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मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर, अकाउंट आफिसर व म्यूनिसिपल इंजीनियर चंडीगढ़ तलब

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फर्नीचर घोटाले का प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने मांगा जवाब, मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर, अकाउंट आफिसर व म्यूनिसिपल इंजीनियर आज चंडीगढ़ तलब
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: दोपहर 12 बजे तक पहुंचना चंडीगढ़, सीनियर डिप्टी मेयर ने भेजा मां के बीमार होने की ई-मेल, नहीं आया जवाब
: मेयर बोलीं- मुख्य सचिव के सामने मजबूती से रखेंगे अपना पक्ष
: सरकार भी कटघरे में, 2015 से चल रही जांच, अब कार्यकाल खत्म होने के पांच माह पहले उठाया कदम
: शिकायतकर्ता ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, भ्रष्टाचार से कर रही सरकार समझौता
विजेंद्र कौशिक
रोहतक।
नगर निगम के फर्नीचर घोटाले में अब प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने जवाब मांग लिया है। सेक्रेटरी ने मेयर रेनू डाबला, सीनियर डिप्टी मेयर मंजू हुड्डा, डिप्टी मेयर अशोक भाटी, निगम अकाउंट आफिसर विकास गुलिया व म्यूनिसिपल इंजीनियर जगदीश चंद्र मंगलवार को चंडीगढ़ तलब किया है। शहरी निकाय विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी आनंद मोहन शरण तीनों जनप्रतिनिधि और दोनों अधिकारियों से फर्नीचर घोटाले के संबंध में सवाल-जवाब करेंगे। पारिवारिक कारणों के चलते सीनियर डिप्टी मेयर मंजू हुड्डा ने चंडीगढ़ ई-मेल करके मंगलवार को न पहुंचने के बारे में अवगत कराया, लेकिन कोई जवाब न होने के कारण वे भी चंडीगढ़ जाने की तैयारी कर रही हैं। वहीं नगर निगम पार्षदों का कार्यकाल खत्म होने के पांच माह पहले प्रिंसिपल सेक्रेटरी के बुलाए जाने को राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
नगर निगम के फर्नीचर घोटाले में प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। 2015 से मामले की जांच ही चल रही है। अब मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर का कार्यकाल 31 मई 2018 को खत्म होने जा रहा है। अब पांच माह पहले तीनों को चंडीगढ़ बुलाया गया है। जबकि मामला पहले ही केबिनेट मंत्री कविता जैन की टेबल से लेकर सीएम मनोहर लाल खट्टर तक के नोटिस में जा चुका है।
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भाजपा पार्षद ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, फर्नीचर घोटाले में आरोपी कांग्रेसी मेयर रेनू डाबला, सीनियर डिप्टी मेयर मंजू हुड्डा, डिप्टी मेयर अशोक भाटी व निगम अधिकारियों को बचाया जा रहा। किस तरह सीएम हाउस तक मामला पहुंचने के बाद कार्रवाई नहीं होने दी जा रही है। इससे पार्टी भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस की नीति पर लोग सवाल उठा रहे हैं।
अशोक खुराना, पार्षद, वार्ड नंबर 10 एवं फर्नीचर प्रकरण के शिकायतकर्ता

चंडीगढ़ से शहरी निकाय विभाग के मुख्य सचिव का फर्नीचर प्रकरण में पत्र आया है। मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर व दोनों अधिकारियों को 12 बजे तक मुख्य सचिव के कार्यालय पहुंचना है, जहां वे मजबूती से अपना पक्ष रखेंगे। दूसरा जो लोग उन पर सवाल उठा रहे हैं, उनके खिलाफ एफआईआर तक दर्ज हैं। उनको पहले अपने अंदर झांकना चाहिए।
रेनू डाबला, मेयर

मुझे कुछ पता नहीं, सीनियर डिप्टी मेयर दिल्ली
पूरे मामले के संबंध में जब सीनियर डिप्टी मेयर मंजू व उनके पति बिजेंद्र हुड्डा से संपर्क किया तो संदीप नाम के युवक ने काल रिसीव की। उन्होंने कहा कि सीनियर डिप्टी मेयर दिल्ली गई हुई हैं। वे मंगलवार को चंडीगढ़ जाने के बारे में कुछ पता नहीं। उधर, डिप्टी मेयर अशोक भाटी ने चुप्पी साध ली है। बार-बार संपर्क करने के बावजूद रिस्पांस नहीं दिया।
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ये था मामला
नगर निगम हाउस ने साल 2014 में हर वार्ड के अंदर पब्लिक सुविधा केंद्र खोलने के लिए फर्नीचर खरीदने का फैसला किया गया। इसके लिए तीन कोटेशन मंगवाई गई। एक फर्नीचर व्यापारी से 18 लाख से ज्यादा में फर्नीचर खरीदा गया। जनवरी 2015 में निगम की ओर से राशि जारी कर दी गई। तभी सवाल उठने लगे कि निगम ने यह फर्नीचर मार्केट रेट से ज्यादा पैसे में खरीदा है। बाद में फर्नीचर सप्लाई करने वाले व्यापारी ने एक लाख 42 हजार रुपये का चेक वापस निगम के खाते में जमा करवा दिया। जांच के दौरान केस की प्रापर्टी मानकर निगम की अकाउंट ब्रांच ने अभी तक चैक को भुनाया नहीं है। मामले की पहले ट्रेनिंग पर आए आईएएस अधिकारी विक्रम सिंह ने जांच की। 2016 में विजिलेंस ने जांच पड़ताल की। विजिलेंस ने जांच में फर्नीचर की खरीद में वित्तीय अनियमितता मानी है। करीब डेढ़ साल से विजिलेंस की जांच रिपोर्ट चंडीगढ़ मुख्यालय में कार्यालयों के चक्कर काट रही है।
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