पानीपत के चार गांव कर रहे खेलों में जिले का नाम रोशन, सरकार की सहायता के बगैर ही नाम कमा रहे खिलाड़ी
भूपेंद्र आट्टा
पानीपत। पानीपत के चार गांव ऐसे हैं जिनके खिलाड़ी बगैर सरकार की मदद के इंटरनेशनल तक खेल चुके हैं। जिले के इन गांवों से खिलाड़ी देश भर में अपना नाम रोशन कर चुके हैं। गांव बुडशाम कबड्डी में, मनाना गांव की लड़कियां खो-खो में, अहर व कुराना गांव के खिलाड़ी बास्केटबॉल में प्रदेश के साथ-साथ देशभर में जिले का नाम रोशन कर चुके हैं। मनाना गांव में गांव के लड़कियों के सरकारी स्कूल की प्राचार्य सरिता देवी का सपना था कि वह गांव में एक लड़कियों की टीम तैयार करे। जिसे पूरा करने में गांव के कोच रामस्वरूप राठी व रविंद्र सैनी ने योगदान दिया व गांव में धीरे-धीरे से 45 लड़कियों को खेल में तैयार किया। बुडशाम गांव में भी तीन मुख्य कोच है, जिनकी वजह से गांव में खिलाड़ियों की फौज खड़ी हुई। बुडशाम के 70 से अधिक खिलाड़ी खेल कोटे से सरकारी नौकरी हासिल कर चुके हैं। वहीं अहर व कुराना में अनूप खैंची नामक कोंच ने 2008 में बास्केटबॉल की शुरुआत की थी। अनूप खैंची उस समय दसवीं कक्षा में थे व सभी को इस खेल के बारे में बताया और गांव में ग्राउंड तैयार किया।
अहर व कुराना गांव
दसवीं क्लास में अनूप खैंची ने की शुरुआत:
गांव अहर कुराना में बास्केटबॉल की शुरुआत गांव के ही लड़के अनूप खैंची ने की थी। खिलाड़ी सचिन ने बताया कि 2008 में अनूप दसवीं क्लास में थे, तब से ही उन्होंने गांव में इस खेल की शुरुआत की। उन्होंने गांव के लड़कों को जोड़ा व स्कूल ग्राउंड में प्रेक्टिस करने लगे। गांव में इस खेल के बारे में किसी को कुछ नहीं पता था, अनूप ने ही सबको खेलना सिखाया। अनूप फिलहाल बीटेक करके आस्ट्रेलिया में हैं और गांव में जब भी आते हैं बच्चों को कोचिंग देकर जाते हैं। इनके अलावा वेदपाल कोच हैं जो दिल्ली के आर्मी सेंटर में कोचिंग देते हैं। दोनों कोच विडियो कॉल करके व समय समय पर गांव में आकर कोचिंग देते हैं। इनके अलावा नरेंद्र व सोनू कोच है जो आर्मी में हैं। वो भी गांव में बास्केटबॉल की शुरुआत करने वालों में से ही एक है।
गांव के खिलाड़ी आर्मी में दे रहे कोचिंग :
अहर गांव के खिलाड़ी तेजबीर व वेदपाल आर्मी के खेल सेंटरों पर कॉचिंग दे रहे हैं। तेजबीर फतेहगढ़ में आर्मी कोच है व वेदपाल दिल्ली में आर्मी कोच है।
गांव के दर्जनों खिलाड़ियों को मिली खेल कोटे से नौकरी
अहर व कुराना गांव के दर्जनों खिलाड़ियों को खेल कोटे से नौकरी मिल चुकी है। तेजबीर, वेदपाल, दीपक खैंची, दीपु, साहिल, सावन, विकास, नरेश, परविन, मंजित, सचिन, रवि आर्मी में हैं। इनके अलावा रवि खैंची खेल कोटे से ही इंडियन रेलवे में हैं।
आर्मी सेंटर में चयनित हो चुके हैं दर्जनों जूनियर खिलाड़ी :
अहर व कुराना गांव के दर्जनों खिलाड़ी आर्मी सेंटर में चयनित हो चुके हैं। मुकेश, अश्वनी, गौरव, अंकित, मोहित, रोहित, रविंद्र, धर्म सिंह, साहिल, दिनेश, विशाल, अंकित, अजय आर्मी सेंटर में कोचिंग ले रहे हैं। इन सबका खर्चा इंडियन आर्मी ही उठाती है। इनको 18 साल के बाद आर्मी में ही जॉब मिल जाएगी।
दीपक खैंची खेल चुके हैं अंतरराष्ट्रीय:
दीपक खैंची गांव के इंटरनेशनल प्लेयर है। इन्होंने जूनियर में इंटरनेशनल खेला था। जो वर्तमान में खेल कोटे से आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनके अलावा साहिल ने इंटर यूनिवर्सिटी में प्रथम स्थान हासिल किया था।
मनाना गांव
2010 में स्कूल प्राचार्य ने देखा था गांव में लड़कियों की टीम बनाने का सपना :
गांव मनाना में खो-खो की शुरुआत 2010 में हुई थी, इस दौरान किसी को खो खो के बारे में ज्यादा नहीं पता था। गांव से कन्या पाठशाला की प्राचार्य ने गांव के अंदर लड़कियों की टीम तैयार करने का फैसला लिया जिसके बाद कोच रामस्वरुप राठी व रविंद्र सैनी ने लड़कियों की टीम तैयार की व स्कूल के ग्राउंड बनाकर प्रेक्टिस शुरू करवा दी। शुरुआत में ज्यादा खिलाड़ी नहीं जुड़े लेकिन धीरे-धीरे उपलब्धियों को देखकर लड़कियों ने खेल में रुचि लेना शुरू किया। वर्तमान में गांव में 45 लड़कियां प्रेक्टिस कर रही है। कोच रविंद्र सैनी अपना कीमती समय देकर लड़कियों को फ्री में कोचिंग देते हैं।
मनाना गांव का लिंगानुपात 1266, जिले में तीसरे नंबर पर :-
मनाना गांव में एक हजार लड़कों पर 1266 लड़कियां हैं। यह आंकड़ा गांव में लड़कियों के प्रति सकारात्मक सोच को दर्शाता है। जिले में मनाना लिंगानुपात में तीसरे नंबर पर है। पहले नंबर पर बिंजौल गांव आता हैं, जहां 1000 लड़कों पर 1726 लड़कियां हैं।
सुविधा के नाम पर सरकार की तरफ से केवल एक खेल नर्सरी :
कोच जितेंद्र सैनी ने बताया कि उनके गांव में सरकार की तरफ से कोई सुविधा नहीं दी गई है। गांव में एक स्टेडियम है, जिसमें जंगली घास खड़ी है। स्टेडियम में लड़कियों के लिए कपड़े बदलने तक की जगह नहीं है। इसलिए स्टेडियम खंडर ही पड़ा है। स्कूल ग्राउंड में ही खुद पैसे लगाकर स्टेडियम तैयार किया गया है। गांव में सरकार ने एक खेल नर्सरी तैयार की है, जिसमें भी केवल 15 लड़कियों को सहायता दी जा रही है। बार बार मांग करने के बाद भी नर्सरी में खिलाड़ियों की संख्या नहीं बढ़ाई जा रही है।
गांव की लड़कियां खेल चुकी नैशनल व इंटर नेशनल, नेशनल की पॉजीशन आने में गांव के खिलाड़ियों का अहम योगदान :
गांव की 25 लड़कियां राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी हैं। लगभग हर खिलाड़ी का राष्ट्र स्तर पर मेडल आ चुका है। गत दिनों पहले हुई ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में कुवी का पहली बार तीसरा स्थान आया है। जिसमें 12 में से 6 खिलाड़ी मनाना गांव के रहे। वहीं प्रदेश की जब भी कोई पॉजिशन आती है, हर बार गांव के खिलाड़ी टीम में मौजूद रहते हैं। गांव की ही लड़की मुकेश कुमारी एशियन चैंपियनशिप खेल चुकी है। जिसमें भारत की टीम को गोल्ड मेडल प्राप्त हुआ था।
बुडशाम गांव के प्रो कबड्डी लीग में नो खिलाड़ी हो चुुके हैं चयनित :-
प्रो कबड्डी लीग में दुनिया भर से प्रसिद्ध खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। जो अलग अलग टीमों में सिलेक्टर्स के द्वारा चुने जाते हैं। इसी लीग में पानीपत के बुडशाम गांव से 9 खिलाड़ियों का चुनाव हुआ है। बुडशाम गांव में पिछले 25 वर्षों से कबड्डी का क्रेज है, तब से ही यह गांव अपनी परफॉर्मेंस के कारण जिले के साथ साथ प्रदेश में शीर्ष पर बना हुआ है।
पानीपत को पहला अर्जुन अवॉर्डी खिलाड़ी भी इसी गांव से मिला है। कबड्डी के प्रसिद्ध खिलाड़ी जसवीर सिंह को 2017 में अर्जुन अवार्ड से नवाजा गया था।
बुडशाम के 70 से ज्यादा खिलाड़ियों को मिल चुकी है खेल कोटे से सरकारी नौकरी :
गांव के 70 से ज्यादा खिलाड़ियों को स्पोर्ट्स कोटे से नौकरी मिल चुकी है। जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। गांव का बच्चा बच्चा इस खेल को अपनी धरोहर मानता है और सुबह शाम कबड्डी खेलने के लिए स्टेडियम में जाता है।
तीन प्रमुख कोच जिनकी वजह से हासिल किया ये मुकाम -
गांव के खिलाड़ी प्रविन बिरवाल व जसबीर ने का कहना है कि गांव की खिलाड़ियों को इस मुकाम तक पहुंचाने का श्रेय उन्हीं के गांव के तीन प्रमुख कोचों को जाता है। उन्होंने कहा कि सीनियर कोच कृष्ण पहलवान, रणवीर गुलिया व विनोद कोच की वजह से ही गांव की टीम इतनी मजबूत बनी है कि देशभर के सिलेक्टर्स की नजर इस गांव की टीम पर रहती हैं। कोच रणबीर गुलिया ने बताया कि उनके गांव में रोजाना 200 से अधिक खिलाड़ी सुबह शाम प्रैक्टिस करते हैं। वहीं स्कूल में भी 70 बच्चे प्रेक्टिस करते हैं, जिन्हें जितेंद्र मास्टर सुबह शाम तीन तीन घंटे की कोचिंग देते हैं। गांव में एक साथ 8 ग्राउंड चलते हैं, जिनमें खिलाड़ी प्रैक्टिस करते रहते हैं। गांव वालों के सहयोग से इंडोर स्टेडियम बनाया गया है जिसमें मैट की सुविधा भी खिलाड़ियों को उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने खिलाड़ियों की कामयाबी का श्रेय पूरे गांव को दिया।
बुडशाम गांव के 5 खिलाड़ी खेल चुके हैं इंटरनेशनल :
बुडशाम गांव के 5 खिलाड़ी इंटरनेशनल कबड्डी खेल चुके है, गांव के जसवीर, जसमेर गुलिया, जसमेर बिरवाल, सतीश गुलिया व अनिल इंटरनेशनल खेल चुके हैं। इन सभी खिलाड़ियों ने भारतीय टीम में रहकर एशियाड चैंपियन तक खेली है।
यह 9 खिलाड़ी हुए हैं प्रो कबड्डी लीग में शामिल :-
प्रवीन बिरवाल, सोमबीर गुलिया, अनिल कुमार, रोहित, जसबीर सिंह , सुनील, मोनू जसमेर व जसमेर गुलिया प्रो कबड्डी लीग में खेल चुके हैं।