देश को दिए नामी पहलवान, आज भी मिलता है सम्मान
देश व प्रदेश में कुश्ती को नए आयाम देने वाले सुंडाना गांव के कैप्टन चांदरूप हमारे बीच नहीं हैं। फौज के इस जवान ने कुश्ती में अगल पहचान बनाई। इसीलिए वर्ष 2010 को इन्हें द्रोणाचार्य अवार्ड से नवाजा गया। पहलवानी के गुरु से कुश्ती के दांवपेंच सीखने वाले शिष्य अब भी उनका पूरा सम्मान करते हैं। उन्होंने पांच अर्जुन अवार्डी समेत देश को कई राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय पहलवान दिए। इन नामों की सूची काफी लंबी है। मुख्य रूप से भारत केसरी नेत्रपाल, अर्जुन अवार्डी रोहताश दहिया, ओमबीर सिंह, अशोक गर्ग, रमेश गुलिया, धर्मेंद्र दलाल, धर्मबीर, कृष्ण पहलवान, बलराज, सोनू, जेगेंद्र, अशोक, संजय, प्रवीण, वीरदेव समेत अनेक नाम शामिल हैं। अंतर्राष्ट्रीय कुश्ती कोच अशोक ने बताया कि उनके चाचा कैप्टन चांदरूप के नाम को कुश्ती के लिए पूरा मान सम्मान मिलता है। यह हमारे लिए भी गर्व की बात है।
हॉकी दी नई पहचान, मिला अर्जुन अवार्ड
रोहतक शहर के सैनीपुरा निवासी नरेंद्र सैनी हॉकी कोच हैं। हॉकी को नई पहचान देने वाले इस कोच को वर्ष 2013 में अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया। इन्होंने 45 महिला हॉकी खिलाड़ी देश को दी। ये इंडियन में भी खेली। इसके अलावा 11 पुरुष हॉकी खिलाड़ी भी तैयार किए। इन्होंने ढाका में हुए एशिया कप में गोल्ड भी जीता। मलेशिया में इनके पांच खिलाड़ी हॉकी टीम में खेल चुके हैं। इनके शिष्याें की कतार भी काफी लंबी है। उनकी इस उपलब्धि के चलते उन्हें स्पोर्ट्स एथॉरिटी ऑफ इंडिया ने 1995 में बेस्ट कोच अवार्ड से सम्मानित किया। रोट्री क्लब ने वर्ष 2003 में व इसी साल झारखंड के सीएम अर्जुन मुंडा ने खेल सम्मान दिया। वर्ष 1003 में लालू प्रसाद यादव ने भी सम्मानित किया। अब भी हॉकी को नए आयाम देने का प्रयास जारी है।