छह हाउस सर्जनों ने नौकरी छोड़ने की रखी बात तो वरिष्ठ चिकित्सक बोले, ड्यूटी सही नहीं कर रहे थे इसलिए डांटा
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पीजीआईएमएस के आपात कालीन विभाग में वीरवार को सीनियर व जूनियर डॉक्टरों में बवाल मच गया। छह हाउस सर्जनों ने एक साथ अधिकारी की शिकायत करते हुए नौकरी छोड़ने तक का एलान कर दिया। इस पर अधिकारी ने स्पष्ट कहा कि यदि ड्यूटी सही नहीं की जाएगी तो डांटा भी जाएगा और जरूरत पड़ेगी तो सख्ती भी होगी।
सूत्रों की मानें तो वीरवार को आपातकालीन विभाग के प्रभारी डॉ. ध्रूव चौधरी और हाउस सर्जनों के बीच कहासुनी हो गई। निर्देशों के बाद जब हाउस सर्जन डॉक्टरों के साथ काम करते नहीं मिले तो उन्होंने हाउस सर्जनों की क्लास लगा दी। बताया जा रहा है कि एक महिला पीजी डॉक्टर ने अपनी लिखित शिकायत में कहा है कि अधिकारी ने उनको संस्थान से बाहर करने तक की धमकी दे दी। इसके विरोध में विभाग में तैनात छह हाउस सर्जनों ने चिकित्सा अधीक्षक को लिखित में शिकायत दी है। सभी ने पत्र में लिखा है कि वह इन परिस्थितियों में काम नहीं कर सकते। वहीं डॉ. ध्रूव चौधरी की मानें तो मामले को बेवजह तूल बनाया जा रहा है। हाउस सर्जन का सीएमओ के पास बैठने का क्या मतलब है, वह बाहर डॉक्टरों के साथ काम क्यों नहीं करते। वह किसी पीजी डॉक्टर के दुश्मन नहीं हैं, वह उनके बच्चों की तरह हैं। लेकिन मरीजों की देखभाल भी हाउस सर्जन के लिए जरूरी है। यदि कोई काम नहीं करेगा तो उसे डांटा भी जाएगा और जरूरत पड़ती है तो अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। इस संबंध में पहले भी लिखित में कहा जा चुका है। वहीं आपात विभाग के स्टाफ की मानें तो उनके पास तीन सीएमओ और छह हाउस सर्जन हैं। ऐसे में काम करना मुश्किल हो रहा है। हाउस सर्जनों ने आपत्ति जताई है कि उन्हें मरीजों और उनके अभिभावकों के आगे हड़काया गया है, यह गलत है।