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पीजीआई रोहतक के सर्जरी विभाग प्रमुख
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को तत्काल राहत से हाईकोर्ट का इनकार

प्रो. राजेंद्र कड़वासरा ने निलंबन के आदेश को हाईकोर्ट में दी थी चुनौती
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने रिपोर्ट में की थी प्रोफेसर के खिलाफ टिप्पणी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पीजीआई रोहतक के सर्जरी विभाग के प्रमुख राजेंद्र कड़वासरा की निलंबन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने फिलहाल उन्हें किसी तत्काल राहत से इनकार कर दिया है। हालांकि, हाईकोर्ट ने पीजीआई रोहतक को दस दिन में याचिका पर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
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याचिका दाखिल करते हुए कड़वासरा ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम ने दौरे के बाद रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें याची के खिलाफ टिप्पणियां करते हुए उन्हें इलाज के बदले पैसे लेने का आरोपी बताया गया था। उसी के आधार पर वीसी ने उन्हें निलंबित कर दिया। याची ने कहा कि उन्हें नियुक्त करने वाली अथॉरिटी एग्जीक्यूटिव काउंसिल होती है और ऐसे में निलंबन के आदेश भी वही जारी कर सकती है, वीसी नहीं। साथ ही यह भी कहा गया कि उन्हें चार्जशीट नहीं दी गई है। इस पर यूनिवर्सिटी की ओर से कैविएट दाखिल करने वाले एडवोकेट तीव्र शर्मा ने हाईकोर्ट को बताया कि ईसी ने वीसी के निर्णय को मंजूरी दे दी है और ऐसे में याची की यह दलील कहीं नहीं टिकती। वहीं चार्जशीट तैयार कर ली गई है। हाईकोर्ट से याची ने निलंबन आदेश खारिज करने की मांग की तो शर्मा ने कहा कि निलंबन आदेश कोई सजा नहीं है बल्कि एक प्रक्रिया है और याची इसमें सहयोग करे ताकि जांच पूरी हो सके। यदि वह दोषी नहीं होंगे तो उनके खिलाफ कुछ नहीं होगा। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद करवासरा को कोई राहत न देते हुए सुनवाई 10 दिन के लिए टाल दी और अगली सुनवाई पर पीजीआई रोहतक को जवाब दाखिल करने के आदेश दिए है।
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