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बूस्टिंग स्टेशन से सप्लाई होने वाले पानी के सैंपल फेल

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बूस्टिंग स्टेशन से सप्लाई होने वाले पानी के सैंपल फेल
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चरखी दादरी।
बूस्टिंग स्टेशनों से शहर में सप्लाई किया जा रहा पानी गुणवत्ता के अनुरुप नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने इन सभी बूस्टिंग स्टेशनों में स्टोर पानी के सैंपल लिए हैं। ये सभी सैंपल नेगेटिव आए हैं और पानी में क्लोरीन की मात्रा न के बराबर मिली है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने क्लोरीन की कमी के चलते डायरिया, हैजा, उल्टी-दस्त की शिकायत बढ़ने की आशंका जताई है। अमर उजाला ने भी 30 जून के अंक में बूस्टिंग स्टेशनों की सफाई न होने संबंधी खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। वहीं, शहरवासियों ने भी जन स्वास्थ्य विभाग से चूक को सुधारकर स्वच्छ व नियमित पेयजल आपूर्ति करने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार शहर में आठ बूस्टिंग स्टेशन के जरिए पूरे शहर में पेयजल की आपूर्ति की जाती है। ये बूस्टिंग स्टेशन एरिया वाइज शहर के अलग-अलग भागों में बने हैं। हीरा चौक बूस्टिंग, सरगम बूस्टिंग, रोजगार्डन और बूस्टिंग और दशनामी अखाड़ा के पास बना बूस्टिंग सबसे पुराना हैं। बाकी बूस्टिंग नई आबादी के अनुरूप बनते गए। इन बूस्टिंग स्टेशनों के जरिए की जाने वाली आपूर्ति से रोजाना करीब 75 हजार लोग इस पानी का विभिन्न रूपों में इस्तेमाल करते हैं। इन बूस्टिंग स्टेशनों में रोजाना 75 लाख लीटर पानी की सप्लाई की जाती है और बाद में कालोनियों में पानी की आपूर्ति की जाती है। रात के समय इन बूस्टिंग स्टेशनों मेें मेन जलघर से पानी डाला जाता है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बुधवार को शहर के दो बूस्टिंग स्टेशनों और वीरवार को छह बूस्टिंग स्टेशनों से पानी के सैंपल लिए। इन सैंपलों की जांच में क्लोरीन की मात्रा शून्य मिली। स्वास्थ्य विभाग इस पानी के सेवन को खतरे से खाली नहीं मान रहा। इससे पहले शहरवासी भी दूषित पेयजल सप्लाई पर जाम लगाने के साथ नारेबाजी कर अपना रोष जता चुके हैं लेकिन विभाग ने अब तक समस्याओं के समाधान की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। बूस्टिंग स्टेशनों से लिए गए सैंपलों की जांच ओटी टेस्ट के जरिए की गई।
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वर्किंग में नहीं क्लोरीन गैस सिलेंडर
स्वास्थ्य विभाग टीम में निरीक्षक जगदीश, इंद्रजीत, हरीश, संजय व तेजबीर सिंह ने शहर के रोजगार्डन, घिकाड़ा रोड, दिल्ली बाइपास, हीरा चौक,दशनामी अखाड़ा, चंपापुरी, स्टेडियम रोड, सब्जी मंडी सहित सभी बूस्टिंग स्टेशनों की जांच की। इन बूस्टिंग स्टेशनों में क्लोरीन गैस के सिलेंडर जरूर लगे हैं लेकिन जांच टीम को यह भी वर्किंग में नहीं मिले। निरीक्षक जगदीश का कहना है कि अगर सिलेंडर वर्किंग में नहीं हो तो पानी में ब्लीचिंग पाउडर का सीमित अनुपात में मिश्रण करना जरूरी होता है ताकि पानी में क्लोरीन की मात्रा संतुलित बनी रहे। क्लोरीन की मात्रा पानी में नहीं होने से शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ता है। इससे डायरिया, हैजा, उल्टी व दस्ती की शिकायत हो जाती है।
जनस्वास्थ्य विभाग ट्यूबवेल का पानी मिलाकर करता है आपूर्ति
जनस्वास्थ्य विभाग लंबे समय से शहर में जलघर के पानी में ट्यूबवेल का पानी मिलाकर आपूर्ति कर रहा है। विभाग ने जलघर परिसर में ट्यूबवेल बोरिंग कर रखे हैं। जब भी नहरी पानी की कमी होती है तो इन ट्यूबवेल का पानी मिलाया जाता है। इस समय भी ट्यूबवेल का पानी मिलाकर आपूर्ति हो रही है। विभाग ने चंपापुरी व रामनगर जलघरों में करीब एक दर्जन ट्यूबवेल बोरिंग कर रखे हैं। लंबे समय तक ट्यूबवेल से जल दोहन पर इसके पानी की गुणवत्ता में कमी आ जाती है। वैसे भी इन बूस्टिंग स्टेशनों की नियमित रूप से सफाई नहीं हो रही है। बूस्टिंग स्टेशनों में बरसाती पानी का भी भराव हो जाता है। पेड़ों के पत्ते, मिटटी व विभिन्न प्रकार के जीव मृत अवस्था में भी गिर जाते हैं। कई बार ढक्कन भी खुले पड़े रहते हैं।
वर्जन
हमने शहर के सभी बूस्टिंग स्टेशनों के सैंपल लिए थे। सभी सैंपल फेल आए हैं। यहां स्टोर पानी में क्लोरीन की मात्रा न के बराबर है जोकि स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। हमने रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दी है।
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जगदीश कुमार, निरीक्षक, स्वास्थ्य विभाग
वर्जन:
हम पर्याप्त में क्लोरीन डालकर ही पेयजल सप्लाई करते है। अंतिम प्वाइंट तक पहुंचते-पहुंचते क्लोरीन की मात्रा कम हो जाती है। स्वास्थ्य विभाग की टीम को हमें साथ लेकर जांच करनी चाहिए थी ताकि हमें भी कमियों का पता लगता।
बिजेंद्र हुड्डा, एक्सईएन जन स्वास्थ्य विभाग
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