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कोर्ट के नए चैंबरों पर गिराए जाने का खतरा

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विकास सैनी
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रोहतक। पिछले करीब पांच साल से निर्माणाधीन चेंबरों के लिए चल रही जिला बार एसोसिएशन की राजनीति और गर्मा गई है। कोर्ट परिसर में करीब नौ करोड़ की लागत से तैयार 272 चेंबरों को नगर निगम कभी भी गिरा सकता है। इसमें इसकी वजह चेंबरों का अनाधिकृत रूप से बनाया जाना है। यहां सुरक्षा मानकों का ध्यान नहीं रखा गया। इस संबंध में नगर निगम ने जिला उपायुक्त व पीडब्ल्यूडी के एसई को पत्र जारी किया है। वहीं जांच कमेटी ने अपनी पड़ताल में फायर सेफ्टी, बिल्डिंग कोड समेत कई खामियां पाई।

अनुमति बिना 119 की जगह बना दिए 272 चेंबर
जांच कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट काम्प्लेक्स में कोर्ट परिसर में मुख्य प्रवेश द्वार के साथ व डीएलएफ कॉलोनी की ओर पुराने मालखाना की जगह पर वकीलों के चेंबर बनाए जाने थे। इसके लिए तीन मंजिला भवन में 119 चेंबर बनने थे। इसमें डीएलएफ कॉलोनी की ओर 80 व प्रवेश द्वार की ओर 39 चेंबर बनाए जाने थे। जबकि कुल 272 चेंबर वह भी पांच मंजिला भवन में बनाए गए। इसमें डीएलएफ कॉलोनी की ओर पांच मंजिला भवन में 192 व प्रवेश द्वार की ओर 80 चेंबर बनाए गए हैं। इसके लिए किसी तरह की अनुमति नहीं ली गई है।
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6 सदस्यीय कमेटी ने की चेंबरों की जांच
चेंबरों की जांच के लिए ज्वाइंट इंस्पेक्शन कमेटी बनाई गई। इसका चेयरमैन पीडब्ल्यूडी के एग्जिक्यूटिव इंजीनियर सुनील सचदेवा रहे। नगर निगम कार्यकारी अधिकारी अभय सिंह, दमकल विभाग से टीआर पालीवाल, पीडब्ल्यूडी एसडीई बलबीर सिंह, नगर निगम एटीपी तिलक राज, दमकल विभाग से एलएफएम संजीव डागर, जेई सुरेश कुमार सदस्य के तौर पर टीम में शामिल रहे।

15 मीटर से ऊंचे हैं भवन
नेशनल बिल्डिंग कोड पार्ट चार के तहत चेंबर भवन की ऊंचाई 15 मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। जांच में यह ऊंचाई 15 मीटर से अधिक पाई गई है। भवन में आगजनी की स्थिति में बचाव कार्य को देखते हुए दमकल वाहन के लिए छह मीटर चौड़ा रास्ता होना जरूरी है। यह जगह भवन के आसपास नहीं छोड़ी गई है। यही नहीं चेंबरों की खिड़की डीएलएफ कॉलोनी के पड़ोस के घरों में खोली गई है।

मिट्टी जांच कराई न डिजाइन पास कराया
वकीलों के चेंबर निर्माण से पहले निर्माण स्थल की सबसे जरूरी मिट्टी जांच करानी थी। यह जांच नहीं कराई गई। इसके अलावा एक्सपर्ट से निर्माण का डिजाइन भी पास नहीं कराया गया। बिल्डिंग कोड के तहत किसी कंपनी या संस्था से भी जांच की पुष्टि नहीं कराई गई। निर्माण कार्य अलाट करने का टेंडर जारी नहीं किया गया।

कोर्ट परिसर में कई वर्षों से बनी है चेंबरों की मांग
कोर्ट परिसर में वकालत करने वाले वकीलों में चेंबरों की मांग पिछले कई साल से बनी हुई है। वकीलों की हर साल बढ़ी आबादी के चलते ऐसा हो रहा है। वर्तमान में जिला बार एसोसिएशन के करीब 2500 पंजीकृत सदस्य हैं। जबकि करीब एक हजार से अधिक गैर पंजीकृत सदस्य हैं। इनके बैठने के लिए चेंबर गिनती के हैं। वकीलों की चेंबर की समस्या कब दूर होगी, कोई नहीं जानता। फिलहाल वे नए चेंबरों की अलाटमेंट का इंतजार कर रहे हैं। जबकि इनके गिराए जाने का खतरा बना हुआ है।

वकीलों ने अपनी जेब से खर्चे रुपये
चेंबर निर्माण के लिए वकीलों ने अपनी जेब से रुपये खर्चे हैं। पुराने वकीलों ने चेंबरों के लिए रुपये पहले ही एसोसिएशन पदाधिकारियों को जमा करा दिए थे। चेंबर निर्माण पर करीब नौ करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है। ऐसे में यदि ये चेंबर गिराए जाते हैं तो भारी नुकसान होगा। यही नहीं चेंबरों के लिए रुपये एडवांस देने वालों को कौन और कैसे भुगतान करेगा, यह भी बड़ा सवाल बन कर उभर आया है।

वर्जन
अवैध तरीके से कराया गया चेंबरों का निर्माण
कोर्ट परिसर में नियमों के खिलाफ जाकर अवैध चेंबरों का निर्माण कराया गया है। चेंबरों की संख्या भी मनमर्जी से बढ़ाई है। अब प्रशासन इन्हें गिराने जा रहा है। इससे आर्थिक नुकसान होगा। चेंबर बनवाने वाले प्रधान व अन्य पदाधिकारी इस नुकसान की भरपाई करें।
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अधिवक्ता उमेश भारद्वाज, पूर्व प्रधान, जिला बार एसोसिएशन।

वर्जन :
चेंबर मेरे कार्यकाल में नहीं बने। ये पहले से तैयार थे। इन्हें चेंबर कमेटी को हेंड ओवर किया गया है। चेंबर अनाधिकृत हैं या इन्हें गिराया जाएगा, इस संबंध में मुझे कोई नोटिस या पत्र नहीं मिला है। वैसे भी कोर्ट निगम के दायरे में नहीं आता है।
अधिवक्ता लोकेंद्र फौगाट, प्रधान, जिला बार एसोसिएशन।

वर्जन :
कोर्ट चेंबरों के बारे में सुना है। इस संबंध में कोई पत्र मिलने की जानकारी नहीं है। नगर निगम प्रशासन ही इस संबंध में कुछ कह सकता है।
डॉ. यश गर्ग, जिला उपायुक्त।
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