अब सेटेलाइट से होगी शहर की स्वच्छता पर नजर
भिवानी।
अब सेटेलाइट से शहर की स्वच्छता पर नजर रखी जाएगी। शहर की सभी गलियों की पहचान उसके यूनिकोड नंबर से होगी। सेटेलाइट से पता लगेगा कि कचरे का उठान हो रहा है या नहीं। वहीं एक क्लिक पर शहर की किसी भी गली की पूरी जानकारी कंप्यूटर स्क्रीन पर होगी। नगर परिषद के अधिकारी इन दोनों महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर काम कर रहे है। गलियों का सर्वे पूरा हो चुका है और शहर के वैध क्षेत्र में 2650 गलियां चिन्हित की गई। जिनका रिकार्ड चंडीगढ़ भेजा जाएगा और सारी जानकारी ऑनलाइन की जाएंगी।
नगर परिषद के अधिकारी व कर्मचारी इन दिनों स्वच्छता ऐप और हर पथ स्कीम के तहत शहर की वर्षों से बिगड़ी सफाई व्यवस्था को सुधारने के लिए विशेष योजना पर काम कर रहे हैं। इसके तहत नगर परिषद के अधिकारी शहर में सर्वे कर कचरे के डंप प्वाइंट निर्धारित करेंगे। मुख्य स्थानों पर बड़े कूड़ेदान रखे जाएंगे। सेटेलाइट से इन पर नजर रहेगी। साफ्टवेयर में तीन बटन हरा, पीला व लाल होंगे। जिनसे पता लगेगा कि डस्टबिन की क्या स्थिति है। अगर कूड़ेदान ओवरफ्लो होगा तो लाल बत्ती का निशान आएगा। पीला निशान है तो डस्टबिन में कचरा है मगर ओवरफ्लो नहीं है। ग्रीन निशान है तो कूड़ेदान से कचरा उठा लिया गया है।
दो जोन में बांटकर होगी सफाई
योजना के तहत शहर को सफाई व्यवस्था के लिए दो जोन में बांटा गया है। इसके अलावा सफाई का जिम्मा भी ठेके पर देने का प्लान है। अभी प्लानिंग बन रही है कि शहर से कचरे का उठान का ठेका दिया जाए या घर-घर कलेक्शन का काम। इस बारे में नप अधिकारी विचार विमर्श कर रहे है। नप के पास फिलहाल 180 नियमित व 160 अनुबंधित कर्मचारी है। शहर के क्षेत्र और आबादी को देखते हुए पांच सौ से अधिक सफाई कर्मचारियों की आवश्यकता है। कर्मचारियों की कमी के कारण ही अब सफाई का काम ठेके पर देने की प्लानिंग बनी।
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शहर में कौन सी गली कब अस्तित्व में आई, कच्ची है या पक्की मिलेगी जानकारी
सरकार के निर्देश पर हर पथ स्कीम के तहत शहर की हर गली का रिकार्ड बनाया जा रहा है। गली कब अस्तित्व में आई, कच्ची है या पक्की है। सर्वे का काम लगभग पूरा हो चुका है और शहरी क्षेत्र में करीब 2650 गलियां है। इनका पूरा रिकार्ड चंडीगढ़ भेजा जाएगा और फिर सेटेलाइट के माध्यम से जीआईएस मैपिंग होगी। नगर परिषद, मार्केट कमेटी, हुडा व पीडब्ल्यूडी विभाग मिलकर इस पर काम कर रहा है। इसके तहत हर गली को एक यूनिकोड के तौर पर नई पहचान दी जाएगी। सभी गलियों में अपनी एक यूनिक आईडी होगी। जो उसकी पहचान बनेगी। कैटेगरी अनुसार सर्वे कर इसका डाटा ऑन लाइन किया जाएगा।
वर्जन:::::
शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे है। अब सफाई व्यवस्था पर सेटेलाइट से नजर रखी जाएगी। इसके लिए सर्वे किया जा रहा है और शहर का डाटा तैयार कर चंडीगढ़ भेजा जाएगा। सेटेलाइट से उच्च अधिकारियों, चंडीगढ़ मुख्यालय अधिकारियों को सूचना मिल सकेगी कि कचरे का उठान हो रहा है या नहीं। सफाई व्यवस्था क्या है। शहर को दो जोन बांटकर सफाई व्यवस्था का खाका तैयार किया जाएगा। कुछ कार्य ठेके पर दिया जाएगा।
राजेश महता, सचिव
नगर परिषद
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हर पथ स्कीम के तहत शहर की गलियों का डाटा तैयार किया गया है। शहर में करीब 2650 गलियां है। हरेक गली को एक यूनिक नंबर दिया जाएगा। हरेक गली की पूरी जानकारी कंप्यूटर में अपलोड की जाएगी। गली कच्ची है, पक्की है, कितनी लंबाई है आदि सभी। जल्द ही सर्वे रिपोर्ट चंडीगढ़ मुख्यालय भेजी जाएगी।
सुंदर सिंह, एमई
नगर परिषद