‘निपाह वायरस’ के खतरे को लेकर डीडब्ल्यूएल टीम अलर्ट पर
दो चमगादड़ों की मौत, पोस्टमार्टम कर सैंपल भेजा जांच के लिए हिसार
फोटो सहित एसएनजे 13 मेगा बैट एसएनजे 14 माइक्रो बैट एसएनजे एक डॉ. अशोक खासा
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
निपाह वायरस के खतरे को लेकर देश भर में प्रशासन के साथ डीडब्ल्यूएल की टीम भी अलर्ट पर है। शुक्रवार को टीम को जैसे ही लाढ़ौत रोड पर दो चमगादड़ों के मरने की खबर मिली तो तिलियार झील से डॉ. अशोक खासा मौके पर गए और दोनों शवों को कब्जे में ले लिया। इन्हें चिड़ियाघर में लाकर इनका पोस्टमार्टम किया गया और जांच के लिए हिसार भेज दिया गया है।
डॉ. अशोक खासा ने बताया कि निपाह वायरस से लड़ने की बजाय जागरूक होने की जरूरत है। जो दो चमगादड़ मरे हुए मिले हैं वह हीट स्ट्रोक की वजह से मरे हैं। यह माइक्रो बैट हैं, यह कीट पतंगों को खाते हैं। इनसे निपाह वायरस फैलने का कोई खतरा नहीं है। इसके बावजूद एहतियातन इन्हें जांच के लिए भिजवा दिया गया है। डॉ. खासा ने बताया कि हमें मेगा बैट से अलर्ट रहने की जरूरत है। क्योंकि यह फलों को चूसता है और इस दौरान इसका सलाइवा फल में रह जाता है जो कि किसी मनुष्य के खाने पर यह उसके लिए घातक हो जाता है। इसके साथ ही मेगा बैट का यूरीन भी यदि मनुष्य के खाद्य पदार्थ में शामिल हो जाए तो यह भी घातक है।
क्या है चमगादड़ों में अंतर
मेगा बैट
इनकी दृष्टि तेज होती है। यह फलों को चूसते हैं और इनके दांत काफी नुकीले और जीभ लंबी होने के साथ मुंह पैना होत है। इनकी आंखें भी मोटी होती हैं। इनके यूरीन और सलाइवा से वायरस फैलता है। यह एक बार में 48 किलोमीटर तक की उड़ान भर सकते हैं। यह अधिकांश फलों के बाग में मिलते हैं। इनका मुख्य आहार अंजीर, केला, आम, खजूर, अमरूद हैं। यह प्रकृति के लिए जरूरी भी होते हैं। यह स्तनपायी जीव हैं और एक साल में एक से दो बच्चों को जन्म देते हैं। इनके पंख पांच फीट तक होते हैं।
माइक्रो बैट
यह कीट पतंगों को खाते हैं। निपाह वायरस इनमें भी होता है, लेकिन इनसे खाने पीने की चीजों के माध्यम से मनुष्यों में आने का कोई विकल्प नहीं होता। इसलिए इनसे कोई खतरा नहीं होता। यह भी एक बार में 48 किलोमीटर की उड़ान भर सकते हैं। इनकी संख्या तिलियार झील पर अधिक है। इनके पंख पांच फीट तक होते हैं।
बचाव के लिए क्या करें
किसी भी फल को खाने से पहले उसे अच्छी तरह जांच लें कि वह कहीं से कटा हुआ न हो। फलों पर यूरीन के माध्यम से निपाह वायरस खाने में न आए इसके लिए हर फल को चलते साफ पानी में अच्छी तरह से धो लें। तिलियार झील पर पक्षियों और कुछ अन्य जीवों को दिए जाने वाले फलों में इसी तकनीक का प्रयोग हो रहा है। इस समस्या से घबराने की बजाय जागरूक होने की जरूरत है।
तिलियार झील पर चलाया जांच अभियान
डॉ. अशोक खासा ने दूरबीन का प्रयोग कर शुक्रवार को चमगादड़ों की प्रजातियों की जांच की। इसमें पाया गया कि झील के आसपास एरिया में माइक्रो बैट हैं। लेकिन मेगा बैट के कहीं से आने की संभावना को देखते हुए अधिकारी ने कहा कि वह आगे भी इस बात का ध्यान रखेंगे। इसके लिए सारे स्टाफ को अलर्ट कर दिया गया है।