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कैसे पढ़ेंगे होनहार, जब कॉलेजों में शिक्षक ही नहीं

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अमर उजाला ब्यूरो
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रोहतक। उच्च शिक्षा का ढांचा सुधारने के लिए सरकार भले ही कितने भी दम भरती हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। अकेले सांपला के सर छोटूराम कन्या कॉलेज में नहीं, बल्कि जिले के सभी सरकार कॉलेज स्थायी शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। हालात यह है कि कॉलेजों में 50 फीसदी भी स्थायी शिक्षक नहीं है।
तीन दिन पहले सांपला के सर छोटूराम कन्या कॉलेज की छात्राओं ने हाइवे पर जाम लगा दिया था। छात्राओं की मांग बस इतनी थी कि उनके कॉलेज में शिक्षकों की कमी है, जिसे पूरा किया जाए। हालांकि पुलिस-प्रशासन ने उस समय तो जाम खुलवा दिया था, लेकिन बाद में छात्राओं पर मुकदमा भी दर्ज कर दिया गया। कॉलेजों में शिक्षकों की कमी पर नजर डाली जाए तो जिले के सभी कॉलेजों में शिक्षकों की संख्या पूरी नहीं है। पंडित नेकीराम शर्मा कॉलेज में 154 पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष कॉलेज में मात्र 70 ही स्थायी शिक्षक हैं। खाली पद रहने की सूरत में करीब 120 शिक्षक एक्सटेंशन पर रखे जाते हैं। यानी कि कॉलेज में 50 फीसदी शिक्षकों की कमी है। कुछ ऐसा ही हाल राजकीय महिला महाविद्यालय का है। यहां पर भी 134 पद स्वीकृत हैं, जबकि फिलहाल में मात्र 55 स्थायी शिक्षक ही कार्यरत हैं। यह स्थिति तो केवल शहर के अंदर चल रहे दो कॉलेजों की है। बाकी के हालात इनसे भी खराब हैं।
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एक्सटेंशन के सहारे कराया जाता है कोर्स पूरा
कॉलेजों में स्थायी शिक्षकों की कमी होने के कारण हर वर्ष एक्सटेंशन पर शिक्षक रखे जाते हैं। पहले इन्हें 250 रुपये प्रति क्लास के हिसाब से दिया जाता था। हाल में सरकार ने आदेश जारी किया है कि प्रति क्लास की बजाय इन्हें मासिक तनख्वाह दी जाएगी। हालांकि कॉलेजों में एक्सटेंशन तो रख लिए जाते हैं, लेकिन अक्सर यह कॉलेज प्रबंधन के मानकों पर खरे नहीं उतर पाते।

वर्जन
कॉलेज में शिक्षकों की कमी है। फिर भी एक्सटेंशन पर शिक्षक रखकर पढ़ाई को सुचारू रखा जाता है। विद्यार्थियों के सामने कोई समस्या नहीं आने दी जाती।
- डॉ. वेदप्रकाश श्योराण, प्राचार्य पंडित नेकीराम शर्मा कॉलेज
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