रोहतक। निजी स्कूल नियम 134ए को लागू करने में शिक्षा विभाग का सहयोग नहीं कर रहे हैं। वहीं, विभाग इस मामले में लाचार बना हुआ है। हालात ये हैं कि नियम के तहत दाखिला पाने के इच्छुक बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अब जो अभ्यर्थी अपने स्कूलों का चयन बदलना चाहते थे या कुछ नए स्कूलों को अपनी सूची में डालना चाहते हैं। ऐसे अभ्यर्थियों को विभाग ने 29 अप्रैल तक का समय दिया है। इसके बाद ही रिक्त सीटों व दाखिले की स्थिति स्पष्ट होगी। इसके अलावा उम्मीद की जा रही है कि 1 मई को स्कूल अलॉटमेंट किए जा सकते हैं।
नए शैक्षणिक सत्र का पहला महीना पूरा होने में महज एक दिन ही शेष रहा है। इसके बावजूद अब तक नियम 134ए के तहत दाखिले पाने वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई शुरू नहीं हो पा रही है। क्योंकि नियम के तहत लिखित परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद से स्कूल अलॉट नहीं हो पाए हैं। स्कूल अलॉटमेंट को लेकर मुख्यालय से अभिभावकों के मोबाइल पर एसएमएस भेजे जाने थे। अब तक यह प्रक्रिया अटकी हुई है। अब सभी की नजरें सोमवार पर टिकी हैं। शनिवार व रविवार के अवकाश के बाद शिक्षा विभाग का कार्यालय खुलने पर अभिभावक अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।
स्कूलों ने दर्शाई शून्य सीटें बनी बड़ी समस्या
निजी स्कूल शुरू से ही नियम 134ए के खिलाफ नजर आ रहे हैं। इन स्कूलों द्वारा शिक्षा विभाग की ओर से बार-बार रिक्त सीटों का ब्योरा देने के निर्देशों तक की परवाह नहीं की जा रही है। यही वजह है कि अब तक रिक्त सीटों की स्थिति ही स्पष्ट नहीं है। यही दाखिले में सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। स्कूलों में सीटों की स्थिति स्पष्ट होने पर विभाग विद्यार्थियों को स्कूल अलॉट कर सकता है। इसके बाद ही बच्चों को स्कूल में दाखिला मिल पाएगा।
पहले जारी की थी आधी-अधूरी जानकारी
निजी स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया की शुरुआत में रिक्त सीटों का ब्योरा दिया था। यह जानकारी आधी-अधूरी थी। इसमें ज्यादातर सीटें शून्य दर्शाई गई। जबकि किसी कक्षा में एक तो किसी में दो सीटें दर्शाई गई। कहीं सीटें दिखाई दे रही हैं तो कहीं रिक्त सीटों की संख्या ऑफलाइन जारी हुई सूची में दिखाई गई रिक्त सीटों की संख्या से भी कम हो गई है। इससे अभिभावकों व अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। अभिभावक यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि वे किस सूची को सही मानें।