रोहतक। जिले में दूध व दूध से बनी खाद्य सामग्री की गुणवत्ता सवालों के घेरे में है। एफडीए (फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) की ओर से पिछले पांच माह में लिए गए सैंपल की रिपोर्ट भी इसी ओर इशारा करती है। पिछले पांच माह में विभाग 62 सैंपल भरे। इनमें से 27 की रिपोर्ट सब स्टैंडर्ड (कम गुणवत्ता) पाई गई। सबसे अधिक पनीर सब स्टैंडर्ड पाया गया। दूध के 12 में एक सैंपल सब स्टैंडर्ड रहा। दो सैंपल की रिपोर्ट आना शेष है।
जिले में दूध व दूध से बनने वाली खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर एफडीए यानी खाद्य एवं औषधि प्रशासक विभाग नजर रखता है। जनता के बेहतर स्वास्थ्य के लिए विभाग समय-समय पर खाद्य सामग्री के सैंपल लेता है। इसमें दूध व दूध बनने वाले उत्पाद भी शामिल हैं।
इस साल जनवरी से अब तक विभाग ने 62 सैंपल भरे। इनमें से 50 सैंपल पनीर व 12 दूध के सैंपल हैं। पनीर के 50 प्रतिशत सैंपल जांच में सब स्टैंडर्ड पाए गए। घी के भी दो सैंपल सब स्टैंडर्ड पाए गए। विभाग की रिपोर्ट स्वास्थ्य संबंधी चिंता बढ़ाने वाली है। ऐसे में खाद्य सामग्री खरीदते समय सावधानी बरतना जरूरी है।
गर्मी में पाउडर वाले दूध की हो रही सप्लाई
जिले में दूध की काफी मांग है। इसकी पूर्ति गुणवत्ता पर सवाल उठा रही है। दूध कारोबारियों की मानें तो दूध में पानी का इस्तेमाल हो रहा है। गर्मी में दूध की कमी के चलते सूखा दूध यानी पाउडर को पानी में घोलकर सप्लाई किया जा रहा है।
यही अतिरिक्त मांग की पूर्ति का जरिया है। इसके अलावा, मिल्क प्लांट भी लोगों को घर-द्वार पर दूध मुहैया करा रहे हैं। इसमें वीटा, मदर डेयरी, अमूल सरीखे बड़े प्लांट शामिल हैं। इनके उत्पाद की बड़ी मांग है। यहां से आपूर्ति नहीं होने पर दूध किल्लत बढ़ जाती है।
शहर में हैं 500 से ज्यादा डेयरियां
शहर में करीब 500 से ज्यादा दूध की डेयरियां हैं। इनमें 5 से 15 तक भैंस होती हैं। इनका दुग्ध उत्पादन 20 लीटर से कम नहीं होता है। यही नहीं, 120 डेयरियां भैंस की खरीद फरोख्त का काम करती हैं। यहां भी औसतन दस भैंस एक डेयरी पर होती हैं। यह संख्या कम-ज्यादा होती रहती है।
डेयरियों से दूध की मांग घरों के अलावा, हलवाई मिठाई व पनीर बनाने के लिए करता है, इसलिए यहां भी दूध की ज्यादा खपत होती है। लोग शुद्ध दूध की मांग करते हैं, इसलिए सामने दूध निकलवा कर ले जाते हैं। ऐसे में मिलावट की गुंजाइश ही नहीं रहती। पानी को छोड़कर सिंथेटिक दूध यहां नहीं बिकता है। दूध के लिए गाय पालने पर जोर देना चाहिए। इसके लिए सरकार भी अनुदान दे रही है।
- राजकमल सहगल, प्रधान, डेयरी एसोसिएशन रोहतक।
दूध की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए एफडीए की ओर से सैंपल लिए जाते हैं। पिछले पांच माह में दूध व दूध से तैयार उत्पादों के 62 सैंपल लिए गए हैं। इनमें से 27 की रिपोर्ट निम्न गुणवत्ता की पाई गई। यह मानकों के अनुरूप गुणवत्ता नहीं होने पर संबंधी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
-डॉ. योगेश कादयान, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, एफडीए।