सीसीआईएम की ढिलाई पड़ रही विद्यार्थियों पर भारी
फोटो सहित
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले प्रदेश के सभी आयुर्वेद कॉलेज में बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसन एंड सर्जरी कोर्स (बीएएमएस) तय समय से छह माह देरी से चल रहा है। यह देरी विद्यार्थियों के साथ संस्थान के लिए भी सिरदर्द बनती जा रही है। सीसीआईएम की ढिलाई के चलते कई विद्यार्थियों का कैरियर भी एक साल के दांव पर लगा हुआ है।
प्रदेश में आठ सरकारी और निजी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज हैं, ये सभी पीजीआईएमएस रोहतक के अंतर्गत बीएएमएस की डिग्री करवाते हैं। इनकी मान्यता सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसन (सीसीआईएम) से मिलती है। वर्ष 2016 सत्र में सीसीआईएम के निर्देशानुसार छह माह देरी तक विद्यार्थियों का प्रवेश हुआ। इसके चलते अब पीजीआई के लिए महज छह माह में इसके लिए परीक्षा आयोजित करना मुश्किल भरा हो गया है। वहीं सूत्रों की मानें तो सीसीआईएम से मिलने वाली छूट इस कोर्स को लेट करती जा रही है। वहीं एक्सपर्ट बताते हैं कि एमसीआई और डीसीआई की तरह सीसीआईएम जब तक सख्ती नहीं बरतेगा, तब तक यह समस्या बनी रहेगी। प्रदेश भर के आठ कॉलेजों में फिलहाल 500 से 600 बीएएमएस के विद्यार्थी हैं। इन सभी का जब प्रवेश देरी से होगा तो परीक्षा देरी से होगी तो स्वाभाविक है कि परिणाम भी देरी से आएगा। इसके चलते इन विद्यार्थियों का देश के अन्य कॉलेजों में अगले कोर्स के लिए दाखिला लेना मुश्किल भरा हो जाएगा।
सरकार के निर्देश पर होता है काम
सीसीआईएम से जो आदेश प्राप्त होते हैं, उस पर ही सरकार अमल करती है और नोटिफिकेशन जारी करती है। बीएएमएस कोर्स के लिए सीसीआईएम पंजीकरण करती है। अकसर निजी कॉलेज बच्चों को आगे करके कोर्ट से प्रवेश की तिथि सीसीआईएम से बढ़वा लेते हैं। इसके चलते परीक्षा लेट हो जाती है। इसका प्रवेश भी एमबीबीएस कोर्स के साथ होता है, लेकिन अब यह कोर्स लेट चल रहा है। हमें जो सरकार से निर्देश मिलते हैं, उसी पर कार्य होता है। इसके अलावा हम कुछ नहीं कर सकते।
- डॉ. संजय कुमार, परीक्षा नियंत्रक, पीजीआईएमएस