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बदहाली पर आंसू बहा रहा तिलियार पर्यटन केंद्र

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बदहाली के आंसू बहा रहा तिलियार पर्यटन केंद्र
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। चिड़ियाघर में शेर नहीं, बत्तखों के बिना सुनसान झील और चारों तरफ लगे गंदगी के अंबार, कुछ ऐसी ही पहचान बन गई है कि तिलियार पर्यटन केंद्र की। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाया गया तिलियार पर्यटन केंद्र और मिनी जू फिलहाल बदहाली के आंसू बहा रहा है। हालात यह है कि बंदरों के उत्पात और गंदगी के ढेर की वजह से पर्यटकों की संख्या भी कम हो रही है। रही-सही कसर प्रेमी-जोड़े पूरे कर देते हैं। लोगों की नजरों से बचने के लिए प्रेमी-जोड़ों का सटीक ठिकाना बना हुआ है। वहीं काफी समय से झील का पानी भी नहीं बदले जाने और बदबू की वजह से परिवार के साथ घुमने वाले लोग भी वहां पर जाने से कतराने लगे हैं। इतना सब होने के बाद भी स्थानीय अधिकारियों के नींद नहीं टूट रही। तिलियार की अव्यवस्थाओं और अधिकारियों की अनदेखी को लेकर अमर उजाला की रिपोर्ट।

पांच साल में नहीं चला लाइट एंड साउंड मल्टीमीडिया लेजर शो
132 एकड़ में फैले तिलियार पर्यटन केंद्र को बेहतर तरीके से डेवलप करने और पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए 2012 में लाइट एंड साउंड मल्टीमीडिया लेजर शो बनाने की घोषणा हुई थी। सिंगापुर के सेंटोसा लेजर शो की तर्ज पर बनने वाले इस लेजर शो के लिए करीब साढ़े पांच करोड़ का बजट रखा गया था। इंडिया टूरिज्म डेवलपमेंट कारपोरेशन के इस प्रोजेक्ट के लिए वित्तीय सहायता के तौर पर केंद्र सरकार को साढ़े तीन करोड़ और दो करोड़ रुपये प्रदेश सरकार को देना था। वर्ष 2014 में लाइट एंड साउंड मल्टीमीडिया लेजर शो बनकर तैयार भी हो गया, लेकिन पांच साल बाद भी यह शुरू नहीं हो सका। हालांकि पिछले माह भी इसका ट्रॉयल हुआ है। यह शुरू कब होगा अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।
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दो साल में भी नहीं हो सका शेर
तिलियार मिनी जू के एकमात्र शेर ‘सौरभ’ की सितंबर 2015 में मौत हो गई थी। शेर की मौत के बाद तिलियार में तेंदूआ, हिरण, मगरमच्छ और अन्य जानवर बचे हैं। करीब दो साल होने का है, तभी से लेकर शेर का बाड़ा खाली पड़ा हुआ है। जू में नया शेर लाने के लिए करीब डेढ़ साल से प्रक्रिया भी चल रही है, लेकिन अभी तक भी नया शेर नहीं आ सका। ऐसे में जू में जाने वाले पर्यटकों को शेर नहीं होने के कारण निराशा हाथ लगती है।

दस माह से वापस नहीं लायी गई बत्तख
तिलियार झील में पिछले वर्ष तक काफी बत्तखें दिखाई देती थी, लेकिन नवंबर माह में बर्ड फ्लू के डर के कारण यहां की करीब 50 बत्तखों को निकालकर सांपला पर्यटन केंद्र में भेज दिया गया था। करीब दस माह बीतने के बाद भी अभी तक इन बत्तखों को वापस नहीं लाया गया। ऐसे में झील की रौनक भी खत्म हो गई है।

नहीं बदला जाता झील का पानी
तिलियार में झील का पानी सबसे बड़ी समस्या है। करीब 20 एकड़ में फैली झील के पानी में बदबू उठती रहती और चारों तरफ गंदगी के ढेर रहते हैं। झील के पास से गुजरने में भी बदबू आती है। हालांकि अधिकारी दावा जरूर करते हैं कि सप्ताह में एक बार झील में नहर का पानी छोड़ा जाता है, लेकिन फिर भी झील का पानी कभी साफ नहीं होता। स्थिति यह है कि झील में बोटिंग के लिए भी पर्यटकों के संख्या न के बराबर हो गई है।

प्रेमी-जोड़ों के कारण नहीं जा पाते परिवार
तिलियार झील और मिनी जू प्रेमी-जोड़ों का ठिकाना बना हुआ है। यहां पर हर रोज प्रेमी-जोड़े पहुंचते और झाड़ियों में इधर-उधर बैठे रहते हैं। हालांकि अब मिनी जू की झाड़ियां काफी कम कर दी है, लेकिन फिर भी प्रेमी-जोड़ों के कारण यहां पर परिवार घुमने-फिरने के लिए जाने से कतराते हैं।

पार्क में रखे डस्टबीन, फिर भी लगे गंदगी के अंबार
तिलियार के पार्क में गंदगी के लिए जगह-जगह डस्टबीन रखे गए हैं, लेकिन हालात यह है कि डस्टबीन खाली रहते हैं और पार्क में गंदगी के अंबार रहते हैं। वहीं बंदर भी पार्क में काफी गंदगी फैलाकर रखते हैं। ऐसे में पर्यटकों का पार्क में बैठना भी मुश्किल होता है।
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लाइट एंड साउंड मल्टीमीडिया लेजर शो का पिछले माह ट्रायल हुआ था। उम्मीद है कि इसे जल्दी ही शुरू कर दिया जाएगा। इसके अलावा तिलियार में साफ-सफाई का भी ध्यान रखा जाता है। झील का गंदा पानी भी समय-समय पर निकाला जाता है। पर्यटकों को कोई परेशानी नहीं होने दी जाती।
- जेपी शेखावत, टूरिस्ट ऑफिसर
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