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पीजीआईएमएस के डॉक्टरों की निजी अस्पतालों से सांठगांठ पर लगाम नहीं

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प्रकाशित समाचार की फोटो प्रति
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पीजीआईएमएस और निजी अस्पताल मिल कर लूट रहे मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पीजीआईएमएस और निजी अस्पताल मिलकर मरीजों को लूट रहे हैं। इस पर लगाम लगाने की जहमत न तो संस्थान उठा रहा है और न ही स्वास्थ्य विभाग। इसका नतीजा यह हो रहा है कि आए दिन आपातकालीन विभाग से निजी अस्पतालों में मरीजों को भेजा जा रहा है। इसके बाद निजी अस्पताल मरीजों को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
निजी अस्पतालों की पीजीआईएमएस के डॉक्टरों के साथ मिलीभगत कोई नई बात नहीं है। बात यदि आपातकालीन विभाग की करें तो यहां पर आने वाले मरीजों पर अधिकांश निजी अस्पतालों की नजर रहती है। मरीजों को सरकारी संस्थान से निजी अस्पताल तक पहुंचाने के लिए कर्मचारियों से लेकर डॉक्टरों तक का कमीशन सेट है। यही नहीं निजी अस्पतालों ने बाकायदा मरीजों के परिजनों को बरगलाने के लिए अपने दलाल तक परिसर में छोड़ रखे हैं। जैसे ही मरीज बाहर जाने के लिए राजी होता है उसे मौके पर एंबुलेंस तक उपलब्ध करवा दी जाती है। इसके बाद शुरू होता है मरीज की जेब काटने का खेल शुरू। मरीज की जान को लेकर चिंतित परिजन सरकारी और निजी अस्पताल की शिकायत तक नहीं दर्ज करा पाते।
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ऑर्थो विभाग ने किया मरीज को निजी अस्पताल रेफर
पुराना बस स्टैंड निवासी दिनेश के भाई अधिवक्ता राकेश ने बताया कि एक नवंबर को मेडिकल मोड़ पर सड़क दुर्घटना में उनका भाई गंभीर रूप से घायल हो गया था। पुलिस राइडर ने बोहर गांव में चालक को पकड़ लिया और कुछ राहगीर दिनेश को आपातकालीन विभाग में तकरीबन दस बजे दाखिल करा गए। सूचना मिलने पर परिजन भी आपात विभाग में मौके पर पहुंच गए और देर रात तक मरीज को उपचार न दिए जाने पर परेशान हो गए। इसकी शिकायत लेकर वह जब सीएमओ के कक्ष में गए तो वहां कुछ डॉक्टर बैठे थे। इसमें से एक डॉक्टर ने कहा कि अभी डॉक्टर को आने में समय लगेगा। यदि एक दो घंटा डॉक्टर नहीं आते तो मरीज का पैर भी काटना पडे़गा, यदि वह मरीज का पैर बचाना चाहते हैं तो वह निजी अस्पताल ले जाएं। उन्होंने मौके पर ही एक निजी अस्पताल की एंबुलेंस को भी बुलवा दिया। शिकायतकर्ता ने बताया कि मरीज आर्थिक रूप से कमजोर है और वह निजी अस्पताल का अधिक खर्च नहीं उठा पा रहा है। निजी अस्पताल लगातार पेमेंट जमा कराने का उन पर दबाव बना रहा है। उन्होंने इस मामले को लेकर संस्थान के निदेशक डॉ. एमसी गुप्ता से मौखिक रूप से शिकायत भी दी है। शिकायत में कहा गया है कि यदि आपातकालीन विभाग के डॉक्टर उनके मरीज का उपचार करते तो यह स्थिति न होती। सरकारी डॉक्टर मरीज का उपचार करने के लिए हैं या निजी अस्पताल में मरीजों को भेजने के लिए।
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बोले अधिकारी
आपातकालीन विभाग का कोई भी डॉक्टर किसी मरीज को बाहर निजी अस्पताल में नहीं भेज सकता। यदि कोई ऐसा करता है तो वह गलत है। ऐसी बात होने पर मरीज को शिकायत करनी चाहिए, जांच के बाद कार्रवाई होनी तय है।
- डॉ. ध्रुव चौधरी, प्रभारी, आपातकालीन विभाग
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