पर पीने के पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठने शुरू हो गए थे। बाद में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शहर के रोजगार्डन, घिकाड़ा रोड, हीरा चौक एरिया व बाल्मीकि बस्ती एरिया से पीने के पानी के सैंपल लेकर भिवानी बंसीलाल सामान्य अस्पताल में लैब में जांच के लिए भेजे थे। यह चारों सैंपल बैक्ट्रोलोजिकल टेस्ट के लिए गत 18 जुलाई को भेजे गए थे। कुछ रोज पहले ही इन सैंपल रिपोर्ट आई थी जिसमें चारों सैंपल की रिपोर्ट फेल पाई गई थी। रिपोर्ट के अनुसार यह पानी पीने लायक नहीं माना जाता। यह पानी स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक माना जाता है। जनस्वास्थ्य विभाग नहरी पानी की किल्लत के चलते ट्यूबवेलों का पानी मिलाकर आपूर्ति करता है। इन ट्यूबवेलों का पानी लवणीय होने की वजह से पानी की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
लीकेज कनेक्शन ढूंढकर काटेगी टीम
विभाग अधिकारियों का मानना है कि शहर में काफी संख्या में ऐसे कनेक्शन हैं जो लीकेज हैं। कई उपभोक्ताओं ने अपने कनेक्शन बंद नहीं करवाए और वे चल रहे हैं। इन कनेक्शनों के जरिए दूषित पानी मेन लाइन में मिल जाता है और गंदे पानी की सप्लाई हो जाती है। अब विभाग ने इसके लिए भी एक टीम गठित कर रखी है जो रोजाना किसी न किसी एरिया में जाकर ऐसे कनेक्शन की तलाश कर ऐसे कनेक्शनों को काटा जा रहा है। अब तक करीब एक दर्जन से ज्यादा ऐसे कनेक्शन काटे जा चुके हैं।
वर्किंग में है सभी बूस्टिंग स्टेशनों के क्लोरीन गैस सिलेंडर
== अब पानी में क्लोरिन की मात्रा दो पीपीएम तक शामिल की जाएगी। एक पीपीएम से कम मात्रा किसी भी सूरत में नहीं रहने दिया जाएगा। सभी बूस्टिंग व जलघरों में क्लोरीन की मात्रा का स्तर एक से दो पीपीएम तक रहेगा। इसके लिए विभाग की ओर पूरी निगरानी रखी जा रही है। पानी में क्लोरीन की मात्रा कम न होने पाए इसके लिए नियमित ध्यान दिया जाने लगा है। जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ रामपाल का तर्क है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संभवत: पानी के सैंपल लेने में कोताही बरती है। उनका मानना है कि बारिश के मौसम में क्लोरिन की मात्रा स्वत: ही कम हो जाती है। पानी में रोजाना क्लोरीन मिलाई जाती है लेकिन टेल तक पानी पहुंचने पर यह मात्रा अपने आप कम हो जाती है। शहर के सभी बूस्टिंग स्टेशनों में क्लोरिन गैस सिलेंडर लगा रखे हैं जो पूरी तरह से वर्किंग में रहते हैं।
कब व किस सैंपल में क्या मिली थी खामियां
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 13 जुलाई को शहर के सभी बूस्टिंग स्टेशनों के सैंपल लिए थे। ये सभी सैंपल फेल आए थे। अमर उजाला ने 14 जुलाई के संस्करण में बूस्टिंग स्टेशनों से सप्लाई हो रहे पानी के सैंपल फेल नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आठ अगस्त को शहर के बूस्टिंग स्टेशनों के दोबारा बैक्ट्रोलोजिकल टेस्ट के लिए सैंपल लिए तो वो भी फेल आए। अमर उजाला ने नौ अगस्त के संस्करण में निम्न गुणवत्ता का पानी कर सकता है सेहत खराब नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।
शहर में अब क्लोरिन की मात्रा मिनीमम एक व अधिकतम दो पीपीएम रहेगी। पानी में क्लोरीन की मात्रा को कम नहीं रहने दिया जाएगा। विभाग लोगों को विशुद्ध व गुणवत्तापरक पानी पिलाने को कृत संकल्प है।
एसडीओ रामपाल सिंह, जनस्वास्थ्य विभाग