स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जिले की 26 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है। इन पंचायतों को पहले विश्व क्षय रोग दिवस पर 24 मार्च को सम्मानित किया जाना था, लेकिन आचार संहिता लगने की वजह से अब इन सभी पंचायतों को चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्यक्रम आयोजित कर सम्मानित किया जाएगा। जिले की कुल 33 ग्राम पंचायतों ने अपने आपको टीबी मुक्त ग्राम पंचायत घोषित किया था, लेकिन बाद में जिला और राज्य स्तर पर हुए सत्यापन में केवल 26 ग्राम पंचायतें ही टीबी मुक्त निकली। 7 ग्राम पंचायतों को इस प्रक्रिया से फिलहाल बाहर कर दिया गया है। अब सभी ग्राम पंचायतों को लोकसभा चुनाव के बाद कार्यक्रम आयोजित कर सम्मानित करने का काम स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया जाएगा। यहां बता दे कि स्वास्थ्य विभाग ने ऐसी ग्राम पंचायतों की रिपोर्ट मांगी थी, जहां पर एक हजार की जनसंख्या के पीछे 30 सैंपल टीबी जांच को लेकर लिए गए थे। इसके अलावा ब्लगम की जांच 85 फीसदी रही थी। विभाग गाइड लाइन के मुताबिक 33 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त को लेकर नामांकित हुई थी। उसके बाद जिला व राज्य स्तर पर स्वास्थ्य विभाग की टीरों द्वारा इन ग्राम पंचायतों का सत्यापन करने का काम किया गया। यहां बता दे कि पिछले साल 2023 जिले में टीबी के 2018 मामले मिले थे।
टीबी मरीजों की जिले में ये रही है पिछले वर्ष स्थिति
जिले में टीबी को लेकर हुई जांच में जिले में 2618 टीबी मरीजों का उपचार शुरू हुआ। इसमें 1293 पुरुष, 724 महिलाएं पॉजिटिव मिले थे। इसके अलावा 0 से 14 साल के 219 बच्चे पॉजिटिव मिले हैं।
जिले के यह गांव हुए टीबी मुक्त
टीबी मुक्त गांव की सूची में जिले के गांव तामसपुरा, मांगावास, सूरजगढ़, भालगढ़, बमबुलिया, जटवाड़ा, सरोला, चांदपुर, छबीली, खेराथरू, बाजितपुर, कालियावास, दिमाना, लकड़िया, भंभेवा, कैमलगढ़, बीड सुनार, पाहसोर, माजरी, जगरतपुर, गंगड़वा, सौंधी, निमाणा, कुकडोला, एमपी माजरा, लगरपुर शामिल हैं।
जिले की 33 में से 26 ग्राम पंचायत टीबी मुक्त घोषित विभाग ने की है। चुनाव आचार संहिता के चलते अब उनको चुनाव प्रक्रिया पूरा होने के बाद सम्मानित किया जाएगा। हमारा मकसद केवल कुछ गांव को नहीं बल्कि पूरे जिले के सभी गांव व वार्डों को टीबी मुक्त करना है।
डॉ. ब्रह्मदीप सिंह, सिविल सर्जन, झज्जर