यातायात प्रभारी ने बर्खास्त सिपाही के बारे में डीएसपी को भेजी रिपोर्ट
-वर्ष 2014 में हिसार में बवाल के दौरान हेड कॉन्स्टेबल को कर दिया गया था बर्खास्त
-हेड कॉन्स्टेबल को एक ही वक्त पर रोहतक व हिसार में मौजूद दिखाया गया था
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। वर्ष 2014 में रामपाल के हिसार स्थित आश्रम में हुए बवाल में बर्खास्त किए गए कॉन्स्टेबल विजेंद्र के संबंध में यातायात प्रभारी ने डीएसपी को भी रिपोर्ट भेजी है। इसमें विजेंद्र की घटना वाले दिन रोहतक में ड्यूटी होना दर्शाया गया है। हालांकि, विभागीय अधिकारियों ने दावा किया है कि अभी मामले की जांच चल रही है।
रोहतक के पोलंकी गांव निवासी विजेंद्र सिंह हरियाणा पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल थे। वर्ष 2014 में हिसार में संत रामपाल के आश्रम में बवाल के दौरान हेड कॉन्स्टेबल विजेंद्र को भी बवाल का आरोपी दर्शाते हुए बर्खास्त कर दिया गया था। हेड कॉन्स्टेबल कोे जेल भेज दिया गया था। जमानत पर छूटने के बाद बर्खास्त हेड कॉन्स्टेबल ने अपनी नियुक्ति के संबंध में पुलिस से आरटीआई के तहत सूचना मांगी। आरटीआई के तहत रोहतक पुलिस ने बताया कि विजेंद्र 18 नवंबर 2014 को रोहतक पुलिस की गाड़ी पर चालक के रूप में तैनात था। बर्खास्त हेड कॉन्स्टेबल ने सीएम से लेकर पीएम और राष्ट्रपति को बहाली की मांग को लेकर पत्र भेजा था। अधिकारियों के निर्देश पर मामले की जांच डीएसपी रोहतक को सौंप दी गई। डीएसपी रोहतक ने यातायात प्रभारी से इस संबंध में जानकारी मांगी थी। बर्खास्त हेड कॉन्स्टेबल विजेंद्र ने बताया कि यातायात प्रभारी ने डीएसपी को रिपोर्ट भेजी है। जिस में दर्शाया है कि 18 नवंबर को एएसआई गुरुचरण व अन्य के साथ विजेंद्र की पुलिस की गाड़ी पर रोहतक में ही ड्यूटी थी। अब सवाल ये उठता है कि जब 18 नवंबर को विजेंद्र रोहतक में था, फिर हिसार में बवाल का आरोपी कैसे बना दिया गया। विजेंद्र को इस मामले में जल्द ही क्लीन चिट मिलने की उम्मीद है। डीजीपी को भी पत्र लिखा है। इस संबंध में डीएसपी डॉ. रविंदर से बात करने का प्रयास किया मगर बात नहीं हो सकी।
डीजीपी वर्जन
मामला उनके संज्ञान में आया था। रोहतक जिले की पुलिस को जांच सौंपी गई है। मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।
-बीएस संधू, डीजीपी