अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। राजेश बवाना गिरोह के गुर्गों ने फर्जी आईडी पर लिए गए नंबरों से व्यापारियों से रंगदारी वसूलने की साजिश रची थी। गिरोह ने व्हाट्सएप के जरिए 10 से 50 लाख रुपये तक की रंगदारी वसूलने के लिए धमकी भरे चार ऑडियो तैयार किए थे। दिल्ली और रोहतक के करीब 20 व्यापारियों से अगले महीने रंगदारी वसूली जानी थी। सीआईए-2 की टीम की गिरफ्त में आए राजेश बवाना गैंग के गुर्गों ने पूछताछ में इसका खुलासा किया है।
सीआईए-2 ने दिल्ली रोड स्थित पेट्रोल पंप को लूटने की साजिश रच रहे राजेश बवाना गैंग के सांपला के बेरी रोड निवासी रितिक, अटायल गांव निवासी मोहित, सोनीपत के भटगांव निवासी दीपक, झज्जर के बुपनिया गांव निवासी रवि, झज्जर के बादली निवासी अर्जुन, कैथल निवासी संदीप उर्फ बंटी, दिल्ली के कटेवड़ा निवासी मनीष को वीरवार रात दबोचा था। पुलिस की पूछताछ में गुर्गों ने बताया कि उन्होंने दिल्ली के मजदूरों से तीन से पांच हजार रुपये में आईडी लेकर सिम निकलाए थे। इन्हीं सिम नंबर पर वे व्हाट्सएप चला रहे थे। व्यापारियों से 10 से 50 लाख तक की रंगदारी वसूलने के लिए बदमाशों ने बाकायदा धमकी भरे चार ऑडियो भी तैयार किए थे। इसकी मदद से रोहतक, पानीपत, सोनीपत, कैथल, फतेहाबाद, भिवानी, झज्जर के अलावा दिल्ली के राजीव चौक, शाहदरा और सरोजनी नगर के करीब 20 व्यापारियों से मार्च में रंगदारी वसूली जानी थी।
ऑडियो में यह बोल रहे बदमाश
हम हरियाणा और दिल्ली के राजेश बवाना गैंग के सदस्य हैं। यदि जल्द रंगदारी नहीं दी तो हत्या कर दी जाएगी। दो ऑडियो में दस लाख, जबकि दो अन्य में 20 लाख रुपये की रंगदारी देने को कहा गया है। ऑडियो में किसी व्यापारी का नाम नहीं लिया गया है। पुलिस जांच में जुटी है।
राजेश बवाना गैंग का लगभग सफाया किया जा चुका है। यदि पूछताछ में गिरोह के अन्य गुर्गों के नाम सामने आते हैं तो उनको भी गिरफ्तार किया जाएगा।
- आजाद सिंह, प्रभारी, सीआईए-2
दो माह में अमीर बनने का दिखाया जाता था सपना
पुलिस की पूछताछ में गुर्गों ने यह भी खुलासा किया है कि जिस भी सदस्य को गिरोह में जोड़ा जाता था। उसे दो माह के अंदर ही अमीर बनने का सपना दिखाया जाता था। ब्रांडेड कपड़े से लेकर आलीशान फ्लैट दिलाने तक की बात कही जाती थी। गिरोह में अधिकतर हाईस्कूल कर चुके छात्र ही शामिल हैं।
दिल्ली में किराये के फ्लैट में लेते थे शरण
यह भी खुलासा हुआ है कि गिरोह दिल्ली में किराए पर दो फ्लैट लिए हुए है। वारदात को अंजाम देने के बाद इन्हीं फ्लैट में रुकते थे, ताकि पुलिस को भी उन पर कोई शक न हो। पुलिस फ्लैट में रुकने वाले और आने-जाने वाले की जानकारी जुटाने में लगी है।