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नहरों में भरपूर पानी फिर भी दूसरे दिन पेयजल सप्लाई

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नहरों में भरपूर पानी फिर भी दूसरे दिन पेयजल सप्लाई
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चरखी दादरी। जिले की नहरों में भरपूर पानी पहुंच रहा है फिर भी जनस्वास्थ्य विभाग शहर में एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई कर रहा है। आठ साल बाद इस बार नहरों में रिकार्ड 850 क्यूसेक पानी पहुंचा है। आमतौर पर नहरों में 500 से 600 क्यूसेक पानी ही छोड़ा जाता रहा है। सभी नहरों व माइनरों में क्षमता से अधिक पानी चल रहा है। इसके बावजूद शहर के 50 फीसदी क्षेत्र में लोग पेयजल समस्या से जूझ रहे हैं। कई कॉलोनियों में तो काला व बदबूदार सीवरेज मिक्स पानी घरों में पहुंच रहा है। वहीं, विभागीय अधिकारी जल्द से जल्द सभी समस्याओं का समाधान कराने का तर्क दे रहे हैं। क्षेत्र की हरों में 11 जुलाई को ही पानी छोड़ा गया है। सिंचाई विभाग ने इस बार जितना इंडेंट भेजा उतना ही पानी हेड से मिल गया। इस समय छोटी-बड़ी सभी माइनरों में पानी चल रहा है। जिले के 58 जलघरों में पानी डाले जाने पर तत्परता काम हो रहा है। गत जनवरी माह में तो शहर व आसपास के गांवों में पानी का संकट गहराया रहा।
850 क्यूसेक पानी का इंडेंट भेजा था
सिंचाई विभाग ने 850 क्यूसेक पानी का इंडेंट भेजा था। पीछे हेड से पूरा मिल पानी मिल गया। इस समय जिले की मेन लोहारू नहर में 772 क्यूसेक पानी चल रहा है जबकि इसमें आमतौर पर 450 क्यूसेक पानी चलता रहा है। इस प्रकार छोटे व बड़े सभी माइनरों में पानी चल रहा है। पांडवान माइनर, साहुवास माइनर, भागवी, कमोद, लोहरवाड़ा, दादरी लिंक माइनर में पूरा पानी चल रहा है।
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लोहारू की सीमा तक पहुंचा पानी
लोहारू क्षेत्र के पंप हाउस सात व आठ तक पानी पहुंच गया है जबकि पहले यहां कम ही पानी पहुंचता रहा है। यह रेतीला एरिया है इसलिए यहां हमेशा नहरी पानी की जरूरत बनी रहती है।
घिकाड़ा पंप हाउस पर चल रहीं 25 मोटरें
मेन घिकाड़ा पंप हाउस पर इस समय 25 मोटरें चल रही हैं जबकि आमतौर पर यहां 17-18 मोटरें ही चलती थी। इस बार पानी अधिकता से मोटरों की संख्या भी बढ़ाई गई है ताकि पानी का पीछे से उठान कर आगे भेजा जा सके।
शहर में नहीं हो पा रही नियमित पेयजल आपूर्ति
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांचे गए पानी के सेंपल फेल पाए जाने पर विभाग की परेशानी और बढ़ गई है। एक तो पानी की कम आपूर्ति व दूसरे पानी की गुणवत्ता कम होने की वजह से लोगों में नाराजगी है। शहर में रोजाना 10 लाख लीटर पानी की खपत है लेकिन विभाग औसतन पांच से छह लाख लीटर ही आपूर्ति कर रहा है। ऐसे में समय- समय पर शहर में पानी का संकट गहराता रहता है। शहर के दोनों जलघरों की क्षमता मात्र 20 दिन की ही है। नहरों में अक्सर 15 दिन के लिए ही पानी आता है। इस वजह से विभाग पानी की बचत पर अधिक ध्यान रखता है। इतना ही नहीं विभाग बीच-बीच में बोरिंग ट्यूबवेल का पानी मिलाकर भी सप्लाई करता है।
पुरानी पेयजल लाइनें लोगों के लिए बनीं परेशानी
शहर के वार्ड नंबर 10, 11, 12 व दो की कई गलियों में करीब 70 साल पहले पेयजल की लाइनें बिछाई गई थी जो कि कंडम हो चुकी हैं। वार्ड नंबर तीन में भी हालात जस के तस हैं। वार्ड नंबर दस व 12 के लोग तो कई बार इन पाइप लाइनों को बदलने की मांग कर चुके हैं लेकिन विभागीय अधिकारी अब तक महज आश्वासन ही देते आ रहे हैं। गत दिनों भी पंचनंद व गोशाला चौक के समीप महिलाओं ने पेयजल किल्लत को लेकर जाम लगाया था। वहीं, वार्ड पार्षदों का कहना है कि अगर जल्द ही समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वो विभाग के खिलाफ आंदोलन छेड़ने को विवश होंगे।
अगर नहरों में पर्याप्त मात्रा में पानी पहुंच गया है तो जन स्वास्थ्य विभाग को प्रतिदिन पानी देना चाहिए। गर्मी के मौसम में बिना पानी के काफी समस्या झेलनी पड़ रही है।
राजेंद्र, वार्ड-20
नहरों में अधिक पानी है लेकिन विभाग कर्मचारी अभी भी कम मात्रा में पानी छोड़ रहे हैं। कई बार विभागीय अधिकारियों से मिल भी चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
महाबीर, वार्ड 16
पानी की समस्या पिछले काफी समय से बनी हुई है। नहरों में पानी पहुंच चुका है तब भी विभाग एक दिन छोड़कर पानी दे रहा है। लोगों की समस्या को देखते विभाग को प्रतिदिन पानी देना चाहिए।
कृष्ण, वार्ड 07
नहरों में पानी की मात्रा पूरी है तो पानी भी प्रतिदिन छोड़ना चाहिए। लोगों को पानी के टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं या फिर इधर-उधर की भागदौड़ कर पानी का इंतजाम करना पड़ा रहा है।
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विजय, वार्ड 15
पहले कुछ समस्याएं थीं और इस कारण एक दिन छोड़कर एक दिन पेयजल सप्लाई कर रहे थे। इस बार नहरों में पर्याप्त मात्रा में पानी छोड़ा गया है। जलघरों के वाटर स्टोरेज टैंक से भरे जा रहे हैं। जल्द से जल्द समस्या का समाधान करवा देंगे। शहर में पेयजल किल्लत के समाधान के लिए हम प्रयासरत हैं।
एसडीओ रामपाल, जन स्वास्थ्य विभाग
हमने इस बार हमें इंडेट के मुताबिक नहरी पानी मिला है। 850 क्यूसेक पानी नहरों में चल रहा है। अंतिम टेल तक हम पानी पहुंचाने के लिए हम प्रयासरत है।
आनंद सिंह, प्रवक्ता- सिंचाई विभाग
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