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कैंटोनमेंट बोर्ड मीटिंग में पार्षदों और सेना के बीच ठनी, कई मुद्दे लटके

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कैंटोनमेंट बोर्ड मीटिंग में पार्षदों और सेना के बीच ठनी, कई मुद्दे लटके
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अंबाला कैंट। लगभग दो महीने बाद हुई कैंटोनमेंट बोर्ड की मीटिंग में सेना और पार्षदों के बीच कई मुद्दों पर ठन गई। इस वजह से दोपहर सवा एक बजे शुरू हुई मीटिंग तकरीबन साढ़े तीन बजे तक खिंच गई। मीटिंग में बोर्ड के प्रेसिडेंट ब्रिगेडियर एसएस सिद्धू ने शपथ लेकर बोर्ड के नए प्रेसिडेंट का पदभार संभाला लिया। मीटिंग का संचालन सीईओ वरूण कालिया ने किया।
बैठक में बोर्ड पार्षदों द्वारा सेना की कार्यशैली पर पूर्व में कई सवाल उठाए गए थे और सेना द्वारा सुरक्षा का हवाला देकर रोड डायवर्ट करने के मामले का विरोध जताया था। अब सदन में इस विरोध का असर देखने को मिला और सेना अधिकारियों ने कई ऐसे कामों में अडंगा लगाने का प्रयास किया है जो लगभग फाइनल स्टेज पर हैं। इस दौरान वाइस प्रेसिडेंट अजय बवेजा, पार्षद आशीमा, लक्ष्मी देवी, राजू बाली, सुरेंद्र तिवारी, वीरेंद्र गांधी व अन्य मौजूद रहे।
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मीटिंग में हुई 40 बिंदुओं पर चर्चा
तकरीबन दो महीनों के अंतराल के बाद हुई कैंटोनमेंट बोर्ड की मीटिंग में 40 बिंदुओं पर चर्चा हुई जिसमें टेंडर और विकास कार्यों आदि का ब्यौरा पेश किया गया। यहां पर बोर्ड द्वारा आगामी समय में करवाए जाने वाले कामों का भी लेखा जोखा प्रस्तुत किया गया। मीटिंग की शुरूआत में सीईओ वरूण कालिया ने जानकारी दी कि कैंटोनमेंट बोर्ड क्षेत्र खुले में शौचमुक्त हो चुका है। इसके अलावा छावनी बोर्ड के अधीन आने वाले स्कूलों में स्वच्छ पुरस्कार के आयोजन को अनुमोदित करने का प्रस्ताव लाया गया।
तीन साल की बजाए हर साल विज्ञापन के टेंडर की सलाह
बोर्ड के क्षेत्र में लगे 14 यूनिपोलों पर विज्ञापन का ठेका दिए जाने के मामले में सदन पहली बार पेंच फंस गया। सीईओ ने बताया कि तकरीबन 25 हजार रुपये प्रति यूनिपोल का ठेका तीन सालों के लिए दिया जा सकता है, इस पर वार्ड नंबर पांच के पार्षद सुरेंद्र तिवारी ने आपत्ति जताई जिन्हें सेना के अधिकारियों का भी समर्थन मिला। इस टेंडर प्रक्रिया को हर साल लिए जाने की सलाह दी गई।
तिवारी और सीईओ में हुई नोकझोंक
हर बार की तरह इस बार भी पार्षद सुरेंद्र तिवारी और सीईओ के वैचारिक मतभेद सदन में आपस में टकरा गए। रात को स्वीपिंग मशीन का प्रस्ताव रखने पर तिवारी ने बोर्ड के सदस्यों को एक बार प्रत्यक्ष तौर पर मशीन की कार्य प्रणाली देखने की सलाह दी। इस पर मामला गरमा गया। बात बढ़ते बढ़ते सीईओ और तिवारी की नोकझोंक में तबदील हो गई। दोनों ने एक दूसरे के कामों पर प्रश्रचिन्ह लगाते हुए अपनी जानकारी दुरूस्त करने की सलाह भी दे डाली जिससे कुछ देर के लिए सदन में बहस का माहौल हो गया। वहीं कई मुद्दों पर उपाध्यक्ष अजय बवेजा और सुरेंद्र तिवारी की राय एक दूसरे से अलग रही।
सेना अधिकारियों ने कई मामलों में लगाया अडंगा
पार्षदों द्वारा सैन्य क्षेत्र में किचनर रोड डायवर्ट करने व डिफेंस कालोनी रोड पर लगाए जाने वाले प्रस्तावित गेट के विरोध करने का असर सदन में नजर आया। सेना के कार्यों का पार्षदों ने विरोध किया जिस वजह से सदन में सैन्य अधिकारियों ने पंजोखरा रोड, साइकलिंग ट्रैक व अन्य मामलों पर तकनीकी और सुरक्षा खामियों का हवाला देकर इन मामलों पर विचार करने की बात कहकर इसे टाल दिया। जिस बात से कहीं न कहीं सीईओ और पार्षद असहमत दिखाई दिए।
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बोर्ड के नए पार्षद को अगली मीटिंग तक करना होगा इंतजार
कैंटोनमेंट बोर्ड की वार्ड नंबर सात से 21 जनवरी को चुने गए नए पार्षद सन्नी कुमार इस मीटिंग का हिस्सा नहीं बन सके। बोर्ड के उपाध्यक्ष अजय बवेजा ने बताया कि सन्नी के चुनाव के बाद बोर्ड की ओर से रक्षा मंत्रालय को सूचित कर दिया गया है। रक्षा मंत्रालय की ओर से गजट नोटिफिकेशन हो जाने के बाद वह सदन की कार्रवाई में भाग ले सकेंगे।
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