अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
खेलमंत्री अनिल विज के पर्वतारोहण खेल नहीं, सिर्फ एडवेंचर वाले बयान के बाद बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की रेवाड़ी ब्रांड एंबेसडर और पर्वतारोही सुनीता चौकन के परिजन निराश है। करीब छह साल से चौकन को सरकारी नौकरी की मांग कर रहे परिजन इस बयान से बेहद दुखी हैं। बेटी को एवरेस्ट फतेह करवाने के लिए प्लॉट बेचकर और लोगों से पैसे उधार लेते हुए चौकन को मिशन पर भेजने वाले पिता जौहरी सिंह इस बयान के बाद हताश है।
उल्लेखनीय है कि रेवाड़ी के गुजर माजरी निवासी सुनीता चौकन ने 20 मई 2011 को हरियाणा में सबसे कम उम्र की आयु में माउंट एवरेस्ट फतेह किया था। उसके बाद से ही सुनीता के परिजन-ग्रामीण प्रशासन और सरकार से चौकन की सरकारी नौकरी की मांग कर रहे हैं। सुनीता चौकन के पिता जौहरी सिंह ने बताया कि सुनीता ने सबसे कम उम्र की आयु में माउंट एवरेस्ट फतेह कर रेवाड़ी ही नहीं पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। बावजूद इसके सुनीता को सरकार ने कोई नौकरी नहीं दी। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पहले माउंट एवरेस्ट फतेह करने वाली कैथल निवासी ममता सौदा को डीएसपी एवं सुनीता के बाद माउंट एवरेस्ट फतेह करने वाली दो लड़कियों को सब इंस्पेक्टर बनाया है। यह अहीरवाल के साथ अन्याय है। इसके लिए कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक से मांग की गई। लेकिन कोई लाभ नहीं मिला।
16 चोटियों पर फहरा चुकी है झंडा
सुनीता चौकन के पिता ने बेटी को माउंट एवरेस्ट फतेह कराने के लिए प्लाट बेचा, पैसे उधार लिए। इसके बाद कहीं जाकर सुनीता अपने मिशन में कामयाब हुई। जब सुनीता ने माउंट एवरेस्ट फतेह किया तो सुनीता के नाम गूंज उठा। साल 2014 में सुनीता को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ रेवाड़ी का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया। सुनीता अभी तक नेपाल के तीन सहित 16 चोटियों पर तिरंगा फहरा चुकी हैं।
साइकिल यात्रा पर हैं सुनीता
फिलहाल सुनीता बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, कन्या भ्रूणहत्या रोकने एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए कन्याकुमारी से लेह लद्दाख तक साइकिल यात्रा पर हैं। यात्रा के दौरान सुनीता प्रतिदिन जहां रुकती हैं वहां पांच पौधे लगाती हैं। साथ में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश देती हैं। शनिवार को सुनीता पुणे पहुंचीं।