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प्लांट के टैंक में डूबकर 3 मजदूरों की मौत

Sat, 12 Mar 2016 01:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,रोहतक
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सड़क हादसा - फोटो : amar ujala
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लाहली के जंगल में स्थित मोबिल ऑयल रिफाइन प्लांट के टैंक में डूबकर तीन मजदूरों की मौत हो गई। तीनों मजदूर बिहार के समस्तीपुर व लखीसराय जिले के रहने वाले थे। हादसा बृहस्पतिवार रात को हुआ, जबकि उनके टैंक में डूबे होने का पता शुक्रवार सुबह लगा। पुलिस और एफएसएल की टीम ने पहुंचकर छानबीन की और तीनों के शव पोस्टमार्टम के लिए पीजीआई भेजे गए। आशंका जताई जा रही है कि तीनों को पास पड़े तारों से करंट लगा और बाद में बेसुध होकर टैंक में गिरने से मौत हो गई। मामले में प्लांट से जुड़े दो लोगों पर केस दर्ज किया गया है।
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भिवानी रोड पर लाहली गांव के जंगल में रोहतक के रहने वाले रमेश मित्तल का महावीरा उद्योग के नाम से प्लांट है। यहां खराब मोबिल ऑयल को रिफाइन किया जाता है। रमेश मित्तल पहले उस प्लांट को खुद चलाते थे। लेकिन उन्होंने कुछ समय पहले ही मूलरूप से पानीपत के ढार गांव और हाल में दिल्ली के कर्मपुरा में रहने वाले शिवकुमार शर्मा को प्लांट किराये पर दिया हुआ है। प्लांट पर दिन और रात की शिफ्ट में तीन-चार मजदूर काम करते हैं। बृहस्पतिवार रात को बिहार के समस्तीपुर जिले के नामापुर गांव के रहने वाले मदन साहनी (45 वर्ष), अरुण यादव (35 वर्ष) और लखीसराय जिले के नंदलाल (30 वर्ष) की ड्यूटी थी।

प्लांट के चौकीदार दिनेश तिवारी ने बताया कि वे तीनों रात को अंदर काम कर रहे थे। जबकि वह लगभग दो बजे सोने चला गया। वह शुक्रवार सुबह उठकर प्लांट के अंदर पहुंचा, लेकिन एक भी मजदूर दिखाई नहीं दिया। उसने सोचा कि तीनों मजदूर ड्यूटी कर घर चले गए होंगे। लेकिन चौकीदार के पास अरुण के भाई सुशील ने फोन करके पूछा कि अरुण ड्यूटी खत्म होने के बाद भी घर नहीं पहुंचा।
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चौकीदार दोबारा प्लांट के अंदर देखने गया तो उसने मजदूरों को टैंक में डूबा हुआ देखकर प्लांट मालिक शिवकुमार को फोन किया। शिवकुमार ने कलानौर थाना पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने तीनों मजदूरों के शव टैंक से बाहर निकलवाए। कलानौर थाने के एसएचओ संजय कुमार का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के अलावा जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट होगी। 

करंट होने की जांच कर रही पुलिस
तीनों के शव पूरी तरह से अकड़े हुए थे। टैंक के आसपास बिजली के काफी तार पड़े थे। माना ये भी जा रहा है कि तीनों को करंट लगा और वे अचेत होकर टैंक में गिर गए, जिससे उनकी मौत हो गई। पुलिस यह मान रही है कि इतने समय के लिए पानी के अंदर पड़े रहने से इस तरह शरीर नहीं अकड़ सकता है। जांच की जा रही है कि मजदूरों को पहले करंट तो नहीं लगा है।

मदन को एक दिन पहले खींच लाई मौत
प्लांट में मदन साहनी एक दिन पहले ही फारमैन के पद पर नौकरी के लिए आया था। जबकि अरुण यादव यहां एक महीने पहले ही नौकरी पर आया था। नंदलाल काफी समय पहले से नौकरी करता था।

परिजनों का बुरा हाल, पत्नी बेहोश
नंदलाल का परिवार यहां नहीं रहता है। अरुण यादव का भाई सुशील यहां रहता है। जबकि मदन साहनी की पत्नी रामदुलारी व बेटा सुजीत साथ में रहते हैं। मदन साहनी की पत्नी और बेटा दोनों ही तुरंत प्लांट पर पहुंच गए। मदन का शव देखकर उनकी पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और वह बेहोश हो गईं। परिजनों ने उनको जैसे-तैसे संभाला।

रमेश मित्तल और शिवकुमार शर्मा दोनों के खिलाफ अरुण के भाई सुशील ने मुकदमा दर्ज कराया है। जांच में देखा जाएगा कि इनमें से प्लांट मालिक कौन है और उसे चलाने की किसकी जिम्मेदारी है। उस आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट शनिवार को आएगी।
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एसआई जसवंत, जांच अधिकारी।
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