अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। हरियाणा रोडवेज का चक्का जाम करने की कर्मचारियों की घोषणा बुधवार को प्रशासन की सख्ती व कर्मचारियों की फूट के आगे आखिरकार दम तोड़ ही गई। चंद हड़ताली कर्मचारियों ने अल सुबह तीन बजे से वर्कशाप के गेट पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसकी अनदेखी कर जब प्रशासन ने डिपो से बस निकलवानी शुरू की तो कर्मचारी बस के आगे लेट भी गए और नारेबाजी की, लेकिन कोई हल नहीं निकला। कर्मचारियों की पुलिस बल के साथ धक्का-मुक्की व अधिकारियों से बहस तक हुई। इसके बावजूद हड़ताली कर्मचारी बसों का संचालन नहीं रोक पाए।
रोडवेज का चक्काजाम कर रहे हरियाणा रोडवेज के कर्मचारियों ने सुबह से ही वर्कशॉप के गेट पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। हरिद्वार, आगरा और चंडीगढ़ की एक के बाद एक करके आठ बसों को तहसीलदार, रोडवेज महाप्रबंधक और पुलिस फोर्स के घेरे में उनके तय रूटों पर निकाला गया। इस दौरान गेट पर बैठे आंदोलित कर्मचारियों ने बसों के आगे लेटकर बसों को आगे बढ़ने से रोका और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दरमियान कर्मचारियों की पुलिस से जमकर धक्का-मुक्की और हंगामा हुआ।
डिपो में 850 कर्मचारी, 40 से कम रहे हड़ताल पर
सुबह आठ बजे तक स्थिति यह रही कि प्रशासनिक अमला वर्कशॉप से केवल 14 ही बसों को निकाल सका। वहीं रोडवेज प्रशासन की मानें तो रोहतक डिपो में 850 कर्मचारी हैं और इसमें से 40 से भी कम कर्मचारी हड़ताल पर थे। इसलिए बस संचालन करवाने में कोई समस्या नहीं हुई। हड़ताल करने वालों में माना जा रहा है कि एक निरीक्षक, एक लिपिक, दो वर्कशाप कर्मचारी, 16 परिचालक व 17 चालक ही शामिल थे। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार की ओर से 720 बसें ठेके पर चलवाने और कर्मचारियों पर एस्मा लगाने के विरोध में यह चक्का जाम किया गया था।
निजी बस संचालकों की रही बल्ले-बल्ले
हड़ताल के दौरान यात्री समझ नहीं पा रहे थे कि सरकारी बस चलेगी या नहीं। इसका लाभ निजी बस संचालकों ने खूब उठाया। अधिकांश निजी बसें ओवरलोड बस स्टैंड परिसर से रवाना हुई। सुबह तीन से आठ बजे तक कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच में समय-समय पर नोकझोंक होती रही। वहीं हड़ताल के चलते दूसरे डिपो की बसें भी रोहतक डिपो में नहीं आ रही थी। विभिन्न रूटों पर सुबह जाने वाली बसों के समय में 30 मिनट का अंतराल आ रहा था।
यह बोले अधिकारी
डिपो की सभी 180 बसों को अपने रूटों पर चलाया गया है। कर्मचारियों ने सुबह लगभग दस बजे तक हंगामा किया था। इससे निपटने के लिए 16 बस तो वर्कशॉप से सुबह के समय चलवाई गईं और 16 बसें पहले ही पुलिस लाइन में खड़ी करवा दी गई थीं। इसके अलावा 16 बसें महम से चलवाई गईं। डिपो में किसी कर्मचारी पर कोई मामला या केस दर्ज नहीं हुआ है। अनुपस्थित कर्मचारियों की रिपोर्ट विभाग को भेज दी गई है। हड़ताल में कर्मचारी के बजाय यूनियन के पदाधिकारी ही थे।
- राहुल जैन, महाप्रबंधक, हरियाणा रोडवेज
ये रहे मौजूद
दिनेश हुड्डा, आनंद खिड़वाली, नरेंद्र, कृष्ण, कृष्ण सुहाग, अशोक, सुभाष, सीटू, नरेंद्र, कुलदीप, संदीप, बृजेंद्र, जगवीर, जयभगवान, रामपाल, राजपाल, राजपाल धामड़, संदीप जिंदराणा, दलजीत, दीपक, देवेंद्र, राजपाल, सुरेंद्र, प्रदीप हुड्डा, धर्म सिंह, राजकुमार, प्रवीन, सुरेंद्र आदि मौजूद थे।
कर्मचारी संगठनों में आपसी फूट की वजह से चक्का जाम का आंदोलन कमजोर पड़ गया। इसकी वजह से धरना-प्रदर्शन पर 50 कर्मचारी भी एकत्रित नहीं हो पाए। आंदोलित कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि मंगलवार की सुबह करीब 10 बजे सभी कर्मचारी संगठनों की वर्कशॉप के अंदर बैठक हुई थी। सभी ने एकजुट होकर नारेबाजी करते हुए वर्कशाप और बस स्टैंड पर रैली निकाली। कर्मचारियों से चक्काजाम करने को लेकर समर्थन मांगा गया, लेकिन शाम होते-होते यूनियन कर्मचारियों के नेता बिक गए। वह क्यों बिके और क्या हुआ यह वहीं जानें।
रेलवे स्टेशन पर उमड़ी यात्रियों की भीड़
हरियाणा रोडवेज बसों की हड़ताल की सूचना और समय पर बस नहीं मिलने के कारण रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की संख्या में इजाफा हो गया। भीड़ को नियंत्रण में करने के लिए जीआरपी ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। इसके लिए जगह-जगह यात्रियों के लिए नाके लगवाए गए। स्टेशन के आसपास घूमने वाले आवारा लोगों पर भी नजर रखी गई।