हर महीने होती है 32 करोड़ की बिजली चोरी
बिजली अधिकारी पकड़ पाते हैं सिर्फ 24 लाख की
-रोहतक में बड़े पैमाने पर हो रही बिजली चोरी रोकने में नाकाम साबित हो रही बिजली निगम की विजिलेंस विंग
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। बिजली निगम की विजिलेंस विंग के अधिकारी और कर्मचारी बिजली चोरी रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं। रोहतक के शहर और देहात में हर महीने 32 करोड़ रुपये की बिजली चोरी होती है, लेकिन विंग महीने में बमुश्किल 24 से 25 लाख रुपये की ही बिजली चोरी पकड़ पाती है, वह भी शहर में। देहात क्षेत्र में बिजली चोरी को पकड़ने के लिए कोई कार्रवाई ही नहीं होती।
बिजली निगम की विजिलेंस विंग में एक एक्सईएन, दो एसडीओ, चार जेई, एक स्टेनो, एक चतुर्थ श्रेणी कर्मी, कंप्यूटर ऑपरेटर तैनात हैं। इस विंग का कार्य क्षेत्र रोहतक, सोनीपत और झज्जर है। विभागीय शिकायतों की जांच करने के साथ ही बिजली चोरी रोकना विंग का मुख्य काम है। विजिलेंस टीम ने जून में रोहतक में 11, सोनीपत में पांच और झज्जर में दो जगह बिजली चोरी पकड़ी।
रोहतक शहर में 601 जगह पकड़ी गई बिजली चोरी, गांव में एक भी कार्रवाई नहीं
बिजली निगम ने जून में 2770 कनेक्शनों को चेक किया, जिनमें से 601 जगह बिजली चोरी पकड़ी गई। इन बिजली चोरों पर 1 करोड़ 82 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई है। वहीं देहात में एक भी बिजली चोरी नहीं पकड़ी गई, जबकि 31-32 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
हर माह 31-32 करोड़ की बिजली चोरी में 95 फीसदी देहात में
रोहतक जिले में हर माह 31-32 करोड़ रुपये की बिजली चोरी होती है, जिसमें करीब 90-95 फीसदी बिजली चोरी देहात क्षेत्र में होती है। देहात क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हो रही बिजली चोरी को रोकने के लिए बिजली चोरी करने वालों की लिस्ट तक तैयार नहीं की गई है।
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विंग के पास बिजली चोरी पकड़ने के साथ ही अन्य काम भी हैं। विभागीय शिकायतों की जांच पड़ताल करना भी विजिलेंस का ही काम है। विभाग का मुख्य काम गड़बड़ियों और विभागीय शिकायतों की जांच करना है। बिजली चोरी को पकड़ने के लिए निगम में कर्मचारी तैनात हैं।
विजेंद्र नरवाल, विजिलेंस एक्सईएन