फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सवा साल में तीन डीसी ने सरकार को भेजी रिपोर्ट, नहीं मिली लघु सचिवालय के लिए जगह

विज्ञापन
विज्ञापन
सवा साल में तीन डीसी ने सरकार को भेजी रिपोर्ट, नहीं मिली लघु सचिवालय के लिए जगह
विज्ञापन

चरखी दादरी।
जिला मुख्यालय पर तमाम विभागाध्यक्षों को एक छत के नीचे लाने की योजना को जिला प्रशासन सवा साल बाद भी अमलीजामा नहीं पहना पाया है। जिला बनने के बाद तीन उपायुक्त सरकार को लघु सचिवालय के लिए रिपोर्ट भेज चुके हैं, लेकिन अभी तक जगह फाइनल नहीं हुई है। इस संबंध में तीनों उपायुक्तों ने जिला मुख्यालय के बाहरी क्षेत्र में चार साइटों का निरीक्षण किया और सभी ने सीसीआई परिसर की जमीन को सचिवालय निर्माण के लिए उपयुक्त भी माना है। सरकार को भेजी गई रिपोर्ट में इस जमीन के फायदों का जिक्र भी किया गया है। फिलहाल जिला मुख्यालय पर सरकारी कार्यालय अलग-अलग बिल्डिंगों में चल रहे हैं जबकि कुछ दफ्तर किराए के भवनों में चलाए जा रहे हैं।
सवा साल बीतने के बाद भी चरखी दादरी जिला इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से जूझ रहा है। बड़ा सचिवालय बनने के बाद ही सही तरीके से जिले का आधारभूत ढांचा तैयार हो सकता है। इस समय करीब दो दर्जन सरकारी विभाग और भी शुरू करने की जरूरत बनी हुई है।जिला सचिवालय निर्माण का मसला अब अगले वित्त वर्ष तक टल गया है। जिले में नियुक्त किए गए सबसे पहले डीसी पंकज कुमार ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजी थी। इसके बाद जिला उपायुक्त का कार्यभार संभालने वाले विजय कुमार सिद्प्पा ने भी समसपुर गांव के समीप, सीसीआई फैक्ट्री की जमीन, महेंद्रगढ़ रोड वपर गांव घसौला के समीप साइट का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट सरकार को भेजी। उपायुक्त विजय कुमार सिद्प्पा ने भी सीसीआई फैक्ट्री की जमीन को सबसे उपायुक्त माना था। वर्तमान उपायुक्त अजय सिंह तोमर भी सीसीआई फैक्ट्री की जमीन के ही सचिवालय निर्माण के लिए उपयुक्त मान रहे हैं। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो सरकार केंद्र सरकार से इस जमीन के संबंध में बातचीत कर रही है।
विज्ञापन

18 सितंबर 2016 को मिला था जिले का दर्जा
गत 18 सितंबर 2016 की चरखी दादरी नई अनाज मंडी में हुई सीएम रैली में चरखी दादरी को जिलेे का दर्जा दिए जाने की घोषणा की गई थी। तत्पश्चात नवंबर 2016 में सरकार की ओर से नोटिफिकेशन जारी कर जिले को अंतिम रूप दिया गया था। जिला बनने के छह माह ही बाद ही सरकार ने प्रशासन से नए जिला सचिवालय के लिए शहर व आसपास के गांवों में जमीन की सर्वे के लिए कहा था। ताकि सचिवालय का निर्माण करवाया जा सके। सरकार के आदेशानुसार प्रशासनिक अधिकारियों ने शहर की चारों ओर की साइटों का निरीक्षण कर इसकी रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेज दी थी। करीब छह माह पहले जिला जेल व पुलिस लाइन के लिए भी शहर के चारों ओर की साइट का जायजा लिया गया था लेकिन यह भी सिरे नहीं चढ़ सका है। इसके लिए कमेटी का भी गठन किया गया था।
किराये के भवनों में चल रहे सरकारी कार्यालय
आरटीओ कार्यालय किराए के भवन में शुरू किया गया है। इसी प्रकार जो नए ब्लॉक बने हैं। वहां भी नई बिल्डिंग नहीं बनाई जा सकी है। पुराने भवन ही लेकर काम चलाया जा रहा है। शहर में वैसे ही कई विभाग किराए के भवनों में पहले से ही चले आ रहे हैं। खासकर पटवार भवन न होने से पटवारी आवासीय कालोनियों में किराए के कमरों में बैठकर लोगों का काम निपटा रहे हैं। कई कार्यालय दूसरे कार्यालयों से अटैच किए जा रहे हैं ताकि जैसे-तैसे काम चलाया जा सके। इस समय करीब दर्जन जिला स्तरीय सरकारी कार्यालय खुलने अभी बाकी हैं जिनमें उपभोक्ता कार्यालय, वन विभाग, सांख्यिकी विभाग, मौसम विभाग प्रमुख रूप से शामिल हैं।
विज्ञापन

वर्जन::
इस समय जिले को बड़े स्तर के सचिवालय की जरूरत बनी हुई है ताकि सभी विभागों के कार्यालय सुचारु रूप से स्थापित हो सकें। जनता को भी अपने सरकारी कामकाज के लिए शहर के इधर-उधर भागों मेें नहीं भटकना पड़े। कम से कम 50 एकड़ जमीन पर सचिवालय बनाए जाने की प्लानिंग जरूरी है। सरकार की ओर से अब प्रपोजल का कोई जवाब नहीं मिला है। जैसे नए निर्देश आएंगे अगली प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
राजकुमार अरोड़ा, जिला राजस्व अधिकारी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें