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Rohtak News: पीजीआई में एचआईवी मरीजों के लिए दवा का 6 दिन स्टॉक बचा

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11सीटीके17..पीजीआई में शनिवार को हड़ताल पर बैठे एड्स कांट्रोल सोसाययटी के सदस्य। संवाद
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रोहतक। एड्स कंट्रोल सोसाइटी के कर्मचारियों की हड़ताल एचआईवी मरीजों पर भारी पड़ने लगी है। एक तरफ जहां ब्लड जांच रिपोर्ट बंद है, वहीं एचआईवी के मरीजों की दवा भी समाप्त होने वाली है। पीजीआई के एआरटी सेंटर में मुश्किल से 6 दिन की दवा का स्टॉक शेष है। मरीजों को समय पर दवा नहीं मिली तो उनकी हालत बिगड़ना तय है।
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एड्स कंट्रोल सोसाइटी के कर्मचारी पिछले 11 दिनों से हड़ताल पर हैं। एचआईवी संक्रमित की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। हालात ये हैं कि एआरटी सेंटर में एक चिकित्सक पूरी ओपीडी संभाल रहे हैं। एड्स कंट्रोल सोसाइटी कर्मचारी खुद को नियमित करने की पॉलिसी में शामिल करने की मांग कर रहे हैं।

सीडी4 के अनुसार देते हैं दवा
एचाआईवी मरीज को सीडी4 (क्लस्टर ऑफ डिफरेंशिएशन 4) की रिपोर्ट के अनुसार दवा दी जाती है। इस रिपोर्ट से पता चलता है कि मरीज में कितना वायरस लोड है। शरीर के कितने हिस्से में एचआईवी फैला है। इसके आधार पर दवा की एक कोर्स बनाई जाती है। प्रत्येक दो माह पर चिकित्सक की सलाह पर सीडी4 टेस्ट की जाती है। इसकी रिपोर्ट आने के बाद दवा में बदलाव या फिर चलाई जा रही दवा ही आगे बढ़ाई जाती है।
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एक दिन भी नहीं छूटनी चाहिए दवाई
गाइडलाइन के हिसाब से एचआईवी मरीज की दवा शुरू होने पर एक दिन भी यह रोकी नहीं जा सकती है। अंतराल होने पर वायरस लोड दोगुना हो जाता है, जो मरीज के लिए घातक होता है। इसलिए चिकित्सक एक से दो हफ्ते पहले दवा एडवांस में लेने के लिए परामर्श देते हैं। ऐसे में अगर जल्द दवा संस्थान में नहीं आती है तो मरीजों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है।

बाजार में महंगी और बड़ी मशक्कत से मिलती है दवा
बाजार में एचआईवी दवा हजारों रुपयों में मिलती है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह आसानी से उपलब्ध भी नहीं होती है। यदि मिल भी जाए तो इसकी अच्छी कीमत मरीज को चुकानी पड़ती है।


दवा का मात्र छह से सात दिन का ही स्टॉक उपलब्ध है। दवा मंगाने के लिए लिस्ट भेज दी गई है। पूरी जिम्मेदारी के साथ मरीजों का इलाज किया जा रहा है। प्रयास है कि किसी मरीज को इलाज और दवा संबंधी समस्या न आए।
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डॉ. पीयूष, मेडिकल ऑफिसर, एआरटी सेंटर।
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