फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रज्ञा साहित्यिक मंच

विज्ञापन
विज्ञापन
फोटो : वीएस 1
विज्ञापन


दीजे अब ऐसी सजा कांप उठे हैवान, पैदा होने से डरें बर्बर और शैतान..
- काव्य गोष्ठी में कवियों ने अपनी रचनाओं से नारी पर हो रहे शोषण के विरुद्ध बुलंद की आवाज
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। प्रज्ञा साहित्यिक मंच की ओर से मॉडल टाउन में सोमवार को काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। यहां, दीजे अब ऐसी सजा कांप उठे हैवान, पैदा होने से डरें बर्बर और शैतान.. सरीखी कविताओं के जरिए नारी पर हो रहे शोषण के विरुद्ध आवाज बुलंद की गई। सभी ने एक आवाज में नारी उत्पीड़न को लेकर समाज में सख्त कदम उठाने पर जोर दिया। कार्यक्रम में कवि नीरज रत्न बंसल की पुस्तक जीवन माला का लोकार्पण किया गया।
मुख्य अतिथि भारत विकास परिषद के जिला अध्यक्ष अशोक गुप्ता ने कवियों के प्रयास को सराहा। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार भारत भूषण सांघीवाल ने की। गीतकार वीरेंद्र मधुर, एमडीयू की प्रोफेसर डॉ. अंजना गर्ग व साहित्यकार आशा खत्री विशिष्ट अतिथि रहीं।
विज्ञापन

गीतकार वीरेंद्र मधुर ने कविता, सभी के पास समय का अभाव सा देखा, नहीं किसी का किसी से लगाव देखा, के जरिए वर्तमान स्थित को चित्रित किया। साहित्यकार आशा खत्री ने, दीजे अब ऐसी सजा कांप उठे हैवान, पैदा होने से डरें बर्बर और शैतान के जरिए नारी उत्पीड़न के विरुद्ध आवाज उठाई। कवि पवन मित्तल ने, जो बिक जाए वो निष्ठा का भ्रम है, लोकतंत्र में भला कौन सी शर्म है, के जरिए राजनीति पर व्यंग्य कसा। पंडित रूप किशन ने हरियाणवी कविता, कितना लंबा कठिन सफर हो चलते रहना चाहिए रै, चलणे तै ही सफर कटै सै आगे बढ़ना चाहिए रै, कवि डॉ. कपिल कौशिक ने, जरूरी नहीं सहर का वक्त उजाले भी साथ लाये, नाकामी के दौर में हिम्मत हार जाना जिंदगी नहीं, से लोगों को सकारात्मक भाव रखने के लिए प्रेरित किया।
विज्ञापन

विजय विभोर ने, उस लंबे जीवन का क्या करूं ,जो अपने काम स्वयं कर ना सकूं, नीरज बंसल ने मां की महिमा का गुणगान करते हुए, कितनी गजब शख्सियत है मां, लाख गुस्से में हो रोटियां मीठी ही बनाती है, पवन गहलोत ने, क्या कारण है तेरी आंखों में नीर का, तू खुद ही मालिक है तेरी तकदीर का, डॉ चंद्रदत्त ने, अंधेरे जीवन में आफताब है पुस्तक, अशिक्षा के कांटो में गुलाब है पुस्तक, स्नेह बंसल ने, कहते हैं सच्चा जन अंत में जीत ही जाए, प्रोफेसर श्याम लाल कौशल ने, सदियों से शोषण उत्पीड़न सहते सहते मैं तंग आ गई हूं, से नारी की व्यथा का चित्रण किया। रामकिशन राठी, डॉ. गोपाल कृष्ण ने भी काव्य पाठ किया। इस मौके पर देवेंद्र चौहान, नरेश जैन, सुनील जैन, साक्षी बंसल मौजूद रहे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें