स्वास्थ्य के नाम पर चौथा बजट रहा फीका
1262 रुपये प्रति व्यक्ति सालाना के हिसाब से मिलेगी स्वास्थ्य सेवाएं
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
प्रदेश की भाजपा सरकार ने शुक्रवार को अपने चौथे बजट में स्वास्थ्य सेवाओं को पीपीपी मोड पर धकेलने का प्रयास किया है। इस बजट में प्रत्येक व्यक्ति के हिस्से सालाना उपचार के लिए 1262 रुपये ही आया है। जबकि पीपीपी मोड पर यदि मरीज एक बार किसी सरकारी संस्थान में सीटी जांच ही करवाता है तो उसे 1700 से 2700 रुपये खर्च करने पड़ जाते हैं। एक्सपर्ट इस बजट को फीका बताते हुए, सरकार पर सवाल उठा रहे हैं कि स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाने की बजाए सरकार इसका निजी करण करने पर जोर दे रही है।
पीजीआईएमएस से सेवानिवृत्त वरिष्ठ सर्जन एवं पूर्व चीफ विजिलेंस अधिकारी डॉ. आरएस दहिया की मानें तो स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए वर्ष 2018-19 में 4,769.61 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया, इसमें 25.02 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इसमें स्वास्थ्य विभाग के लिए 2,964.54 करोड़ रुपये, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए 1,344.14 करोड़ रुपये, आयुष के लिए 278.29 करोड़ रुपये, ईएसआई के लिए 160.01 करोड़ रुपये और खाद्य एवं औषध के लिए 22.63 करोड़ रुपये का परिव्यय शामिल किया गया है। कहने के लिए इसमें स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर 25.2 प्रतिशत बजट बढ़ाया गया है। जबकि पिछले बजट की तुलना में यह महज 4.14 प्रतिशत ही बढ़ा है। यदि एक साल में बढ़ी महंगाई और जनसंख्या को देखें तो यह काफी कम है। सरकार ने दावा कहा है कि प्रदेश में 60 अस्पताल, 8 ट्रॉमा सेंटर, 3 बर्न यूनिट्स, 124 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 500 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 2,630 उप-स्वास्थ्य केंद्र और 64 शहरी औषधालयों व पॉली क्लीनिक्स हैं। लेकिन यह प्रदेश की जनसंख्या के हिसाब से बहुत कम हैं। प्रदेश में दो करोड़ 53 लाख जनता है। इसके हिसाब से 124 सीएचसी काफी कम हैं। एक लाख पर एक सीएचसी होनी चाहिए, इस हिसाब से प्रदेश में 253 सीएचसी होनी चाहिए। इसी तरह 30 हजार की जनसंख्या पर पीएचसी व पांच हजार पर एक सब सेंटर होना चाहिए, लेकिन कोई भी मानक पूरा नहीं हो रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर और डॉक्टरों की कमी झेल रहे विभाग ने मेडिकल कॉलेज खोलने की बात कही है, सच तो यह है कि यह सारा निजी हाथों में दिया जाएगा। क्योंकि सरकारी मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए बजट नहीं रखा गया है। सरकार की मुख्यमंत्री निशुल्क उपचार योजना का दिवाला पिटा हुआ है, बजट न बढ़ने से दवा सरकारी अस्पतालों में कभी नहीं मिलती। राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना हरियाणा में दो साल से लागू ही नहीं है, यह कागजों में ही लोगों को लुभा रही है। प्रधानमंत्री जन औषद्यालय में पर्याप्त जैनेरिक दवाएं ही नहीं हैं। सीटी स्कैन, एमआरआई जांच मशीन के अलावा डायलेसिस तक पीपीपी मोड देने की तैयारी है। स्वास्थ्य विभाग में सीटी स्कैन मशीन लाने की बात कही गई है, लेकिन जहां लगे हैं वहां रेडियोलॉजिस्ट नहीं हैं। हरियाणा सरकार बजट पेश करने से पहले स्वास्थ्य विभाग की जमीनी हकीकत को जांचना भूल गई है।
बजट न बढ़ने से रहेगा दवाओं और डॉक्टरों का टोटा
मरीजों की संख्या बढ़ने और स्वास्थ्य सेवाओं के बजट में इजाफा न होने का असर जनता को भुगतना पडे़गा। सरकार की मुख्यमंत्री नि:शुल्क उपचार योजना का पहले ही दिवाला पिटा हुआ है। अस्पताल में मरीज का पंजीकरण पांच रुपये में तो होता है, इसके बाद उसे कुछ जांच की कीमत अदा करनी पड़ती है तो कुछ जांच निशुल्क होती है। वार्ड में मरीज का उपचार नि:शुल्क है, लेकिन पीजीआईएमएस जैसे संस्थान में आपातकालीन मेडिसन की ट्रे तक उपलब्ध नहीं होती। जच्चा बच्चा को डिलीवरी के लिए पूरा खर्च करना होता है, जबकि सरकार की ओर से यह निशुल्क है। बात स्वास्थ्य विभाग की करें तो यहां भी मरीजों को अधिकांश दवाएं बाहर से ही लिखी जाती हैं। रेफरल ट्रांसपोर्ट के नाम पर कुछ ही वर्ग को नि:शुल्क एंबुलेंस सेवाएं दी गई हैं, जबकि जनसंख्या के अनुरूप प्रदेश में एंबुलेंसों की संख्या नाम मात्र की हैं। इसके अलावा प्रदेश में एनेस्थिसिया विभाग के डॉक्टरों की भी कमी है।
रोहतक जिला अस्पताल को मिलेगी सीटी जांच मशीन
जिला अस्पताल रोहतक को सीटी जांच मशीन मिलेगी। इसका लाभ यहां आने वाले मरीजों को मिलेगा। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट डॉ. नीलम हुड्डा की तैनाती है। विभाग ने सरकार को लंबे समय से इस मशीन की डिमांड भेजी हुई थी। गौरतलब है कि जिला रोहतक में सीटी व एमआरआई जांच के लिए पीजीआईएमएस में सरकारी और पीपीपी मोड पर व्यवस्था है। इसके बाद जिला अस्पताल में इसकी सुविधा होने से मरीजों को इसका लाभ मिलेगा।
प्रदेश की यह है स्थिति
प्रदेश की जनसंख्या 2.53 करोड़
एमबीबीएस सीट 1400
सीएचसी 124 उपलब्ध, जरूरत 253 की
पीएचसी 500 उपलब्ध, जरूरत 840 की
सब सेंटर 2530 उपलब्ध, जरूरत 5060 की