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फ्लैग : जसिया की जाट महारैली : चौटाला व बीरेंद्र सिंह ने एक-दूसरे पर साधा निशाना
हेडिंग : जाट समाज जब धरना दे रहा था, तब कहां थे केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह : अभय चौटाला : कभी राजनैतिक मंच से दूंगा जवाब, अभी लंबी राजनीति करनी अभय को : बीरेंद्र सिंह
: डेढ़ घंटा मंच पर रहे दोनों नेता, नहीं मिलाए एक-दूसरे से हाथ
: जसिया में किया बीरेंद्र सिंह, चौटाला, जगमीत बराड़ व नवीन पिलानिया ने प्रतियोगिता परीक्षा एवं कौशल विकास शिक्षण संस्थान का शिलान्यास
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के घर जसिया में हुई जाट आरक्षण संघर्ष समिति की जाट महारैली में इनेलो नेता अभय चौटाला और केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह डूमरखां न केवल डेढ़ घंटा एक साथ मंच पर रहे, बल्कि जमकर एक-दूसरे पर निशाना भी साधा।
सवा दो बजे पहुंचे इनेलो नेता अभय चौटाला ने 26 मिनट के संबोधन में मंच पर केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह डूमरखां और उनकी पत्नी एवं उचाना से विधायक प्रेम लता और केंद्रीय मंत्री पीपी चौधरी की पत्नी वीणा वाणी की मौजूदगी में 10 बार सीएम मनोहर लाल खट्टर व उनकी सरकार पर निशाना साधा। चौटाला ने कहा कि 2014 में कांग्रेस ने वोट हासिल करने के लिए जाटों समेत पांच जातियों को आधा-अधूरा आरक्षण दिया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया। विधानसभा में जब उन्होंने सीएम मनोहर लाल खट्टर से दोबारा आरक्षण देने की मांग की तो उन्होंने भरोसा दिया कि उनकी पीएम मोदी व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से बात हो गई है। जाटों सहित पांचों जातियों को नए सिरे से आरक्षण देंगे। 15 माह तक सरकार जाट समाज को बरगलाती रही। फरवरी 2016 में कांग्रेस और भाजपा की साजिश से प्रदेश में हिंसा हो गई। चौटाला ने केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह की तरफ इशारा करते हुए कहा कि आप केंद्र में मंत्री हैं। मेरी बात आपके बुरी लग सकती है, लेकिन मैं नहीं जाट समाज व प्रदेश की जनता आप से यह सवाल कर रही है। जब जाट समाज धरनों पर बैठा था, उस समय आप धरनों पर समाज के बीच में क्यों नहीं आए। आज जाट समाज सर छोटूराम की विरासत को संजोने के लिए जसिया में एकत्रित हुआ है, तब आ गए। यहां पर चौटाला ने यह भी कहा कि पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला ने सही मायने में सर छोटूराम की विरासत को संभाल कर रखने का प्रयास किया था। 2000 में चौटाला ही पाकिस्तान से छोटूराम से जुड़ी वस्तुएं लेकर आए थे। उन्हें सांपला स्थित छोटूराम संग्राहलय में रखा गया, लेकिन भाजपा सरकार ने वहां टूरिज्म केंद्र खोल दिया। भाजपा सरकार वहां से टूरिज्म से जुड़ा सामान हटाए, नहीं तो इनेलो समाज के साथ मिलकर हटा देगी। साथ ही अभय चौटाला ने 1 करोड़ रुपये जसिया में बनने वाले दीन बंधु सर छोटूराम प्रतियोगी परीक्षा एवं कौशल विकास शिक्षण संस्थान के लिए देने की घोषणा की।
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चुनाव से पहले एक करोड़ घर से देने हैं : बीरेंद्र सिंह
देरी से जसिया पहुंचे केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने 15 मिनट तक जाट समाज को संबोधित किया। डूमरखां ने कहा कि जाट समाज एक रहेगा तो कोई आगे बढ़ने से नहीं रोक सकता। समाज को छोटूराम, चरण सिंह और ताऊ देवीलाल के पदचिन्हों पर चलना होगा। साथ ही नई सोच पैदा करनी होगी। उन्होंने कहा कि जाट समाज के अंदर 62 प्रतिशत दौलत 10 प्रतिशत लोगों के पास है, उसमें वे खुद और अभय चौटाला भी आते हैं। जबकि 22 प्रतिशत जाट समाज के लोग ऐसे हैं, जिनकी आमदनी हरिजन समाज से भी कम है। इसलिए सोच बदलने की जरूरत है। अब समाज के युवाओं को क्लर्क या ड्राइवर बनने के लिए पढ़ाई नहीं करनी, बल्कि बड़े-बड़े उद्योगपति, बिजनेसमैन व फैक्टरी मालिक बनना है। पंजाब का उदाहरण देते हुए बीरेंद्र सिंह ने कहा कि पंजाब राज्य चाहे गरीब है, लेकिन वहां के लोग अमीर हैं। क्योंकि पंजाब के विदेशों में 25 लाख लोग रह रहे हैं, जो हर माह करोड़ों रुपये पंजाब में भेजते हैं। जाट समाज के लोगों को भी बाहर निकलना होगा। हरियाणा की बेटियां साबित कर चुकी हैं कि वे किसी से कम नहीं हैं। अभय चौटाला को जवाब देते हुए बीरेंद्र सिंह ने कहा कि यशपाल मलिक ने अभय से 51 लाख मांगे थे, लेकिन उन्होंने 1 करोड़ दे दिए। अभय के पास गुंजाइश है इतना देने की। मैं लोहे का मंत्री हूं। देश का सबसे बड़ा लुहार। संस्थान के निर्माण में जितना लोहा लगेगा, वे अपने पास से देंगे। अभय चौटाला की तरफ इशारा करते हुए बीरेंद्र सिंह ने कहा कि संस्थान को पैसा जल्दी देना होगा। चुनाव तक इंतजार नहीं करना, क्योंकि चुनाव के समय तो पैसा देने वाले बहुत आ जाएंगे। यह पैसा तो घर से देना है। अभय भाई का जज्बा है। वे ऐसा कर सकते हैं। बीरेंद्र सिंह ने जाट नेताओं को चेताया कि वे 36 बिरादरी को साथ लेकर चलें। ऐसा जाट समाज की कर सकता हैं, क्योंकि जाट खुले मन का होता है। हम ऐसा करके दिखाएंगे। 35 बिरादरी की बात करने वालों को ध्यान रखना होगा, जाट बिरादरी बिना कोई नहीं चल सकता। साथ ही उन्होंने यशपाल मलिक को सलाह दी कि एक साल के अंदर 36 बिरादरी को एकजुट कर लें। इसके बाद जाट नेताओं ने
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हुड्डा को भी आना चाहिए था : बराड़
वहीं, पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व मौजूदा तृणमूल कांग्रेस नेता जगमीत बराड़ भी जसिया रैली में पहुंचे। बराड़ ने कहा कि पंजाब के घरों में शहीद भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस और सर छोटूराम की प्रतिमा जरूर मिलेगी। क्योंकि छोटूराम ने किसानों के लिए ऐसा काम किया, जो आज तक नहीं किया गया। 2005 से 2009 तक उन्होंने तत्कालीन पीएम मनमोहन को पत्र लिखकर स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की मांग की। अब मौजूदा सरकार से कर रहे हैं, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। उन्होंने कहा कि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा व उनके परिवार को भी आज राजनीति से ऊपर उठकर जाट समाज के मंच पर आना चाहिए था। अगर वे आते तो जाट आरक्षण मिलने से कोई नहीं रोक सकता था।
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दिल्ली, राजस्थान व यूपी से भी पहुंचे जाट नेता
जसिया में जाट महारैली को दिल्ली विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष योगानंद शास्त्री, राजस्थान से विधायक नवीन पिलानिया, जींद से यूपी में सपा नेता संजय लाठर, महिला पहलवान गीता व बबीता के पिता महाबीर फौगाट, यूपी में बुजुर्ग शूटिंग चैम्पियनशिप जीतने वाली प्रकाशी तोमर व सीमा तोमर, सेठ छाज्जूराम के पोत्र एवं पूर्व विधायक पीके चौधरी, इनेलो नेता डाक्टर केसी बांगड़, पूर्व सांसद इंद्रजीत सिंह, राजस्थान से पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह, गुजरात से जाट नेता एनडी चौधरी, पूर्व डीजीपी ओपी मलिक, पूर्व मंत्री वेद सिंह मलिक, पूर्व विधायक बलवंत मायना, अशोक चौधरी, नफे सिंह राठी, डाक्टर रणबीर हुड्डा, सुमन देशवाल, यूके से बालकिशन, कनाड़ा से बलबीर सिंह, दिल्ली से सुभाष चौधरी, मास्टर धर्मपाल पूर्व विधायक, हरपाल राणा, सरदार करनैल सिंह, दर्शन सिंह व यूपी से कारी मोहम्मद बाल्याण भी मंच पर पहुंचे और जाट समाज को अपना समर्थन दिया।
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80 कमरे देने की घोषणा
मंच से अभय चौटाला ने एक करोड़, केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने संस्थान के निर्माण में पूरा लोहा, गुड़गांव से आए जाट नेता मेवा सिंह ने 25 लाख, रामपाल समर्थकों ने 15 लाख, पंजाब से आए जाट नेता जगमीत बराड़ ने 5 लाख, जाट नेता यशपाल मलिक ने एक कमरा व 1 लाख 21 हजार, अशोक बल्हारा, डाक्टर केसी बांगड़, नफेसिंह राठी सहित करीब 80 लोगों ने एक-एक कमरा जसिया में बन रहे दीन बंधु सर छोटूराम प्रतियोगी परीक्षा एवं कौशल विकास संस्थान में देने की घोषणा की। इसमें सबसे ज्यादा सोनीपत जिले के जाट नेताओं की भागीदारी रही। इसके बाद गुड़गांव व झज्जर के जाट नेता आगे रहे। रोहतक के जाट नेताओं की संख्या उम्मीद से कम रही।