हर महीने जल्दबाजी में चार वाहन चालक तोड़ते हैं रेलवे क्रॉसिंग
- बजरंग भवन और सांपला रेलवे क्रॉसिंग पर सबसे अधिक होते हैं हादसे
-तीन साल में आरपीएफ थाने पर 100 से अधिक के खिलाफ दर्ज हुए मुकदमे
नशे में धुत लोग भी क्रॉसिंग तोड़ने में रहते हैं आगे
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
रोहतक के विभिन्न स्थानों पर जल्दबाजी और नशे में धुत होने के कारण हर महीने चार लोग अपने वाहनों से रेलवे क्रॉसिंग को तोड़ते हैं। रेलवे क्रॉसिंग तोड़ने वालों में नशेड़ियों की संख्या अधिक है। पिछले तीन साल में आरपीएफ थाने में इस तरह के 100 से अधिक मुकदमे दर्ज किए गए हैं। हालांकि अधिकतर मामलों में रेलवे क्रॉसिंग तोड़ने वाला मौके से फरार हो जाता है।
आए दिन शहर के विभिन्न रेलवे क्रॉसिंग को अज्ञात वाहन चालक तोड़कर फरार हो जाते हैं। कई बार रेलवे क्रॉसिंग टूटने के कारण ट्रेनें भी प्रभावित हो चुकी हैं। यहीं नहीं रेलवे तकनीकी दल को मौके पर पहुंचकर टूटे क्रॉसिंग को सही करना पड़ता है। रोहतक में हर महीने करीब चार लोग नशे की हालत और जल्दबाजी के चक्कर में गंतव्य तक पहुंचने के चक्कर में कार, बस, ऑटो चालक रेलवे क्रॉसिंग तोड़ देते है। वर्ष 2016 में जहां 48 ने नशे और जल्दबाजी के चक्कर में ट्रेन आने के समय रेलवे क्रॉसिंगों को तोड़ा। वर्ष 2017 में यह संख्या बढ़कर 52 पर पहुंच गई। इस साल भी फरवरी तक इस तरह के सात मामले आरपीएफ थाने में दर्ज किए जा चुके हैं। आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार सबसे अधिक हादसे बजरंग भवन, सांपला और झज्जर लाइन स्थित रेलवे क्रॉसिंग पर होते हैं। बार-बार हादसे होने के बाद भी वाहन चालक सबक नहीं ले रहे।
वर्जन
छह महीने तक की हो सकती है सजा
रेलवे क्रॉसिंग को लापरवाही से तोड़ने पर रेलवे एक्ट की धारा 154, 160 के तहत मामला दर्ज किया जाता है। इसके अलावा यदि ट्रेन भी प्रभावित रहती है तो 174 के तहत भी मामला दर्ज होता है। इन धाराओं में छह महीने तक की सजा और दो हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
-एसपी सिंह, थाना इंचार्ज आरपीएफ
इस तरह के मामले
केस नंबर-1
इसी साल मार्च को बजरंग भवन रेलवे क्रॉसिंग को अज्ञात वाहन ने टक्कर मारकर तोड़ दिया। इसके कारण जहां दो ट्रेनें प्रभावित हुईं, वहीं दिल्ली रोड पर भी दिनभर जाम की स्थिति बनी रही। वाहन चालक परेशान रहे। आरपीएफ थाने में मामला दर्ज किया गया।
केस नंबर-2
दो महीेन पूर्व ही सांपला रेलवे क्रॉसिंग पर कार सवार ने टक्कर मार दी। इससे क्रॉसिंग टूट गई। इसके कारण घंटों तक रेलमार्ग बाधित रहा। चेन डालकर ट्रेनों को गुजारना पड़ा।
अधिकर मामलों में वाहन चालक का नहीं चल पाता पता
आरपीएफ एसएचओ का कहना है कि ऐसा होता है कि अधिकतर मामलों में जल्दबाजी के चक्कर में क्रॉसिंग को तोड़ने के बाद चालक वाहन को लेकर फरार हो जाते हैं। इसके कारण अज्ञात पर ही मामला दर्ज किया जाता है। पुलिस भी इस तरह के मामलों में चालक का पता लगाने में नाकाम ही रहती है।
70 प्रतिशत मामले में कार चालक तोड़ते हैं क्रॉसिंग
रेलवे के सीपीआरओ नितिन चौधरी का कहना है कि 70 प्रतिशत मामलों में कार चालकों द्वारा रेलवे क्रॉसिंग को तोड़ा जाता है। हालांकि पता लगने पर नामजद रिपोर्ट दर्ज कराकर कार्रवाई भी कराई जाती है। समय-समय पर रेलवे वाहन चालकों को अभियान चलाकर जागरूक भी करता है, लेकिन कु छ लोग इसके बाद भी नशे और जल्दबाजी के कारण हादसे को अंजाम देते हैं।
115 से अधिक रेलवे क्रॉसिंग
आरपीएफ थाने के अंतर्गत रोहतक और आसपास क्षेत्र में करीब 115 रेलवे क्रॉसिंग हैं, जबकि स्टाफ मात्र 31 लोगों का है। इसके कारण इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने वालों पर भी अंकुश नहीं लग पा रहा है। स्टाफ तैनाती के लिए बार-बार पत्र भेजने के बाद भी सुनवाई नहीं हो पा रही है।
फोटो- बजरंग भवन रेलवे क्रॉसिंग का फोटो लगाया जा सकता है।