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घग्घर के पानी की मांग को लेकर नौ गांव के किसान बैठे धरने पर

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अमर उजाला ब्यूरो
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सिरसा।
दो-दो मुख्यमंत्रियों की घोषणा के बाद भी जिले के 12 गांवों के लिए सिंचाई पानी की व्यवस्था न किए जाने से नाराज नौ गांवों के किसानों ने युवा भाजपा नेता गोकुल सेतिया के नेतृत्व वीरवार को नहरी विभाग के अधीक्षण अभियंता कार्यालय के समक्ष धरना शुरू कर दिया। नगराधीश डॉ. वेद बेनीवाल देर शाम धरना स्थल पर पहुंचे और किसानों की मांगों को सुनकर अति शीघ्र उनका निदान करने का आश्वासन दिया। इस आश्वासन के बाद किसानों ने अपना अनिश्चितकालीन धरना समाप्त कर दिया। उधर, घग्घर डिवीजन के एक्सईएन एनके भोला ने कहा कि चार जनवरी को प्रमुख अभियंता की अध्यक्षता में एक चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। यह टीम दौरा करने के बाद सरकार को अपनी रिपोर्ट देगी।
युवा भाजपा नेता गोकुल सेतिया ने कहा कि उनके नाना पूर्व गृहमंत्री स्व. लक्ष्मणदास अरोड़ा की पहल पर तत्कालीन सीएम भूपेंद्र हुड्डा ने 2011 में धिंगतानियां, कालुआना और रत्ताखेड़ा खरीफ चैनल बनाने की घोषणा की थी और इनकी अलाइनमेंट भी मंजूर कर दी। इस घोषणा के अनुसार कालुआना और रत्ताखेड़ा खरीफ चैनल तो बन गए, लेकिन राजनीतिक द्वेष भावना की वजह से धिंगतानियां खरीफ चैनल का मामला ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। उन्होंने कहा कि घग्घर नदी का पानी न मिलने के कारण गांव धिंगतानियां, रामनगरिया, रंगड़ी, सलारपुर, खाजाखेड़ा, शहीदांवाली, नटार, मोडियाखेड़ा, चौबुर्जा के ग्रामीणों को फसलों की सिंचाई के लिए पूरा पानी नहीं मिल पाता, जिस कारण उनकी फसलें खराब हो जाती हैं और उनकी लागत ही पूरी नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि जब तक किसानों की मांगें पूरी नहीं हो जाती तब तक धरना जारी रहेगा। धरने के दौरान किसानों ने नारेबाजी कर रोष प्रदर्शन किया।
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इस अवसर पर प्रदर्शनकारी किसानों अमर सिंह घोटिया, बलवान सिंह आदि ने बताया कि गांव रामनगरिया, सलारपुर, नटार, शहीदांवाली, मोड़िया, चौबुर्जा, धिंगतानियां और खाजाखेड़ा का भूमिगत जल का स्तर बेहद नीचे चला गया है, जिसके कारण खेती कार्य महंगा साबित हो रहा है। इन गांवों में नहरी पानी नहीं पहुंचता, ऐसे में इन गांवों के किसानों को अपना और परिवार का पालन-पोषण करना भी मुश्किल हो गया है। इन गांवों में नहरी पानी का प्रबंध करने की तत्कालीन सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी घोषणा की थी और वर्तमान सीएम मनोहरलाल खट्टर भी इस आशय की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने सीएम घोषणा को सिरे चढ़ाने की कभी कोशिश नहीं की, जिसके कारण उन्हें धरना-प्रदर्शन करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक धरातल पर ग्रामीणों की मांग की वास्तविकता नहीं मानी जाती और धिंगतानियां खरीफ चैनल के निर्माण की दिशा में काम शुरू नहीं किया जाता, तब तक ग्रामीणों के फैसले के अनुसार उनका आंदोलन जारी रहेगा। उधर, नगराधीश डॉ. वेद बेनीवाल देर शाम धरना स्थल पर पहुंचे और किसानों की मांगों को साहनुभूतिपूर्वक सुनकर अति शीघ्र उनका निदान करने का आश्वासन दिया। इस आश्वासन के बाद किसानों ने अपना अनिश्चितकालीन धरना समाप्त कर दिया।
फिजिबिलिटी जांचने के लिए सरकार ने बनाई कमेटी : भोला
उधर, घग्घर डिवीजन के कार्यकारी अभियंता एनके भोला से बात की गई तो उन्होंने बताया कि घग्घर नदी फ्लडी नहर है और बारिश के मौसम में ही इसमें पानी आ पाता है। पानी की कमी की वजह से घग्घर नदी से लिंक विभिन्न नहरों में ही मांग के अनुसार पानी उपलब्ध नहीं हो पाता। इसलिए वर्ष 2013 में ही सरकार ने इस प्रोपोजल को रद्द कर दिया गया था। हालांकि विभिन्न गांवों के ग्रामीण धिंगतानियां खरीफ चैनल बनाने की मांग को लेकर उनके पास आते रहते हैं और उनकी मांग को जायज करार देते हुए उन्होंने सरकार को पत्र भी लिखे हैं। इसी आधार पर अब सरकार ने धिंगतानियां खरीफ चैनल की फिजिबिलिटी का आंकलन करने के लिए डॉ. सतबीर कादियान चीफ इंजीनियर के नेतृत्व में चार सदस्यीय कमेटी गठित की है, जो जल्द ही इसका आंकलन शुरू करेगी और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। उक्त रिपोर्ट के आधार पर सरकार के जो भी निर्देश होंगे, उसी आधार पर आगामी कार्रवाई शुरू करवा दी जाएगी। उधर, प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि जब तक मांग पूरी नहीं होगी उनका धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।
फोटो:05

ओटू फीडर को शेरांवाली रजवाहा से जोड़ने की मांग
सिरसा। अखिल भारतीय किसान सभा ने उपायुक्त से मुलाकात कर सीएम द्वारा ओटू फीडर को शेरांवाली रजवाहा (भाखड़ा) से जोड़ने की घोषणा के बावजूद इस दिशा में काम शुरू नहीं करने पर ज्ञापन सौंपा। इसके बाद में किसानों ने भाखड़ा मंडल के अधीक्षण अभियंता आर के शर्मा को भी ज्ञापन सौंपा।
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प्रदर्शनकारी किसान नेता रमेश सहारण, निमला गांव के सरपंच शैलेंद्र, पन्नाराम, महावीर, विजय, सुभाष, राजेंद्र, सुनील, रामस्वरूप, कर्मशाना गांव के साहबराम, कृष्ण, हनुमान आदि ने यह भी बताया कि ऐलनाबाद के ढाणी शेरां, मिठनपुरा, किशनपरा, कर्मशाना, निमला की टेल तक भी पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इसकी वजह नहर में अनेक किसानों द्वारा बनाए गए अवैध मोगे व आरजे मोगे हैं, जिन्हें हटवाने की मांग को लेकर कई बार एसई से मिले हैं, लेकिन उसके बावजूद अवैध मोगे नहीं हटवाए गए। उन्होंने नहरी विभाग के एसई को सीएम घोषणा अनुसार ओटू फीडर को शेरांवाली रजवाहा से जोड़ने के संबंध में काम शुरू करने व अवैध मोगे हटवाने के निर्देश देने की मांग की। इसके अतिरिक्त उन्होंने बिजली किल्लत की भी समस्या रखी और बताया कि बिजली निगम द्वारा दिन में केवल सात घंटे बिजली दी जाती है, लेकिन उसमें भी अनेक कट लगा दिए जाते हैं, जिससे ग्रामीण बेहद परेशान हैं। इसके साथ-साथ उन्होंने गांव की सोसायटियों में पर्याप्त में यूरिया की खेप भी समय पर पहुंचाने की मांग की।
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