220 में से 40 स्कूल बस चालकों के पास नहीं मिला वैध लाइसेंस
- अदालत के निर्देशों के बाद भी स्कूली वाहनों की कमियां दूर नहीं कर पा रहे हैं निजी स्कूल संचालक
- बुधवार को आरटीए कार्यालय में बुलाए गई आठ निजी स्कूलों की 240 में से 220 में ही जांच के लिए पहुंची, 15 चालक बगैर वर्दी मिले
- आरटीए कार्यालय की 23 सदस्यीय टीम को जांच में 99 वाहनों में नहीं मिला जीपीएस सिस्टम, 15 वाहनों पर नहीं लगाई गई रिफ्लेक्टर टेप
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक
निजी स्कूल संचालकों की लापरवाही नौनिहालों पर भारी पड़ सकती है। इसकी वजह स्कूल बस चालकों के पास हैवी ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होना है। स्कूल संचालकों ने यह जानकारी होने के बावजूद बसों का स्टेयरिंग व मासूम बच्चों की जान अनट्रेंड चालकों के हाथ सौंपी हुई है। यह हम नहीं, आरटीए कार्यालय की रिपोर्ट बता रही है। बुधवार को 220 बसों की जांच के बाद तैयार हुई रिपोर्ट में 40 चालकों के पास हैवी ड्राइविंग लाइसेंस ही नहीं मिला। यही नहीं 99 बसों में जीपीएस सिस्टम, 15 में रिफ्लेक्टर टेप, 15 में चालक के पास वर्दी नहीं मिली।
दरअसल, बुधवार को प्रशासन ने कोर्ट के निर्देशानुसार, निजी स्कूलों की बसों को जांच के लिए आरटीए कार्यालय बुलाया था। यहां आठ स्कूलों की 240 बसें आनी थी। जबकि 220 बसें ही वहां पहुंची। इन बसों की नियमानुसार पड़ताल के लिए 23 सदस्यों की ड्यूटी लगाई गई। इस टीम ने करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद बसों में एक-दो नहीं, ढेरों खामियां निकाली। इन्हें चेतावनी देते हुए कमियां शीघ्र दूर करने के निर्देश दिए गए। यही नहीं प्रशासन इन खामियों को दूर किए जाने की पुष्टि के लिए बसों का औचक निरीक्षण करेगा। हाई कोर्ट से भी एक टीम जांच के लिए पहुंचेगी। इस दौरान कमी मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी है जीपीएस
आरटीए कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक, बसों में अनेक खामियां मिली हैं। इसमें 99 वाहनों में जीपीएस सिस्टम नहीं मिलने की पुष्टि की गई है। जबकि सुरक्षा की दृष्टि से जीपीएस सिस्टम लगाना जरूरी है। गुड़गांव के प्रद्युमभन कांड के बाद यह और जरूरी हो गया है। जीपीएस सिस्टम नहीं होने से विद्यार्थियों की जान का जोखिम हो सकता है।
इन स्कूलों की बुलाई गई बसें
आरटीए विभाग ने बुधवार को आठ स्कूलों की बसें जांच के लिए बुलाई। इनमें मॉडल स्कूल, डीएवी, डीपीएस, पठानिया, डीजीवी, स्कॉलर रोजरी, आईबी, शिक्षा भारती स्कूल शामिल हैं। इस बारे में स्कूल संचालकों को पहले ही सूचित कर दिया गया था।
बगैर वर्दी बस चला रहे चालक
आरटीए विभाग की टीम को ही चालक बगैर वर्दी स्कूल चलाते नहीं मिले। शहर की सड़कों पर भी ज्यादातर बसों के चालक बगैर वर्दी नजर आए। यही नहीं इनके हाथों में सुलगती बीड़ी भी दिखाई दी। इन्हें टोकने पर चालक ने तलब लगने की बात कहते हुए हाथ छिपा लिया।
सीसीटीवी कैमरे लगाने से बच रहे संचालक
निजी स्कूल बसों में सीसीटीवी कैमरे में नहीं लगाए जा रहे हैं। कई स्कूल संचालक इससे बच रहे हैं। जबकि बस में बच्चों की सुरक्षा के लिए यह बेहद जरूरी है। बस में चालक या परिचालक के बच्चों का उत्पीड़न रोकने को लेकर यह निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अलावा बसों में अग्नि शमन उपकरण भी नहीं हैं। ऐसे में आपात स्थिति या आगजनी होने पर बचाव करना मुश्किल होगा।
वर्जन :
निजी स्कूल बसों की जांच की जा रही है। बुधवार को आठ स्कूलों की 240 बसों को बुलाया गया था। इनमें से कई बसों में कमियां मिली हैं। इन्हें दूर करने के निर्देश दे दिए गए हैं। दोबारा जांच में कमी मिलने पर स्कूल व बस चालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- अजय कुमार, अतिरिक्त उपायुक्त एवं आरटीए।