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वेतन न मिला तो करनी पड़ेगी किसानों की तरह आत्महत्या

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वेतन न मिला तो करनी पड़ेगी किसानों की तरह आत्महत्या
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छह माह से वेतन न मिलने पर भड़के पेपर मिल कर्मियों ने किया प्रदर्शन
बोले, छह माह से वेतन न मिलने पर खाने के पड़ रहे लाले, आत्महत्या करने की आ पड़ी नौबत
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। छह माह से वेतन न मिलने पर भड़के पेपर मिल कर्मियों ने गुरुवार को मिल के गेट के समक्ष धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में मिल की तीनों कर्मचारियों यूनियनों के पदाधिकारियों व कर्मचारियों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वेतन न मिलने पर उनके बच्चे व परिवार के अन्य सदस्यों को खाने के लाले पड़ रहे है। जिसके चलते अब तक बस आत्महत्या करने की नौबत आ गई है। यदि जल्द उनका वेतन न मिला तो वे भी मध्यप्रदेश के किसानों की तरह आत्महत्या करने को मजबूर होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि वेतन न मिलने पर कर्मचारी हड़ताल पर भी जा सकते है।
बतां दे कि बल्लारपुर इंडस्ट्रीज यमुनानगर (पेपर मिल) में करीब दो हजार कर्मचारियों का छह माह से वेतन रुका हुआ है। वेतन न मिलने पर गुरुवार को मिल की कर्मचारी यूनियन श्री गोपाल पेपर मिल लेबर यूनियन, श्री गोपाल कारगार यूनियन व बेल्ट मजदूर संघ एकजुट हो गई। तीनों यूनियनों के बैनर तले सैकड़ों कर्मचारी मिल के गेट पर आ गए और धरने पर बैठ नारेबाजी करने लगे। श्री गोपाल पेपर मिल्स लेबर यूनियन के प्रधान रमन त्यागी, अनिल कुमार, राजेश, नीरज, सुखदेव, नीरज ने बताया कि पेपर मिल में काफी दिनों से असंतोष का माहौल चला आ रहा है। इसका एक मात्र कारण मिल की मौजूदा मैनेजमेंट के एक अधिकारी के सिवा दूसरा कोई नहीं है। आरोप है कि मिल के ये अधिकारी पिछले समय में जहां भी रहे उसका अतीत बताता है कि किसी को चैन से रहने देना उनकी फितरत में नहीं है। वे पहले मलेशिया में थे वहां भी उस यूनिट का बंटाधार करके आए है। अब यह पिछले लगभग दो-चार साल से बिल्ट यूनिट श्री गोपाल में कार्यभार संभाले हुए हैं और अब यहां का बेड़ा गर्क करने की तैयारी में लगे है। जब उन्होंने यहां का चार्ज संभाला है तभी से यूनिट का बुरा हाल है और गरीब मजदूरों के बीवी-बच्चे परेशान है। इसी दौरान पिछले वर्ष लगभग हर मास तक मिल की प्रोडक्शन बिल्कुल बंद है और मिल के मजदूरों क ो वेतन भी नहीं मिल रहा है।
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नहीं रहे खाने के दाने
कर्मचारी नेताओं ने बताया कि वेतन न मिलने से कर्मचारियों के घरों में खाना खाने तक दिक्कत हो रही है। कुछ के घर में खाने के दाने तक नहीं रहे। बच्चों को खाने के लाले पड़ रहे है। ऐसे में मजदूर बहुत परेशान है, नौबत आत्महत्या करने तक की आ रही है और यदि कोई कर्मचारी आत्महत्या कर ले तो इसकी सारी की सारी जिम्मेदारी केवल मिल मैनेजमेंट की होगी।

पेपर डिस्पैच करने पर और भड़के कर्मी :
कर्मचारियों ने बताया कि वेतन न मिलने पर कर्मचारी यूनियनों ने मिलकर मिल से तैयार माल को प्रेषित करने पर प्रतिबंध लगा दिया था। चार-पांच दिन से यह बंद है। गुरुवार को मिल प्रबंधकों ने चुपचाप एक ट्रक पेपर का डिस्पैच कर दिया। जिससे वर्कर्स और भड़क गए और मिल गेट के सामने टेंट लगाकर धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनका वेतन नहीं दिया गया तो वे जल्द ही अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जा सकते है।
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वेतन के अलावा ये भी है अन्य मांगे :
कर्मचारी नेताओं ने बताया कि कर्मचारियों की अनेक मांगे लंबित पड़ी हुई है। पिछले छह महीने का मासिक वेतन रुका हुआ है। वर्ष 2015 का वार्षिक बोनस, वर्ष 2016 में हुए समझौता वार्ता के एरियर का भुगतान वर्ष 2016 का सुपर प्रोडक्शन बोनस न देना कर्मचारियों के लिए बनाई गई सोसायटी की लगभग डेढ़ करोड़ का भुगतान ना करना। 2016 को रिटायर्ड हुए कर्मचारियों की ग्रेच्यटी का ना देना। 2016 को रिटायर्ड हुए वर्करों की फेयरवैल पार्टी का न होना।
फोटो : 15 से 17 व 19
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