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मरीजों को एनएस और डॉक्टरों को पोस्टमार्टम के लिए बहाना पड़ता है पसीना

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अमर उजाला ब्यूरो

कृषि मंत्री ओपी धनखड़ के समक्ष परिजनों और डॉक्टरों ने खोली पीजीआईएमएस की पोल
‘मरीजों को एनएस और डॉक्टरों को पोस्टमार्टम के लिए बहाना पड़ता है पसीना’

रोहतक।
दादरी सड़क हादसे में घायल विद्यार्थियों का हाल जानने पहुंचे कृषि मंत्री ओपी धनखड़ के समक्ष मंगलवार को मरीजों के परिजनों से लेकर डॉक्टरों ने पीजीआईएमएस में पसरी अव्यवस्थाओं की पोल खोल दी। जहां मरीजों ने मंत्री के समक्ष एपेक्स धनवंतरी ट्रामा सेंटर में एनएस की अनुपलब्धता की बात बताई, वहीं डॉक्टरों ने शव गृह में एसी न होने के चलते पसीने में भीग कर पोस्टमार्टम करने की व्यथा बताई।

कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ घायल विद्यार्थियों के उपचार व उनकी देखभाल की जानकारी लेने जैसे ही ट्रॉमा सेंटर पहुंचे, परिजनों ने शिकायतों की कतार लगा दी। एक अभिभावक रामचंद्र ने मंत्री को बताया कि वह रात को अपनी शिकायत लेकर एमएस और डीएमएस के चक्कर काट कर थक गए, लेकिन कोई उनसे नहीं मिला। मरीज को लगाई जा रही नार्मल स्लाइन एनएस तक डॉक्टर बाहर से मंगा रहे हैं। ऐसे में ट्रामा में मिल रही मरीजों को सुविधाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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वहीं ट्रॉमा सेंटर में एसी न होने से परेशान मरीजों की पीड़ा स्वयं मंत्री के चेहरे पर देखने को मिल रही थी। आम लोगों के साथ स्वयं मंत्री भी निरीक्षण के दौरान पसीने से तरबतर थे। कृषि मंत्री ने समस्याओं पर डॉक्टरों को मौके पर बुलाकर फटकार लगाई और साथ ही ट्रॉमा सेंटर के एक जूनियर अधिकारी को बीच में बात काटने और अधिक बोलने पर खिंचाई की। ट्रामा सेंटर से मंत्री घायलों का हाल जानने वार्ड छह में पहुंचे। यहां पर उन्होंने घायलों के अभिभावकों से बातचीत की और मौके पर स्टाफ को निर्देश दिया कि किसी मरीज के उपचार में कोई कमी नहीं आनी चाहिए। मौके पर वार्ड में गर्मी को लेकर जब मंत्री ने एसी सुविधा क्यों न होने का कारण पूछा तो उन्हें उल्टा जवाब मिला। इस पर मंत्री चुप हो गए। वार्ड छह से मंत्री वार्ड 12 पहुंचे तो उनके साथ चल रहे लोगों ने सड़क हादसे के घायल मरीजों को दिखाने की जगह 20 मार्च को सड़क हादसे में पैर गंवा चुकी प्रीति से मिलवा दिया। इस पर भी मंत्री ने खासी नाराजगी जाहिर की। वार्ड 12 से मंत्री मृतक के परिजनों से मिलने शव गृह पहुंचे।

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क्या बात डॉक्टर साहब पहले से कमजोर हो गए हैं आप : धनखड़
आपके राज में देखो हमारा हाल, शव गृह में एसी नहीं : धत्तरवाल
मृतक के परिजनों से शव गृह मिलने पहुंचे कृषि मंत्री ओ.पी. धनखड़ और फोरेंसिक मेडिसन विभागाध्यक्ष डॉ. एस.के. धत्तरवाल मंगलवार शवगृह में जैसे ही आमने-सामने हुए तो मंत्री ने डॉ. धत्तरवाल के स्वास्थ्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या बात डॉक्टर साहब पहले से कमजोर हो गए हैं आप। इस पर विभागाध्यक्ष डॉ. धत्तरवाल ने भी सटीक जवाब देते हुए मंत्री की सरकार पर ही सवाल दाग दिया। विभागाध्यक्ष ने जवाब देते हुए कहा कि आपके राज में देखों मंत्री जी हम डॉक्टरों का क्या हाल है। शव का पोस्टमार्टम करने के दौरान एसी तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है। डॉ. धत्तरवाल मंत्री को लेकर अंदर गए और सारी अव्यवस्थाओं से रुबरू कराया। डॉक्टर ने बताया कि शव गृह को आधुनिक बनाने के लिए 20 करोड़ रुपये का बजट पास है और पैसा भी आया, लेकिन तीन बार से लैप्स हो रहा है। अब इस पर जांच चल रही है कि यह पैसा लैप्स क्यों हुआ है। इस संबंध में संस्थान के अधिकारियों से सवाल भी पूछा गया है। इस पर मंत्री ने कहा कि इसकी जानकारी उनको व सीएम को दी जानी चाहिए थी। इस पर विभागाध्यक्ष ने जवाब दिया कि वह कई बार अपनी बात रख चुके हैं, लेकिन कोई सुनता नहीं है।

प्राथमिकता पर करें घायल बच्चों की देखभाल : धनखड़
कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने पीजीआई के डॉक्टरों को घायल बच्चों का उपचार व उनकी देखभाल के कार्य में प्राथमिकता रखने के निर्देश दिए। इसके साथ दुर्घटना के मृतकों को एक-एक लाख व घायलों के उपचार के लिए 50-50 हजार रुपये की राशि अपने ऐच्छिक कोष से देने की घोषणा। मंत्री ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि सड़क दुर्घटना बेहद भयंकर थी और इसमें स्कूली बच्चों को काफी नुकसान पहुंचा है। गर्मी के मद्देनजर पीजीआई प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि या तो उपचाराधीन बच्चों को वातानुकूलित वार्ड में शिफ्ट किया जाए या फिर ट्रामा सेंटर में ही तापमान कम करने की अस्थायी व्यवस्था तुरंत प्रभाव से शुरू कर दी जाए। दुर्घटना में किसकी लापरवाही के सवाल पर मंत्री ने कहा कि यह जांच का विषय है। दादरी क्षेत्र में अरावली की पहाड़ियां होने की वजह से वहां बड़ी संख्या में डंफर चलते हैं। सरकार ओवर लोडेड वाहनों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है और अब इस मामले में अधिक सख्ती करने की आवश्यकता है। डंफरों की संख्या नियंत्रित करने के लिए परिवहन विभाग से बातचीत करके हल निकाला जाएगा। विकसित देशों के मुकाबले देश में वाहन चालकों की आदत का स्तर कुछ निम्न है। क्षेत्र को दुर्घटना मुक्त बनाने के लिए सभी को नियमों का पालन करना होगा। विकसित देशों में ड्राइविंग लाइसेंस बड़ी मुश्किल से मिलता है और उसे गड़बड़ी होने पर रद्द भी कर दिया जाता है। कृषि मंत्री के साथ घायलों का हाल जानने वालों में पार्टी के जिलाध्यक्ष अजय बंसल, डॉ. दिनेश घिलौड़, बीडीपीओ राजपाल चहल, डॉ. रोहताश यादव, डॉ. नित्यानंद, डॉ. कपिल व डॉ. संदीप सिंह आदि शामिल हैं।
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बच्चे में मुंह से निकला कांच का टुकड़ा
ट्रॉमा सेंटर में एक परिजन ने बताया कि उसके बच्चे के मुंह में कांच का टुकड़ा निकला है। जबकि उपचार के दौरान डॉक्टरों ने इसके निकाला ही नहीं। इससे यहां के डॉक्टरों के उपचार करने की गंभीरता को देखा जा सकता है। इसके साथ ही ट्रॉमा सेंटर में घायलों की संख्या के हिसाब से डॉक्टर राउंड तक नहीं करते हैं।
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