डबल टैक्सेशन रोकने के नियम को हथियार बनाकर की जीएसटी की चोरी
-बगैर कारोबार महज फर्जी बिल बनाकर फेक कंपनियां जीएसटी विभाग को लगा रहीं चूना
कुशाग्र मिश्रा
रोहतक। गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) को देश में लागू करने का मुख्य उद्देश्य है कि जनता को टैक्स पर भी टैक्स का भुगतान नहीं करना पड़े। मकसद है कि कच्चे माल की खरीद से लेकर उत्पाद के तैयार होने और उसके उपभोग तक सिर्फ एक ही बार टैक्स लगे। यानी डबल टैक्सेशन नहीं हो और वस्तुओं की कीमत कम रहे। डबल टैक्सेशन को रोकने के इसी नियम को ही हथियार बनाकर सरकार को चूना लगाया जा रहा है। कच्चे माल की खरीद के लिए फर्जी बिल तैयार किए जा रहे हैं, जिस पर बनने वाले टैक्स को तैयार मॉल पर बनने वाले टैक्स से कम कर सरकार को जीएसटी का चूना लगाया जा रहा है। ऐसी कंपनियों को खोजकर उन पर कार्रवाई करना जीएसटी विभाग के लिए एक नई चुनौती बनकर सामने आ गया है।
यह है डबल टैक्सेशन रोकने का नियम
डबल टैक्सेशन को रोकने के लिए नियम है कि कच्चे माल की खरीद पर जितना भी जीएसटी बनता है, वह कच्चे माल को खरीदने वाली कंपनी के खाते में क्रेडिट (जमा) हो जाता है। अब कच्चा मॉल खरीदने वाली कंपनी उत्पाद तैयार करेगी और इस उत्पाद को बेचने पर बनने वाले जीएसटी में से खाते में क्रेडिट जीएसटी की रकम को घटा देगी। जिससे उपभोक्ता तक इस्तेमाल के लिए पहुंचने वाले तैयार उत्पाद पर डबल टैक्स नहीं लगेगा।
फर्जी कंपनियां किस तरह से सरकार को करोड़ों का चूना लगा रहीं हैं
फर्जी पते पर एक फर्जी कंपनी बनाई जाती है। मान लेने हैं इस कंपनी का नाम है ‘एबीसी’। एबीसी का कच्चे माल की खरीद फरोख्त से कोई लेनादेना नहीं है। एक अन्य कंपनी माल लेती है, जिसका नाम है ‘डीईएफ’। डीईएफ कच्चे माल से उत्पाद तैयार करती है। जीएसटी की चोरी के लिए कंपनी डीईएफ 10 करोड़ रुपये के कच्चे माल को एबीसी से खरीदना दिखाती है। एबीसी से 10 करोड़ के माल की खरीद का एक फर्जी बिल भी ले लिया जाता है। अब न तो एबीसी ने कच्चा माल बेचा और न ही डीईएफ ने कोई माल खरीदा, लेकिन 10 करोड़ रुपये का बिल खातों में आ गया। मान लिया कि कच्चे माल की खरीद पर 12 फीसदी का जीएसटी लगता है। ऐसे में 1.20 करोड़ रुपये का जीएसटी कागजों में क्रेडिट हो गया। इसके बाद डीईएफ ने कहीं और से कम कीमत पर लिए गए कच्चे माल से अपना उत्पाद तैयार किया और इस तैयार माल पर जीएसटी की दर लगती है 12 फीसदी और तैयार कच्चे माल से तैयार उत्पाद की कीमत हो गई 12 करोड़ रुपये। इस तरह तैयार माल पर जीएसटी बना 1.44 करोड़ रुपये। डबल टैक्सेशन को खत्म करने के लिए डीईएफ तैयार उत्पाद पर लगने वाले जीएसटी में से कच्चे माल वाले जीएसटी को घटाएगा और बाकी रकम जीएसटी विभाग को भुगतान करेगा। यानि 24 लाख रुपये जीएसटी बना। इस तरह से डीईएफ ने 96 लाख रुपये के टैक्स की चोरी कर ली।
बोले अधिकारी
जीएसटी रोहतक आयुक्तालय के आयुक्त विजय मोहन जैन ने बताया कि फर्जी बिल बनाकर टैक्स चोरी का केस पकड़ा गया है। जिन पर कार्रवाई की गई। इसके साथ ही अधिकारी अन्य कंपनियों पर निगाह बनाए हुए है। राजस्व की चोरी करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई की जाएगी।