एमडीयू के बीपीएड व एमपीएड कोर्स को मान्यता मिलने का सांसद दीपेंद्र ने किया दावा
- हरियाणा में केंद्रीय खेल विश्वविद्यालय खोलने की मांग के साथ जियो इंस्टीट्यूट के बजाय प्रदेश के एमडीयू, सीसीएस एचएयू हिसार व कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में से एक को उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा देने का उठाया मुद्दा
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। एमडीयू के बीपीएड और एमपीएड कोर्स को मान्यता देने की मांग पर केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री ने मुहर लगा दी है। लोकसभा में यह मुद्दा रखा गया। यहां बगैर मान्यता चल रहे कोर्स के कारण विद्यार्थियों की परेशानी को उठाया गया। यह दावा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने किया है।
सांसद ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (संशोधन) विधेयक, 2017 पर लोकसभा में विद्यार्थियों की समस्या उठाई। बगैर मान्यता कोर्स के चलते छात्र-छात्राओं को काफी परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। इसके चलते दो प्रतिशत आबादी व देश के 40 प्रतिशत मेडल जीतने वाले हरियाणा के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की डिग्री को मान्यता नहीं मिल पा रही थी। विधेयक पर बोलते हुए सरकार के सामने दूसरी मांग रखी। इसमें कहा कि हरियाणा खेलों के क्षेत्र में सुपर पावर बन कर उभरा है। प्रदेश के खेल और खिलाड़ियों की उपलब्धियों को देखते हुए केंद्र सरकार हरियाणा में नेशनल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी स्थापित करे। इस पर मंत्री ने अपने जवाब में इस दिशा में ठोस आश्वासन देते हुए कहा कि आपके क्षेत्र में खेल मंत्रालय के साथ मिलकर एक विश्वविद्यालय खोला जायेगा। सांसद ने कहा कि हरियाणा सरकार ने भिवानी में चौधरी बंसीलाल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी सेटअप की है।
क्षेत्र की तीसरी मांग लोकसभा में सरकार के समक्ष रखते हुए उन्होंने कहा कि रिलायंस की जियो यूनिवर्सिटी के बजाय हरियाणा के तीन बड़े और प्रमुख विश्वविद्यालयों में से एक को उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा दिया जाए। इसमें एमडीयू रोहतक, चौ. चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय हिसार और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय शामिल है। शिक्षा व्यवस्था में कमियों को उजागर करते हुए कहा कि देश में आठ प्रतिशत प्राथमिक स्कूलों में केवल एक शिक्षक है। इसके अलावा हमारे देश में बड़ी तादाद में ऐसे स्कूल हैं, जहां 80 छात्रों पर केवल 1 शिक्षक की उपलब्धता है। इस अनुपात को पढ़ाई के मामले में कारगर नहीं माना जाता।
शिक्षक प्रशिक्षण पर जोर देते हुए कहा कि जिस उद्देश्यों को लेकर इस विधेयक को स्थापित किया गया था, उसे हासिल करने में सरकार अभी भी कामयाब नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में शिक्षा क्षेत्र पर जीडीपी का छह प्रतिशत खर्च करने का वादा किया था। ये महत्वपूर्ण वादा था, क्योंकि पूरी दुनिया में जितने भी विकासशील या विकसित देश हैं उनमें जीडीपी का 5 प्रतिशत से ज्यादा खर्च किया जाता है। असलियत ये है कि सरकार अपने वादे के मुताबिक खर्च नहीं कर पाई। इतना ही नहीं पहले जो खर्च होता था उससे भी कम यानी जीडीपी का मात्र 3 प्रतिशत ही शिक्षा क्षेत्र पर खर्च किया जा रहा है। ऐसे में लोग भविष्य में मोदी सरकार के वायदों पर भरोसा नहीं करेंगे।