693 मेगावाट बिजली सरेंडर किया जाना प्रदेश के हित में नहीं है। हम हिमाचल व उत्तराखंड से गर्मियों में बिजली लेते थे और सर्दियों में देते थे। इससे हम सभी का काम चलता था। यदि सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेती तो पांच जनवरी को झाड़ली पावर प्लांट पर धरना दिया जाएगा।
यह कहना है पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का। हुड्डा शुक्रवार को डी-पार्क स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बात कर रहे थे। एफआईआर दर्ज होने के मामले में उन्होंने कहा कि भाजपा हजारों केस बना ले और कितना झूठ बोल ले, लेकिन वे नहीं दबेंगे और न ही सच से पीछे हटूंगा।
कहा, धान घोटाला और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच सरकार सीबीआई व हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज से क्यों नहीं कराती।
हुड्डा ने कहा कि सरकार कह रही है कि प्रदेश में बिजली सरप्लस है, लेकिन गांवों में बिजली नहीं है। रोजाना चार बार बिजली कट लग रहे हैं। किसानों के ट्यूबवेल कनेक्शन पास नहीं हो रहे हैं। भाजपा को इतिहास की जानकारी नहीं है, यह मुद्दा चुनाव का अहम मुद्दा होता है। सरकार इस पर बनती व पलटती हैं।
बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए चार प्लांट लगाए गए थे। कुछ फैसले जनहित को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं, हर चीज में मुनाफा नहीं देखा जाता। सरकार दादरी गैस प्लांट को भी ऐसे ही सरेंडर करने जा रही है।