एमए-2
महिला एसएचओ गरिमा ।
एमए-3
एसपी जश्नदीप सिंह रंधावा
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दो साल में महिला थाने 2128 घर बसाकर बनाया रिकॉर्ड, 408 मामलों में हुआ केस दर्ज
- एसपी बोले- दंपतियों के बीच सुलह कराने में अहम भूमिका निभाने वाले पुलिसकर्मियों को किया जाएगा सम्मानित
- अधिकतर मामले दहेज उत्पीड़न व घरेलू हिंसा के, महिला एसएचओ का भी कई मामलों में समझौता कराने में रहा योगदान
महबूब अली
रोहतक।
भले ही आए दिन महिला उत्पीड़न के मामले सामने आ रहे हो मगर महिला थाना पुलिस ने दो साल में थाने पर पहुंचे 2388 में से 2128 में सुलह कराकर रिकॉर्ड कायम किया है। जबकि समझौता न होने पर 408 केसों में मुकदमा दर्ज कराया गया है। एसपी ने दंपतियों के बीच सुलह में अहम भूमिका निभाने वाले पुलिसकर्मियों को सम्मानित करने की बात कही है।
पिछले कुछ समय से देखने में आ रहा है कि महिला उत्पीड़न से लेकर घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न के मामले बढ़े हैं। इस तरह के मामलों में महिला थाना पुलिस पहले समझौते का प्रयास करती है। समझौता न होने पर ही केस दर्ज किया जाता है।
महिला एसएचओ गरिमा ने बताया कि वर्ष 2017 में महिला थाने पर घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, छेड़छाड़ से संबंधित कुल 1930 मामले सामने आए थे, जिनमें से 1720 में समझौता करा दिया गया। जबकि 210 में केस दर्ज किया गया। इसी तरह वर्ष 2018 में 458 मामले सामने आए थे, जिनमें से 408 में सुलह कराई जा चुकी है। 50 में केस दर्ज किया गया है। महिला थाना एसएचओ का कहना है कि इस बार सुलह कराने में महिला थाना पुलिस ने रिकॉर्ड कायम किया है। जबकि वर्ष 2016 और 2015 में 1500 के बीच ही सुलह हो सकी थी। यहीं नहीं इस बार अधिक समझौते के कारण केस भी सिर्फ 408 ही दर्ज किए गए है। महिला थानाध्यक्ष का खुद सुलह कराने में अहम योगदान रहा है। एसपी जश्न दीप सिंह रंधावा का कहना है कि दंपतियों के बीच सुलह कराने में अहम भूमिका निभाने वाली पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया जाएगा।
सबसे अधिक मामले घरेलू हिंसा के
महिला थाना एसएचओ गरिमा का कहना है कि सबसे अधिक मामले घरेलू हिंसा के सामने आ रहे है। जांच में पाया जाता है 70 प्रतिशत शिकायतें जांच में झूठी पाई जाती है। या फिर सास, पति से मामूली सी तकरार पर विवाहिताएं गंभीर आरोप लगा देती है। पुलिस का प्रयास रहता है कि मामलों में सुलह कराई जाए।
जांच पड़ताल के बाद ही की जाती है कार्रवाई
महिला उत्पीड़न से संबंधित मामलों में पुलिस जांच पड़ताल के बाद ही कार्रवाई करती है। एसपी का कहना है कि कई बार रंजिश में भी झूठे आरोप लगा दिए जाते है। मगर पुलिस का प्रयास निष्पक्ष जांच कर कार्रव्राइ करने का होता है।
फैक्ट फाइल
वर्ष समझौता केस दर्ज
2017 व 18 2128 408
2016 व 15 1500 600
2014-13 1400 500
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आंकड़ा महिला थाने से लिया गया है।