एचआईवी मरीज होना भी बन गया मां-बेटी के लिए गुनाह
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक/सोनीपत। पीजीआई के डॉक्टरों की एचआईवी के मरीजों के प्रति संवेदनाएं मर गई हैं। यहां एचआईवी रियेक्टिव मां-बेटी तकरीबन सप्ताह भर से धक्के खा रही थीं, लेकिन उन्हें उपचार के लिए दाखिल करने वाला कोई नहीं था। जब मामला सीडब्ल्यूसी के पास पहुंचा तो महिला को उपचार के लिए दाखिल किया गया।
सोनीपत निवासी महिला व उसकी दो बेटियां एचआईवी पॉजिटिव हैं। स्वयं महिला और उसकी पांच साल की बेटी एचआईवी रिएक्टिव है, जबकि उसकी दो साल की दूसरी बेटी एचआईवी पॉजिटिव है। महिला का एचआईवी पॉजिटिव पति लगभग एक सप्ताह पहले उपचार के दौरान पीजीआईएमएस में दम तोड़ चुका है। महिला की आर्थिक स्थिति सही नहीं थी, इसलिए अस्पताल से ही कुछ लोगों ने रुपये एकत्रित कर महिला के पति का शव सोनीपत ले जाने के लिए एम्बुलेंस करवाई। महिला सोनीपत से वापस उसी एम्बुलेंस में अपनी बेटियों के साथ रोहतक आ गई, लेकिन उसकी मुसीबत उस समय बढ़ गई जब डॉक्टरों ने उसे संस्थान में दाखिल ही नहीं किया। महिला उपचार के लिए आपात विभाग के बाहर चक्कर काटती रही, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की। जब इस बात की सूचना बाल कल्याण समिति को मिली तो उन्होंने संज्ञान लिया और प्रशासन से बात कर मरीजों को उपचार के लिए भर्ती करवाया।
बोले अधिकारी
सोनीपत की महिला के साथ उसकी दो बेटियां भी एचआईवी पॉजिटिव हैं। इसमें मां और बड़ी बेटी को समस्या अधिक है। इनका एचआईवी वायरस रियेक्टिव है, इसके चलते समस्या हो रही है। फिलहाल पीजीआईएमएस में आपात विभाग के सीएमओ को कह कर महिला को दाखिल कराया गया है और पुलिस को कहा गया है कि वह दोनों बच्चियों को रेस्क्यू करे। महिला के साथ महिला पुलिस जवान को तैनात कराया गया है। महिला के साथ दोनों बच्चियों की अनदेखी करने के मामले में संस्थान को नोटिस भेज कर कारण पूछेंगे।
-डॉ. राज सिंह सांगवान, चेयरमैन, बाल कल्याण समिति