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लाखनमाजरा व महम ड्रेन की नहीं हुई सफाई,न हुआ लेवल सही

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लाखनमाजरा और महम ड्रेन की नहीं हुई सफाई, न हुआ लेवल सही
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नांदल से शुरू होकर गिरावड़ तक और बैंसी से बलंबा तक हर साल सैकड़ों एकड़ में खड़ा होता है पानी

- पानी की कमी से सूख जाती हैं फसलें, फिर पानी से ही बर्बाद हो जाती हैं किसानों की मेहनत

कृष्ण सिवाच
लाखनमाजरा।
नहर व ड्रेन किसानों की खुशहाली के लिए निकाली जाती हैं। सूखी फसलों की प्यास बुझाने के लिए नहरों का निर्माण किया जाता है। सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर ड्रेनों का निर्माण कराती है। लेकिन न ही नहरों से किसानों की फसलों की ठीक से प्यास बुझती है और ना ही ड्रेनें फसलों को पानी की मार से बचा पाती है।
क्षेत्रीय किसानों के अनुसार नहरों में पानी नहीं आता और आता है तो समय पर नहीं आता। चालीस-बयालीस दिन बाद पानी आने के कारण किसानों की फसलें सूख जाती हैं। फसलों में पानी भरने से बचाने के लिए निकाली गई ड्रेन ही किसानों की बर्बादी का मुख्य कारण बनती हैं।
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महम चौबीसी क्षेत्र में दो ड्रेनें हैं महम व लाखनमाजरा ड्रेन के नाम से क्षेत्र दो ड्रेनें होकर गुजरती हैं। जहां जहां से निकलती हैं। वहां वहां से फसलों से पानी निकाल कर ड्रेनों में डाला जाना चाहिए लेकिन होता उल्टा है। बारिश के समय ड्रेनें ओवरफ्लो हो जाती हैं और ड्रेनों का पानी ही फसलों को नष्ट कर देता है। यह हर साल की समस्या है।
किसानों ने बताया कि सफाई के नाम हर साल लाखों खर्च होते हैं लेकिन फायदा कितना हो रहा है ये अलग बात है। हर साल लगता है कि कागजों में ड्रेनों की सफाई होती है। हर साल हाईवे के पुल व अन्य सड़कों के पास से ही सफाई कर खानापूर्ति कर दी जाती है।

हर साल नांदल में होती है बर्बादी
नांदल निवासी सुंदर ने बताया कि हर साल लाखनमाजरा ड्रेन धनाना गांव से होकर निकलने के बाद नांदल गांव के किसानों की फसलों को बर्बाद कर देती है। नांदल गांव के पास से ड्रेन के किनारे बिल्कुल ही खत्म हैं। हर साल ड्रेन भरने की वजह से किनारों से पानी फसलों में उतरता है। किनारों को दुरुस्त करने की मांग नांदल वासी हर साल करते हैं, लेकिन प्रशासन बारिश के मौसम में फसलें बर्बाद होने पर जागता है।

न कभी सफाई हुई, न हुई जांच
नांदल निवासी भूपेंद्र सिंह ने कहा कि प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना होना कोई एक दो साल की बात तो है नहीं। यह तो हर साल होती है। लेकिन किसी अधिकारी या कर्मचारी पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती। ड्रेन के किनारे नही हैं खेतों में पानी भर जाता है। किसानों को अपने स्तर पर खर्चा कर पंप लगाकर फसलों से पानी निकालना पड़ता है। इतना ही नहीं कई बार तो बरसात अधिक होने पर तो पानी गांव के घरों में घुस जाता है।

किसानों के लिए जी का जंजाल बनती है ड्रेन
किसान सुनील ने कहा कि किसान के भले के लिए निकाली गई ड्रेन ही किसानों के जी का जंजाल बनी हुई है। नहरों में पानी आए तो खुशी, ड्रेन में आए तो खुशी। फसलों को पानी मिलेगा। लेकिन जब समय पर नहरों में पानी नहीं आता और असमय ड्रेनों में आया पानी फसलों को बर्बाद कर देता है। उसके बाद प्रशासन सफाई अभियान चलाता है।

गिरावड़ के पास ड्रेन बन जाती है तालाब
रामकुवार ने कहा कि हमने तो कभी देखा नहीं ड्रेन की सफाई होती है। कभी भूल कर कोई मशीन आ भी गई ड्रेन पर तो समय पूरा कर चली जाती है। बगैर सफाई किए ही अधिकारी ओके रिपोर्ट दे देते हैं फिर क्यों सफाई करेंगे। डीजल भी बच गया। दिहाड़ी भी पूरी हो गई। लाखनमाजरा ड्रेन का गिरावड़ गांव के पास तो लेवल बिल्कुल ही खराब है। ड्रेन वहां तालाब का रूप धारण कर लेती है और हर साल सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हो जाती है।

हर साल होती हैं सफाई की बात
सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि हर साल फसल बर्बाद होते देखी नहीं जाती। ड्रेन की सफाई करवाने के लिए कहीं कोई मांग करने से तो अच्छा है दो कस्सी अपने आप ही किनारे पर मार दो और अपने खेत को बचा लो। किसे कहेें सब एक हैं। कोई एक साल की बात हो तो अलग है यह तो हर साल की यही कहानी है। हर साल कागज काले करो और पैसा सफेद करो।

किसानों के सामने भूखा मरने की नौबत
कर्मवीर सिंह का कहना है कि भूखा मरने की नौबत आ खड़ी हुई है ड्रेन की वजह से। किनारों से पानी उतर कर फसलों को बर्बाद कर देता है। अब फसलों की बिजाई करें या न करें इसी बारे में सोच रहे हैं। जब फसलों को पानी जरूरत होती है उस समय ड्रेन से पानी उठा कर फसलों की सिंचाई कुछ किसान करते हैं। लेकिन बारिश के दिनों में नुकसान ज्यादा लोग झेलते हैं।
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सफाई हुई या नहीं रिपोर्ट तैयार कर भेजी जाएगी जिला उपायुक्त के पास
महम के एसडीएम दलबीर सिंह फौगाट ने बताया कि महम हलके के अंतर्गत दो ड्रेनें हैं महम और लाखनमाजरा। जिला उपायुक्त के आदेशानुसार इनकी सफाई की गई है। लेकिन सूचना मिली है कि सड़कों के पुलों के पास ही सफाई की गई है। इसके अलावा कहीं कहीं सफाई हुई। जिसकी जांच करवाई जाएगी। और सिंचाई विभाग या दूसरे संबधित अधिकारियों से बात कर समस्या के समाधान के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। वहीं नायब तहसीलदार से इसकी रिपोर्ट लेकर जिला उपायुक्त के पास भेज दी जाएगी।


फोटो नंबर:1 ड्रेन में खड़ी जलखुम्भी।
फोटो: सुनील किसान।
फोटो:रामकुवार किसान।
फोटो:सुरेन्द्र किसान।
फोटो:कर्मवीर सिंह किसान।
फोटो:सुंदर किसान नान्दल।
फोटो:भुपेन्द्र सिंह किसान।
फोटो:दलबी सिंह फौगाट-एसडीएम महम।
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