फ्लैग : चावल मिल का सर्वे करने गई जीएसटी टीम के साथ व्यापारी राजकुमार जिंदल की हो गई थी बहस, व्यापारी का आरोप कि समन भेजकर
हेडिंग : जाट भवन की कैंटीन में अधीक्षक सुदेश कुमार ने बुलाकर कहा, कमिश्नर और असिस्टेंट कमिश्नर हैं नाराज, समन खारिज करने के लिए दे दो 10 लाख
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। फतेहाबाद के राइस मिल व्यापारी और निर्यातक राजकुमार जिंदल की सिरसा रोड स्थित मिल पर जीएसटी टीम ने सर्वे किया था, इस दौरान उनकी टीम और अधिकारियों के साथ बहस हो गई थी। नतीजा उन्हें समन भेजकर धान और चावल के क्रय-विक्रय और निर्यात की जानकारी मांगी गई। इस समन पर जब व्यापारी दिल्ली रोड स्थित जीएसटी आयुक्तालय पहुंचे तो उनके बयान लेने के बजाय एक निजी कैंटीन में जीएसटी अधीक्षक ने मुलाकात की। उसने कहा कि आपने सर्वे के दौरान नोकझोक की, जिससे कमिश्नर और असिस्टेंट कमिश्नर बहुत नाराज हैं। फिर भी समन खारिज कर देंगे, आप 10 लाख रुपये दे दीजिए। व्यापारी का कहना है कि रिश्वत दिए जाने का दबाव बनाया जाने लगा। जबकि खुला चावल और धान बेचने पर जीएसटी लगता ही नहीं है।
व्यापारी राजकुमार जिंदल ने बताया कि 20 जून को समन मिलने के बाद वह 26 जून को जीएसटी आयुक्तालय पहुंचे। यहां वह असिस्टेेंट कमिश्नर से मिले। जिन्होंने उन्हें एंटी इवेजन ब्रांच के अधीक्षक सुदेश कुमार के पास भेज दिया। यहां पर उनसे कोई बात नहीं की गई और शाम चार बजे जाट भवन बुलाया गया। यहां पर उन्हें कमिश्नर और असिस्टेंट कमिश्नर की नाराजगी की बात करते हुए 10 लाख रुपये मांगे गए। जिस पर कहा कि चावल और धान पर जीएसटी लगता ही नहीं और इतनी रकम नहीं दे सकता। इस पर दबाव बनाया जाने लगा। फिर 17 जुलाई को सीए के पास फोन करके कहा गया कि उन्हें 14 अगस्त को भेजा जाए। हालांकि 20 अगस्त को रोहतक के एक निजी होटल में मुलाकात हुई, जहां सीए, मुनीम और व्यापारी मिलने गए। यहां पर 10 लाख से घटकर बात आठ लाख में तय हुई और 28 अगस्त को जाट भवन की कैंटीन में अधीक्षक से मिले। जहां व्यापारी ने एक लाख रुपये देकर अपने मुनीम के साथ दो मोबाइल फोन के जरिए अधीक्षक की विडियो बनाई और शिकायत सीबीआई से की। जिस पर कार्रवाई सुनिश्चित हो सकी।
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31 अगस्त को सीबीआई से चंडीगढ़ में हुई मुलाकात और तीन अगस्त को सीबीआई टीम ने रोहतक में डाला देरा
एक लाख रुपये देने के बाद व्यापारी ने सीबीआई से संपर्क किया और उसे 31 अगस्त को चंडीगढ़ बुलाया गया। जहां उन्होंने सीबीआई के आलाधिकारियों को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए अधीक्षक की विडियो दी। सीबीआई ने कहा कि जांच के बाद कार्रवाई करेंगे। इसके बाद सीबीआई की टीम और व्यापारी तीन अगस्त को रोहतक आ गए और सर्किट हाउस में डेरा जमा लिया। यहां तक किया गया कि चार अगस्त को व्यापारी को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ना है। व्यापारी के कपड़ों में कैमरा और माइक्रोफोन लगाया गया और सुबह साढ़े 11 बजे अधीक्षक को फोन कराया गया और कहा गया कि दोपहर डेढ़ बजे जाट भवन की कैंटीन में आ जाए। आधे घंटे बाद ही अधीक्षक ने फोन कर आने से इंकार कर दिया। पांच अगस्त को फिर फोन किया तो अधीक्षक ने बताया कि किसी काम से सोनीपत आना पड़ गया है। छह अगस्त को फिर कोशिश की, तो अधीक्षक ने दिल्ली के पीरागढ़ी बुलाया। पीरागढ़ी पहुंचकर फोन किया तो कहा कि द्वारिका आओ। इस दिन भी बात नहीं बनी। जिसके बाद वीकेंड की छुट्टी हो गई। रविवार को फिर संपर्क किया, लेकिन अधीक्षक का फोन स्विच ऑफ मिला। जिसके बाद वह सात लाख रुपये लेकर अधीक्षक के ऑफिस ही पहुंच गए और टेबल पर सात लाख रुपये रख दिए।