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देश के पहले एलिवेटेड रेलवे ट्रैक के निर्माण की राह में एक और रोड़ा ----
ट्रैक के दोनों ओर पेड़ों को काटने के आदेश के विरोध में एनजीटी में याचिका
- एनजीटी ने मामले की सुनवाई के बाद 17 मई की तारीख दी, याचिकाकर्ता से नोटिस जारी करने के लिए मांगे संबंधित कागजात
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
देश के पहले एलिवेटेड रेलवे ट्रैक के निर्माण की राह में एक और बाधा आ गई है। एलिवेटेड रेलवे ट्रैक के निर्माण के लिए करीब 500 पेड़ों को काटे जाने का मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) पहुंच गया है।
कुछ वक्त पहले ही पेड़ों की कटाई शुरू की गई है, लेकिन अगली सुनवाई पर इस पर रोक भी लग सकती है। एनजीटी की ओर से सभी पक्षों को नोटिस जारी करने के लिए याचिका के साथ ही संबंधित कागजात मांगे हैं। याचिकाकर्ता इन कागजातों को अगली सुनवाई में उपलब्ध कराएगा, जिसके बाद अगर पेड़ों की कटाई पर रोक लगी तो देश के पहले एलिवेटेड रेलवे ट्रैक के निर्माण पर भी ब्रेक लग सकता है।
एलिवेटेड रेलवे ट्रैक के औचित्य एवं जरूरत को लेकर पहले ही रोहतक कोर्ट में याचिका डाली जा चुकी है, जिसमें सरकार से दस्तावेज पेश करने के लिए कहा गया है। इस केस में कई सुनवाई हो चुकी हैं, लेकिन सरकार की ओर से दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, हर बार अगली तारीख ली गई। अब इस केस की अगली सुनवाई 16 मई है। इसके साथ ही जहां से एलिवेटेड रेलवे ट्रैक गुजरेगा, वहां स्थित चिन्योट कॉलोनी के लोग रास्ता बंद हो जाने को लेकर विरोध में उतर आए हैं। इतना ही नहीं विपक्षी पार्टियों भी एलिवेटेड रेलवे ट्रैक के विरोध में हैं और सरकार की इस योजना को शहर के लिए बीमारी करार दे रहें हैं। इसी कड़ी में पेड़ों की कटाई के विरोध में याचिका नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल में लगाई गई गुहार मुश्किल बढ़ा सकती है।
याचिकाकर्ता एडवोकेट करण सिंह ने बताया कि इस मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 17 मई है। एनजीटी की ओर से इस संबंध में कुछ कागजात मांगे गए हैं, जिसे इस तारीख पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिसके बाद सरकार को नोटिस जारी किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि चार किलोमीटर लंबे एलिवेटेड रेलवे ट्रैक के निर्माण की जगह पर करीब 500 पेड़ हैं। रेलवे लाइन के दोनों ओर इन पेड़ों की वजह से वायु और ध्वनि प्रदूषण से कालोनी वासियों का बचाव होता है। उन्होंने दलील दी है कि पेड़ों की कटाई पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन है। इससे लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ेगा।