40 को नियमित आपूर्ति तो 60 फीसदी शहर अब भी परेशान
चरखी दादरी। जन स्वास्थ्य विभाग की अनियमित पेयजल सप्लाई शहरवासियों के लिए गले की फांस बनी हुई है। विभाग फिलहाल आधे शहर में नियमित पेयजल सप्लाई कर रहा है जबकि आधे शहर को 48 घंटे तक का इंतजार करना पड़ रहा है। शहर के दोनों जलघरों से एक समान सप्लाई विभागीय अधिकारी फिलहाल नहीं कर पा रहे हैं। पूरे शहर में एक दिन छोड़कर एक दिन की जा रही पेयजल सप्लाई के मुद्दे को अमर उजाला ने 19 जुलाई के संस्करण में ‘नहरें लबालब फिर भी कंठ सूखे’ नामक शीर्षक से प्रकाशित किया था। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने संज्ञान लेकर रामनगर जलघर से तो नियमित पेयजल सप्लाई शुरू कर दी लेकिन चंपापुरी मुख्य जलघर से जुड़े शहर के आधे भाग में अब भी नियमित पेयजल सप्लाई विभाग नहीं कर पा रहा। इसका कारण मुख्य जलघर की स्टोरेज क्षमता आबादी के अनुरूप पर्याप्त नहीं है। फिलहाल विभाग को भी इसका कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा है और जैसे-तैसे पैंतरे खेलकर विभाग काम चला रहा है।
चंपापुरी जलघर से जुड़ी कॉलोनियों के लोगों को पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। स्टोरेज क्षमता प्रतिदिन पेयजल सप्लाई छोड़ने में आड़े आ रही है। ऐसे में शहर के करीब 35000 लोगों को अपने स्तर पर ही पेयजल जुटाना पड़ रहा है। विभाग के पास फिलहाल इस समस्या से छुटकारा दिलाने की कोई प्लानिंग नहीं है। विभागीय अधिकारी हर दांव खेलने के बाद ही पेयजल सप्लाई की इस प्रक्रिया को अपनाने का तर्क दे रहे हैं। शहर में दो जलघरों में से एक रामनगर जलघर से शहर के 40 प्रतिशत एरिया में रोजाना सप्लाई हो रही है जबकि 60 प्रतिशत एरिया में एक दिन छोड़कर सप्लाई की जा रही है। शहर के बाजारों में दुकानदार रोजाना करीब 75 सौ प्राइवेट आरओ सप्लाई के जरिए कै न भी रखवाने को मजबूर हैं। रामनगर जलघर के अधीन आने वाली कॉलोनियों में तो प्रतिदिन पानी पहुंच रहा है जबकि आधे शहर में एक दिन छोड़कर एक दिन पेयजल सप्लाई पहुंच पा रही है। दोनों जलघरों से जुड़ी करीब एक दर्जन कॉलोनियां ऐसी हैं जहां पानी का प्रेशर पहुंच ही नहीं पा रहा है। इस समय नहरों में पर्याप्त पानी चल रहा है। इस दिनो बारिश का सीजन होने की वजह से पीछे से पहाड़ों से बरसाती पानी नहरों में चल रहा है। ऐसे में जब तक बारिश का मौसम रहेगा तब तक नहरों में पानी का सिलसिला जारी रहेगा। सितंबर में नहरों का टाइमटेबल नए सिरे से बनाया जा सकता है। इस समय बिना टाइमटेबल के ही नहरों में पानी चल रहा है ताकि पीछे से जलभराव के क्षेत्रों से पानी का उठान कर नहरों के जरिए इसका समायोजन होता रहे।
पानी का कम दबाव बढ़ा रहा परेशानियां
जनस्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में पानी होने के बाद भी शहर के आधे भाग में नियमित और आधे भाग में एक दिन छोड़कर पेयजल सप्लाई की जा रही है। ऐसे में शहर में पानी की कमी लगातार बनी हुई है। शहर की बाहरी कालोनियों में पानी का संकट अधिक बना हुआ है। शहर के घिकाड़ा रोड हरि नगर और रेलवे लाइन के साथ एरिया, प्रेम नगर कालोनी के करीब 30 प्रतिशत एरिया में पेयजल सप्लाई का दबाव ही नहीं रहता है। कालोनी के कई भागों में तो तीन से चार दिन में पानी की सप्लाई हो रही है। इसी प्रकार शहर की कई अन्य कालोनियों में भी समय- समय पर पेयजल संकट बना रहता है। एमसी कालोनी, लोहारू रोड, दिल्ली रोड सहित विभिन्न कालोनियों में पानी का प्रेशर काफी कम है। इन कालोनियों में पानी का दबाव नहीं बन पाने की वजह से पानी का संकट बना रहता है।
विभाग के पास नहीं पानी स्टोरेज की क्षमता
जन स्वास्थ्य विभाग के पास इस समय पेयजल स्टोरेज की क्षमता शहर की आबादी के अनुरूप नहीं है इसी वजह से यह समस्या बनी हुई है। विभाग को मजबूरन पानी की बचत करनी पड़ रही है ताकि अचानक पानी का संकट न गहरा जाए। विभाग के पास मात्र 20 दिन का पानी स्टोरेज की क्षमता है। पिछले 10 सालों में शहर की आबादी में बढ़ोतरी हुई है लेकिन पानी की स्टोरेज क्षमता नहीं बढ़ाई गई है। इस समय शहर की आबादी करीब 75 हजार को पार कर गई है। इतना ही नहीं हर साल यह आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। इस समय शहर को एक और जलघर की सख्त जरूरत महसूस होने लगी है ताकि पानी का संकट समाप्त हो।
बूस्टिंग स्टेशन बढ़ते रहे ,पानी सप्लाई घटती रही
शहर में नया एरिया आबाद होने पर बूस्टिंग स्टेशन तो बढ़ रहे हैं लेकिन न तो नए जलघर बने और न ही मौजूदा जलघरों की पेयजल क्षमता बढ़ाई गई। नया एरिया आबाद होने पर पानी की जरूरत को देखकर वहां नया बूस्टिंग स्टेशन का निर्माण तो करवा दिया जाता है चाहे वहां पानी का प्रैशर बने या नहीं। इस प्रकार पूरे शहर में इस समय आठ बूस्टिंग स्टेशन हैं। करीब पांच सालों में तीन नए बूस्टिंग स्टेशन बढ़ गए हैं। इनमें जलघरों से ही पानी की आपूर्ति होती है। ऐसे में जलघरों का पानी अब कम पड़ने लगा है।
महिलाएं बोली: स्थायी समाधान के लिए बढ़ाई जाए स्टोरेज क्षमता
शहर में आए दिन पानी का संकट बना रहता है। गर्मियों में बुरा हाल है। पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। शहर में पानी की आपूर्ति में बढ़ोतरी करने की जरूरत है। इसके लिए विशेष पेयजल प्लान तैयार की जाएं ताकि आने वाले लंबे समय तक पानी की समस्या हल हो जाए। - अनीता, वार्ड-21
अब जिला बन जाने पर शहर के पानी की क्षमता भी बढ़नी चाहिए। विभाग और सरकार को चाहिए कि शहर में एक और बड़ा जलघर बना दिया जाए ताकि अगले कई दशकों तक पानी की समस्या का समाधान हो जाए। एक दिन छोड़कर एक दिन पेयजल सप्लाई आने से काम नहीं चल पा रहा है। - बिमला, वार्ड-16
पानी की रोजाना सप्लाई नहीं हो रही है। आजकल घरों में पानी की खपत ज्यादा है ऐसे में विभाग व सरकार को भी पानी की आपूर्ति बढ़ानी चाहिए। शहर में एक और जलघर का निर्माण करने की सख्त जरूरत है। हर साल शहर की आबादी बढ़ रही है। पानी की खपत बढ़ रही है। - बिमला देवी, वार्ड-10
पेयजल की समस्या विकट है। उन्हें पीने का पानी खरीदकर काम चलाना पड़ रहा है। शहर से बाहर वाहन आदि के जरिए पानी लाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि पानी की इस समस्या का स्थाई समाधान होना चाहिए। शहर की आबादी बढ़ रही है उस अनुपात में पानी आपूर्ति में भी सुधारीकरण और विस्तार होना चाहिए। - रामरती, वार्ड नंबर- आठ
कोट
शहर के रामनगर जलघर से नियमित पेयजल सप्लाई की जा रही है जबकि मेन चंपापुरी जलघर से एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई हो रही है विभाग ने इस चंपापुरी जलघर के सभी जोन में पेयजल आपूर्ति की अवधि बढ़ा रखी है। - एसडीओ रामपाल, जनस्वास्थ्य विभाग