रोहतक। कांग्रेस और जजपा के बाद इनेलो ने भी जाट समुदाय से बहादुरगढ़ के पूर्व सैनिक धर्मबीर फौजी पर दांव लगाया है। हनुमान जयंती पर शुक्रवार को मंदिर में पूजा कर रहे फौजी के पास सवा चार बजे पार्टी नेता अभय चौटाला का फोन आया और रोहतक लोकसभा से चुनाव लड़ने की सूचना दी। फौजी मूलरूप से रोहतक जिले के गांव रिटौली के रहने वाले हैं। खास बात यह कि उन्होंने अभी तक पंच का चुनाव भी नहीं लड़ा है। हालांकि उनके बड़े भाई कर्मबीर उर्फ लीला गांव रिटौली में पंच रह चुके हैं।
रिटायरमेंट लेकर सीधे पहुंचे थे पार्टी ज्वाइन करने
फौजी ने बताया कि 1983 में सेना में सिपाही के तौर पर भर्ती हुआ था। सिविल कोर के अंदर कई बार ताऊ देवीलाल के बारे में जिक्र सुना था। 1989 में ताऊ देश के उप प्रधानमंत्री के पद तक पहुंच गए थे। 1991 में बोर्ड आउट रिटायरमेंट ले ली थी। घर पहुंचने से पहले सीधा उस समय के बहादुरगढ़ हलके के प्रभारी पार्टी नेता कप्तान चेतराम के पास पहुंचे और पार्टी ज्वाइन कर ली। वह लगातार 28 साल से पार्टी से जुड़े हैं। बकौल फौजी पार्टी से कोई टिकट नहीं मांगा था। पार्टी ने जो फैसला लिया है, उसे मानते हुए डटकर चुनाव लड़ूंगा। रोहतक व झज्जर जिले के अलावा कोसली हलके में सैनिक परिवारों की संख्या काफी ज्यादा है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव में चौंकाने वाले परिणाम आएंगे।
पूर्व सैनिक के वोट बैंक को ध्यान में रखकर उतारा मैदान में
इनेलो की तरफ से रोहतक जिला अध्यक्ष सतीश नांदल व उनके बेटे संचित नांदल, पूर्व विधायक नफे सिंह राठी, पार्टी नेता रमेश दलाल व सौरभ फरमाणा में से एक का टिकट पक्का माना जा रहा था, लेकिन पार्टी ने सबको चौंकाते हुए पुराने कार्यकर्ता धर्मबीर फौजी को मैदान में उतारा है। पार्टी की सोच है कि रोहतक व झज्जर जिले के साथ कोसली हलके में सैनिक परिवार बहुत ज्यादा हैं। उनको ध्यान में रखने के साथ ही प्रदेश के सैनिक परिवारों को संदेश देने के लिए पार्टी ने रोहतक के साथ-साथ भिवानी से भी पूर्व सैनिक को टिकट दिया है।