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शहर में होटल कारोबारियों से यूजर चार्ज लेने का मामला

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फ्लैग : शहर के होटल व बैंक्वेट हॉल मालिकों की आपात मीटिंग में बोले कारोबारी
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हेडिंग : अंडर प्रोटेस्ट जमा कराएंगे यूजर चार्ज, निगम को लिखकर देंगे हम संतुष्ट नहीं

: निगम प्रशासन से नई पॉलिसी 2016 के तहत श्रेणी बनाकर यूजर चार्ज लगाने की मांग
: बोले, अगर संतोष जनक सुविधा नहीं मिली तो जाएंगे अदालत में
: 30 जून तक ब्याज माफी का मौका हाथ से निकाल जाने की भी सता रही कारोबारियों को चिंता

अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। निगम द्वारा लगाए गए 4 हजार रुपये प्रति माह यूजर चार्ज के विरोध में शनिवार को शहर के होटल, बैंक्वेट हाल, मैरिज पैलेस व रेस्टोरेंट मालिकों की आपात मीटिंग हुई, जिसमें निगम द्वारा थोपे गए यूजर चार्ज पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की गई। साथ ही फैसला लिया कि अगर 30 जून तक यूजर चार्ज जमा नहीं कराएंगे तो 2011 से 2018 तक के ब्याज को माफ कराने का मौका निकल जाएगा। इससे कई कारोबारियों को नुकसान हो सकता है। ऐसे में प्रॉपर्टी टैक्स के साथ यूजर चार्ज जमा कराने समय लिखकर दें कि वे यह राशि अंडर प्रोटेस्ट जमा करा रहे हैं। आगे इसमें सुधार नहीं किया गया तो वे अदालत में जा सकते हैं।

शहर के अंदर 200 से ज्यादा छोटे व बड़े होटल, बैंक्वेट हाल, रेस्टोरेंट व मैरिज पैलेस हैं। निगम की तरफ एक अप्रैल 2018 से शहर के अंदर डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के नाम पर यूजर चार्ज लगाया है। यह चार्ज हर उस प्रॉपर्टी पर लगाया गया है, जहां से रिहायशी या वाणिज्यिक टैक्स निगम ले रहा है। 2011 की पॉलिसी के तहत निगम ने हाल में हर होटल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हाल मालिक से 4 हजार रुपये प्रति माह के हिसाब से प्रॉपर्टी टैक्स बिल के साथ 48 हजार रुपये यूजर चार्ज जोड़ कर भेजा है। कारोबारियों का तर्क है कि यह तो एक तरह से ज्यादती है। एक तो अब तक उन्होंने सर्विस का प्रयोग नहीं किया। ऊपर से बिना किसी सर्वे या तथ्यों के यूजर चार्ज थोप दिया गया।
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आखिर कितने टैक्स जमा कराएं कारोबारी, शहर में नहीं एक भी थ्री स्टार होटल
मामले को लेकर दोपहर करीब 12 बजे होटल व बैंक्वेट हाल एसोसिएशन की मीटिंग एसवाईएस होटल में शुरू हुई, जिसकी अध्यक्षता एसोसिएशन के प्रधान एवं रिवोली होटल के मालिक अशोक भांवरी ने की। जबकि महासचिव एवं आशियाना बैंक्वेट हाल के मालिक राकेश गुगनानी ने मंच का संचालन किया। वहीं, खुशबू गार्डन के मालिक एवं एसोसिएशन के उप प्रधान देवेंद्र गोयल और नटराज होटल के मालिक एवं उप प्रधान अवनीस सैनी भी मंच पर मौजूद रहे। मीटिंग में पहुंचे होटल मालिकों व बैंक्वेट हाल मालिकों ने 4 हजार रुपये प्रति माह यूजर चार्ज पर विरोध जताया। कहा कि निगम पहले से प्रॉपर्टी टैक्स, फायर टैक्स, ट्रेड लाइसेंस फीस ले रहा है। अब एक और यूजर चार्ज के नाम पर टैक्स थोंप दिया गया। इस पर महासचिव राकेश गुगनानी ने मीटिंग में सरकार की पॉलिसी को विस्तार से बताया। साफ किया कि 4 हजार रुपये यूजर चार्ज 2011 की पॉलिसी के तहत लागू किया है। पॉलिसी में लिखा है कि थ्री स्टार होटल पर 4 हजार रुपये यूजर चार्ज लगेगा। कारोबारियों ने कहा कि शहर में एक भी होटल थ्री स्टार रेंकिंग का नहीं है। फिर कैसे चार हजार यूजर चार्ज थोंप दिया गया। इसे न्याय संगत बनाया जाए।

30 जून तक की छूट बन रही गले की फांस
आखिर में मीटिंग में तय हुआ कि 30 जून तक निगम की ब्याज माफी की योजना है। कई कारोबारियों का लाखों रुपये ब्याज है, जो यूजर चार्ज से कई गुणा है। अगर यूजर चार्ज न भरने का फैसला लेते हैं तो कई साथियों को नुकसान हो जाएगा। ऐसे में अंडर प्रोटेस्ट शब्द लिखकर प्रॉपर्टी टैक्स के साथ यूजर चार्ज जमा करवा दें। प्रधान अशोक भांवरी ने कहा कि वे और महाराजा होटल के मालिक अशोक बल्हारा टैक्स व यूजर चार्ज जमा करवाकर ब्याज माफ करवा चुके हैं।

ये बोले कारोबारी...
निगम द्वारा लगाए गए 4 हजार रुपये प्रति माह के यूजर चार्ज से वे संतुष्ट नहीं है। ब्याज माफी की छूट को देखते हुए होटल व बैंक्वेट हाल मालिक अंडर प्रोटेस्ट यूजर चार्ज जमा कराएंगे। निगम से मांग है कि बाद में नियमों के तहत श्रेणी में बदलाव कर चार्ज लगाए जाएं। पहले जमा कराए गए चार्ज को समायोजित करवाया जाए।
राकेश गुगनानी, महासचिव होटल एवं बैंक्वेट हॉल एसोसिएशन
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मीटिंग के अंदर सभी कारोबारियों ने निगम द्वार थोपे गए यूजर चार्ज का विरोध किया। साथ ही फैसला किया कि ब्याज माफी की छूट को देखते हुए एक बार यूजर चार्ज जमा करवा दिया जाए। इसके बाद भी अगर निगम ने पॉलिसी में सुधार नहीं किया तो आगे कई विकल्प खुले हुए हैं।
अशोक भांबरी, प्रधान होटल एवं बैंक्वेट हॉल एसोसिएशन
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चार हजार यूजर चार्ज को लेकर कारोबारियों ने आपत्ति व्यक्त की है। फैसला हुआ कि अंडर प्रोटेस्ट चार्ज जमा करवा दिया जाए। वे सोमवार को चार्ज जमा करवा रहे हैं। दूसरा, आगे जैसे एसोसिएशन फैसला लेगी, उसी के तहत कदम उठाया जाएगा।
अशोक धींगड़ा, मालिक लिवेनियर होटल, शीला बाईपास
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लगातार होटल कारोबारियों पर टैक्स थोपे जा रहे हैं। शहर में ऐसे सैकड़ों होटल व छोटे ढाबे हैं, जो न तो ट्रेड लाइसेंस लेते और न ही किसी तरह का टैक्स जमा करवाते। जो होटल मालिक नियमों के तहत समय पर टैक्स जमा करवाते हैं, उन्हें ही दबाया जा रहा है।
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सुमित कुमार, मालिक सन साइन होटल, हुडा कांप्लैक्स
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यह तो कारोबारियों के साथ ज्यादती हैं। निगम 12 माह का 48 हजार रुपये यूजर चार्ज मांग रहा है, जबकि साल 2018 के 3 माह अप्रैल, मई व जून तो जा चुके हैं। जब सर्विस ही नहीं ली तो चार्ज किस बात का दें।
अशोक कुमार, अजंता रायल गार्डन, भिवानी
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